लालू यादव की आने वाली किताब में दावा-महागठबंधन में फिर से लौटना चाहते थे नीतीश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लालू यादव के जीवन पर आने वाली किताब 'गोपालगंज टू रायसीना' ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस किताब में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर कई दावे किए गए हैं। किताब का दावा है कि नीतीश कुमार महागठबंधन से अलग होने के बाद फिर से महागठबंधन में वापस आना चाहते थे। लेकिन लालू ने उन्हें मना कर दिया क्योंकि नीतीश पर उनका भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया। गौरतलब है कि लालू यादव इस वक्त चारा घोटाले को लेकर जेल में हैं।
किताब में दावा किया गया है कि नीतीश ने महागठबंधन में फिर से वापस आने की कोशिश भाजपा में जाने के छह महीने के भीतर की थी। लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को यह बात कही। अभी इस किताब का लोकापर्ण नहीं हुआ है। तेजस्वी ने कहा कि मेरे पास इस बात के सबूत हैं की नीतीश कुमार ने कई बार हमारे साथ लौटने की कोशिश की थी।
जदयू के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर से मुलाकात के सवाल पर तेजस्वी ने कहा कि हमने कभी भी उनको नहीं बुलाया। वो खुद ही हमारे पास आए थे, सभी जानते हैं कि प्रशांत बिना वजह किसी से नहीं मिलते हैं। कहा जाता है कि प्रशांत किशोर ही वह व्यक्ति थे जिन्होने राजद और जदयू को एक साथ महागठबंधन के बैनर तले लाए थे।
राजद की टिकट पर मधेपुरा से चुनाव लड़ रहे पूर्व जदयू नेता शरद यादव ने भी कहा है कि नीतीश कुमार एनडीए में जाने के बाद वापस महागठबंधन में आना चाहते थे। लालू यादव ने जो भी अपनी किताब में लिखा है वो सच है। नीतीश कई बार महागठबंधन के साथ दोबारा गठबंधन करना चाहते थे। राजद, जदयू और कांग्रेस तीनो ने मिलकर 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा था। जीत के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने थे और तेजस्वी को उप मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली थी। लेकिन नीतीश कुमार ने 2017 में राजद,कांग्रेस के महागठबंधन से बाहर निकल कर भाजपा का दामन थाम लिया था। जिसके बाद से लालू परिवार और नीतीश कुमार के बीच तल्खी बढ़ गई।