फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Lok Sabha Elections 2019: Rahul Gandhi political journey as congress president

क्या राहुल गांधी ने बदल दिया कांग्रेस की राजनीति का अंदाज?

Thu, 07 Mar 2019 01:24 PM IST
Prabudhh Jain ललित फुलारा, अमर उजाला
ललित फुलारा, अमर उजाला Published by: Prabudhh Jain Updated Thu, 07 Mar 2019 01:24 PM IST
विज्ञापन
Lok Sabha Elections 2019: Rahul Gandhi political journey as congress president
राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर एक साल से ज्यादा हो गया है।

राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर एक साल से ज्यादा हो गया है। इस दौरान वे लगातार अपने भाषणों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मुखर रहे हैं। उन्होंने अपनी उस छवि को बदलने की भरसक कोशिश की है जो 2017 से पहले आम जनमानस में एक कमजोर नेता के तौर पर उभरने लगी थी। दिसंबर 2017 में सोनिया गांधी के अध्यक्ष पद से सेवामुक्त होते ही राहुल गद्दी पर बैठे और उन्होंने अपने पहले ही भाषण में कार्यकर्ताओं से कह डाला- 

विज्ञापन


 


''हम कांग्रेस को हिंदुस्तान की ग्रांड ओल्ड एंड यंग पार्टी बनाने जा रहे हैं।''


राहुल गांधी के इस बयान से तभी अंदाजा लग गया था कि आने वाले दिनों मेंं पार्टी के भीतर युवा चेहरों को तवज्जो मिलने वाली है। इससे पहले तक पार्टी में अहमद पटेल जैसे नेताओं की धाक ज्यादा थी। अहमद पटेल को सोनिया गांधी का करीबी माना जाता है। राजनीतिक जानकर कहते हैं कि राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद अहमद पटेल को पार्टी से कमोबेश उसी तरह से साइड लाइन कर दिया गया जैसे भारतीय जनता पार्टी से आडवाणी को। राहुल के कमान संभालते ही कांग्रेस कल्चर में जो सबसे बड़ा बदलाव हुआ उससे पार्टी के युवा नेताओं को रणनीति के स्तर पर तवज्जो मिलने लगी।

विज्ञापन


दिल्ली यूनिवर्सिटी में राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर संजीव तिवारी कहते हैं कि राहुल के कमान संभालते ही पार्टी के भीतर ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट जैसे युवा चेहरों को तवज्जो मिली है। इससे पहले सोनिया गांधी के काल में पार्टी के भीतर अहम पटेल लॉबी मजबूत थी। हालांकि, सेकेंड रन लीडरशिप में रहना और लीडरशिप में रहने में अंतर तो है ही। 
विज्ञापन
विज्ञापन


संजीव कहते हैं- 

 

यह बात तो साफ है कि राहुल गांधी विपक्ष के सर्वोपरी नेता नहीं बन पाए हैं। हां, राहुल ने पार्टी को जरूर सॉफ्ट हिंदुत्व की तरफ बढ़ाया है। वह जान रहे हैं कि तुष्टिकरण की राजनीति का दौर अब खत्म हो गया है। बहुसंख्यक की राजनीति में आना पड़ेगा।



संजीव कहते हैं कि यही वजह है कि राहुल गांधी अब वही बहुसंख्यक की राजनीति कर रहे हैं जो भाजपा करती आई है। इससे पहले कांग्रेस की पूरी राजनीति अल्पसंख्यकों पर टिकी हुई थी। 2017 तक राहुल गांधी इसलिए नरेंद्र मोदी के प्रति इतने अटैकिंग नहीं थे क्योंकि उस वक्त मोदी की लोकप्रियता चरम पर थी। अब जब राहुल को बड़ा नेता बनना है तो नरेंद्र मोदी के प्रति अटैकिंग तो होना ही पड़ेगा। इसलिए ही उन्होंने चोकीदार चोर है के जरिए नरेंद्र मोदी को घेर विपक्ष के सर्वोपरी नेता बनने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो सके।

