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लोकसभा चुनाव 2019: निशानेबाज राज्यवर्धन और चक्का फेंक खिलाड़ी पूनिया आमने-सामने

Sat, 13 Apr 2019 06:05 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: गौरव द्विवेदी Updated Sat, 13 Apr 2019 06:05 AM IST
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Lok Sabha Elections 2019: Rajyavardhan Singh Rathore face to face with Krishna Poonia
राज्यवर्धन, कृष्णा पूनिया

राजस्थान के एक चुनावी मैदान में खेल जगत के दो सितारे एक-दूसरे का आमना-सामना कर रहे हैं। एक का तो इस सीट से लड़ना तय ही था, लेकिन कांग्रेस ने नाम घोषित कर सबको चौंका दिया। ओलंपिक में डबल ट्रैप शूटिंग में भारत को रजत पदक दिलवाने वाले केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को डिस्कस थ्रो में छठे स्थान पर रहीं कांग्रेस की प्रत्याशी कृष्णा पूनिया ने चुनौती देकर जयपुर ग्रामीण लोकसभा क्षेत्र का वातावरण खेलनुमा कर दिया है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, इस सीट से राठौड़ के सामने पूनिया को उतारने की कोई चर्चा तक नहीं थी। यही नहीं, पूनिया को खुद नहीं पता था कि उन्हें राठौड़ के खिलाफ उतारा जाएगा। उन्हें भी कांग्रेस की लिस्ट आने के बाद पता चला। भाजपा ने राठौड़ को पुराने मैदान से ही कुर्सी पर निशाना साधने का मौका दिया है। 

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कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली सादुलपुर विधायक पूनिया के लिए ये नया क्षेत्र है। खिलाड़ियों के उतरने से चुनावी माहौल में खेल संबंधी टिप्पणियां भारी पड़ रही हैं। भाजपा समर्थकों का कहना है कि राठौड़ के निशाने से पूनिया बच नहीं सकती, वहीं कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि पूनिया इस बार राठौड़ को इस सीट से 'थ्रो' कर सकती हैं। पिछली जीत के बाद राठौड़ के सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहने के चलते युवाओं में जरूर अच्छी पैठ हो गई है। 
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एक नए क्षेत्र से ताजा चेहरे के रूप में अपने पहले लोकसभा चुनाव में खड़ीं पूनिया को स्थानीय जनता का भरोसा जीतने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। हालांकि प्रदेश की सत्ता परिवर्तन के बाद यहां बदला माहौल उनकी राह कुछ आसान जरूर कर रहा है। राठौड़ अपने प्रचार में भारत द्वारा अंतरिक्ष में किए गए मिशन, एयर व सर्जिकल स्ट्राइक तथा केंद्र सरकार की उपलब्धियों व कामों को गिना रहे हैं। वहीं, पूनिया किसानों की दुर्दशा, बेरोजगारी, विचारधारा व लोकतंत्र को बचाए रखने के मुद्दे उठा रही हैं।
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मुझे इस सीट से चुनाव लड़ने की जानकारी पहले से नहीं थी। यह चुनाव मेरे लिए एक चुनौती है। मेहनत में कोई कमी नहीं छोड़ूंगी। किसान की बेटी होने के कारण गांव-देहात की मुझे परेशानियां पता हैं। इस चुनाव में लड़ाई दो विचारधाराओं और लोकतंत्र की रक्षा के लिए है। पिछले पांच वर्षों में जनता से कई झूठ बोले गए हैं और जुमलेबाजी की गई है।

-कृष्णा पूनिया, प्रत्याशी, कांग्रेस

जनता ने इस सरकार के कार्य को देखा है। मोदी के नेतृत्व में पिछले पांच साल के काम और पिछले पचास सालों के कामों से कहीं अधिक हैं। पिछला चुनाव जीतकर मैं अपने क्षेत्र की जनता से हमेशा जुड़ा रहा हूं। मैंने अपने क्षेत्र के वार्ड से लेकर पंचायत स्तर तक कई विकास कार्य करवाए हैं। भाजपा के कार्यकर्ताओं की मजबूत टीम है।
-राज्यवर्धन सिंह राठौड़, केंद्रीय मंत्री
 

इस बार बदला-बदला सा है हवा का रुख

राठौड़ वर्ष 2014 में पहली बार चुनाव लड़ रहे थे, तो मोदी लहर व प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के कारण हवा पक्ष में थी। इस सीट के अंतर्गत आने वाली आठ विधानसभा सीटों में से पांच भाजपा के पाले में थीं और कांग्रेस के पास दो व एक अन्य के खाते में थी। पिछले चुनाव में उन्होंने पुराने राजनीतिज्ञ व यूपीए सरकार में मंत्री रहे सीपी जोशी को बड़े अंतर से हराया था। पांच वर्षों में राठौड़ को क्षेत्र की खास समझ हो गई है, लेकिन उनको कुछ बदले समीकरणों से जूझना होगा। अब कांग्रेस सत्ता में है और उसके पास इस क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटें हैं जबकि भाजपा के पास महज दो सीटें हैं। एक पर निर्दलीय विधायक जीता था, जो कांग्रेस में शामिल हो चुका है। ऐसे में छह विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के विधायक जोर लगा रहे हैं। राठौड़ को इन सीटों पर भारी सेंध लगानी पड़ेगी।

नया है, लेकिन परिचित चेहरा 

इस क्षेत्र के लिए पूनिया चेहरा नया जरूर हैं, लेकिन खेल जगत में नाम के कारण लोग उनसे परिचित हैं। खास बात यह है कि राठौड़ और पूनिया दोनों ने ही वर्ष 2013 में राजनीति में कदम रखा। भाजपा में शामिल होने के बाद राठौड़ ने शुरू से केंद्र की राजनीति की। राठौड़ पहला लोकसभा चुनाव इसी सीट से जीते और केंद्रीय मंत्री बने। पूनिया अपना पहला विस चुनाव हारीं, लेकिन गत दिसम्बर में विस चुनाव में वे जीतीं और विधायक बनीं।

जातीय समीकरणों का ध्यान रखा जाएगा

इस सीट पर 19.5 लाख मतदाता हैं और अन्य के मुकाबले राजपूत और जाट समाज के वोटर अधिक हैं। राजपूतों के मुकाबले जाट वोटरों की संख्या ज्यादा है। राठौड़ को राजपूत व पूनिया को जाट समाज का समर्थन मिलने से मुकाबला रोचक हो चला है। जाट बहुल क्षेत्र में ब्राह्मण, यादव और अनुसूचित जाति के मतदाता भी हैं। 2014 लोकसभा चुनाव में राठौड़ ने जोशी को 3,32,896 मतों के अंतर से हराया था। जबकि 2009 में कांग्रेस के लालचंद कटारिया जीते थे। जो यूपीए सरकार में मंत्री भी रहे। 

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