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सपा के गढ़ में इस बार भी नहीं खिल पाया कमल, इस वजह से आजमगढ़ में जीते अखिलेश यादव
Thu, 23 May 2019 09:33 PM IST
Prachi Priyam
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Prachi Priyam
Updated Thu, 23 May 2019 09:33 PM IST
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अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
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आजमगढ़
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समाजवादी पार्टी का गढ़ मानी जाने वाली आजमगढ़ लोकसभा सीट पर यूं तो भाजपा ने भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' को उतार कर जातीय समीकरण के आधार पर सेंध लगाने की पूरी कोशिश की, लेकिन अखिलेश अपनी साख बचाने में कामयाब रहे। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार निरहुआ को भारी अंतर से हरा कर अपनी जीत सुनिश्चित की है।
इन कारणों से जीते अखिलेश यादव
- जातीय समीकरण के मद्देनजर अखिलेश यादव का पलड़ा शुरू से ही भारी था, क्योंकि निरहुआ भाजपा उम्मीदवार होने के कारण जातीय मुद्दों से ज्यादा पार्टी के मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे थे।
- आजमगढ़ लंबे समय से सपा-बसपा का गढ़ रहा है। यहां से मुलायम सिंह भी सांसद रह चुके हैं।
- अखिलेश राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी हैं, जबकि निरहुआ कला के क्षेत्र से आते हैं। इस वजह से भी राजनीति में लोगों ने उन्हें बहुत गंभीरता से नहीं लिया।
- आजमगढ़ की पांचों विधानसभा सीटों में सपा और बसपा का कब्जा है। यहां निचले स्तर तक भाजपा से ज्यादा इन दोनों पार्टियों की पहुंच है।
- इस बार सपा के खाते में अपने कोर वोटरों के अलावा बसपा के मतदाताओं का वोट भी आया है।
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