Lok Sabha Elections 2019: Rahul Gandhi political journey as congress president
राहुल गांधी
दिल्ली यूनिवर्सटी के खालसा कॉलेज में राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर नचिकेता सिंह का मानना इस मामले में कुछ दूसरा ही है। वह कहते हैं कि राहुल ने पिछले 14 महीने में संवाद का तरीका बदला है। वह अब सीधे लोगों से मिल रहे हैं। ग्राउंड पर जाकर किसानों के बीच मुखातिब हो रहे हैं। संसद के भीतर उनका आक्रमक रवैया सभी ने देखा है। इससे पता चलता है कि राजनीति पर राहुल गांधी की समझ अब संजीदा बन रही है। वह हर बात को तर्क और सबूतों के तराजू पर तोलकर बोल रहे हैं।

नचिकेता कहते हैं कि जहां भाजपा में वरिष्ठ नेताओं को साइड लाइन करने से विद्रोह जैसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं, जो कि न ही सरकार के लिए अच्छा है और न ही पार्टी के लिए। राहुल ने इससे सीखा है कि अगर कांग्रेस को आगे बढ़ाना है तो पार्टी में युवाओं के साथ ही बुजुर्ग नेताओं को भी साथ लेकर चलना पड़ेगा। वह कहते हैं-

राहुल जानते हैं कि ओल्ड को किनारे करके यंग की राजनीति नहीं की जा सकती है।


नचिकेचा कहते हैं कि आपको पंजाब से लेकर दूसरे राज्यों में कांग्रेस में ही बुजुर्ग नेता मिलेंगे राहुल समझते हैं कि युवाओं को बढ़ावा देना है तो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलना पड़ेगा। वह कहते हैं-

यह सही है कि राहुल में अभी बहुत-सी कमियां हैं। लेकिन वह कमजोर नेता  नहीं है। भाजपा ने उनकी छवि कमजोर नेता की बना दी थी जिसे उन्होंने आक्रमक छवि के जरिए काउंटर किया है। 

नचिकेता कहते हैं कि राहुल को ऐसी छवि बनानी होगी कि उन्हें क्षेत्रिय पार्टियां का भी भरपूर साथ मिल सके। उन्हें इस वक्त भाजपा के अलावा क्षेत्रीय पार्टियों से भी चैलेंज आ रहा है। ममता बनर्जी, चंद्रबाबू नायडू और मायावती ये सभी मझे हुए हैं, उम्र में भी राहुल गांधी से बड़े हैं और राजनीतिक अनुभव भी ज्यादा है। ऐसे में इनके बीच विपक्ष का सर्वमान्य चेहरा बनकर उभरना राहुल के थोड़ा मुश्किल है.....।

राहुल गांधी के सॉफ्ट हिंदुत्व पर नचिकेता कहते हैं-
 

हिंदू वोट पाने के लिए कांग्रेस को कुछ तो करना ही होगा। राहुल की राजनीति हिंदुत्व की नहीं बल्कि व्यवहारिक है।


ऐसा नहीं है कि राहुल गांधी सोनिया गांधी के अध्यक्ष रहते खुलकर काम नहीं कर पा रहे थे। यह जरूर है कि उस वक्त जवाबदेही उनकी नहीं थी लेकिन जब आपकी जवाबदेही बनती है तो जिम्मेदारी भी बढ़ती है। राहुल गांधी के पास  तथ्य और तर्क हैं तभी वह भाजपा के खिलाफ आक्रमक हो रहे हैं। नचिकेता का मानना है कि कांग्रेस कल्चर में कोई बदलाव नहीं आया है। 14 महीने बदलाव के लिए ज्यादा नहीं हैं। बता दें कि राहुल अध्यक्ष बनने के बाद  अपने पहले भाषण में भारतीय जनता पार्टी के प्रति अटैकिंग रवैये में दिखे थे। उन्होंंने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा था कि वह गुस्सा करते हैं, हम प्यार करते हैं। वो तोड़ते हैं, हम जोड़ते हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed