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23 साल पहले टेलीकॉम घोटाले से सुर्खियों में आए थे सुखराम, घर में मिले थे रुपयों से भरे बैग-सूटकेस

Mon, 25 Mar 2019 08:47 PM IST
अमित मंडल चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित मंडल Updated Mon, 25 Mar 2019 08:47 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019: Political journey of Sukh Ram who joins congress again
प. सुखराम (फाइल फोटो)
लोकसभा चुनाव 2019 में नेताओं के पाला बदल का खेल बदस्तूर जारी है। नए-पुराने सभी नेता अपना अपना नया ठिकाना ढूंढ़ने में लगे हैं। इसी सिलसिले को आज आगे बढ़ाया पुराने कांग्रेस नेता सुखराम ने। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखराम पोते आश्रय शर्मा सहित कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। आश्रय मंडी संसदीय सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। कई सालों के बाद आज सुखराम मीडिया में सुर्खियां बने हैं। ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि आज से ठीक 23 साल पहले सुखराम किन वजहों से सुर्खियों में आए थे। 
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कौन हैं सुखराम 

90 के दशक में सुखराम कांग्रेस सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। वह हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से तीन बार सांसद रहे हैं। इसके अलावा पांच बार विधानसभा चुनाव भी जीत चुके हैं। यहां के लोग उन्हें पंडित सुखराम कहते हैं। टेलीकॉम घोटाले में बदनामी मिलने के बावजूद लोगों का प्यार उनके प्रति कम नहीं हुआ। 
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टेलीकॉम घोटाले से सुर्खियों में आए  

1996 में पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार में सुखराम दूरसंचार मंत्री थे। इस दौरान उनपर बड़े घोटाले का आरोप लगा। मामले ने इस कदर तूल पकड़ा कि जांच का जिम्मा सीबीआई को देना पड़ा। सीबीआई ने जांच के दौरान सुखराम के घर से 3.6 करोड़ रुपये बरामद किए। ये रुपये सूटकेस और बैग में भरे हुए थे। उस वक्त सुखराम के घर से 2.45 करोड़ रुपये बरामद हुए थे। जबकि हिमाचल के मंडी स्थित बंगले पर छापेमारी में सीबीआई टीम को वहां से 1.16 करोड़ रुपये मिले थे। 


इस मामले ने तब खूब सुर्खियां बटोरी थीं। न्यूज चैनल और अखबारों में आए दिन इस पर नई नई खबरें दिखती और छपती रहती थीं। इस दूरसंचार घोटाले ने नरसिम्हा सरकार की खूब किरकिरी करवाई थी। नतीजतन कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से भी निकाल दिया।  

सुखराम पर आरोप था कि उन्होंने रिश्वत लेकर टेलीकॉम के ठेके दिए और खूब पैसा कमाया। इस मामले में 18 नवंबर 2011 को उपरी अदालत ने दिल्ली की अदालत का फैसला सही ठहराते हुए उन्हें दोषी ठहराते हुए सश्रम कारावास की सजा सुनाई। 

सियासी सफरनामा 

सुखराम ने अपना सियासी करियर मंडी से शुरू किया था। 1963 से 1984 तक वह विधायक चुने जाते रहे। 1984 में मंडी से लोकसभा चुनाव जीता और राजीव गांधी सरकार में राज्य मंत्री बने। 1991 में उन्हें दूरसंचार का स्वतंत्र प्रभार मिला। 1996 में सुखराम एक बार फिर मंडी सीट से जीते और मंत्री बने। लेकिन घोटाले में नाम आते ही कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया। इसके बाद उन्होंने 1997 में हिमाचल विकास कांग्रेस बनाई, 1998 विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन किया और भाजपा सरकार में शामिल हुए। मंडी में उनका खासा दबदबा रहा है जहां 10 विधानसभा सीटें आती हैं। उनकी पार्टी ने पांच सीटें जीती थीं और सुखराम सहित सभी पांच विधायक मंत्री बने। 


उनके बेटे अनिल शर्मा 1998 में राज्यसभा से चुने गए। 2003 विधानसभा चुनाव में सुखराम ने मंडी सीट पर जीत हासिल की और इस बार कांग्रेस से गठजोड़ किया। 2007 और 2012 में उनके बेटे अनिल ने कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर मंडी विधानसभा सीट से जीत हासिल की। यही सुखराम 2017 में बेटे के साथ भाजपा में भी शामिल हुए। लेकिन सोमवार 25 मार्च 2019 को दोबारा कांग्रेस में वापसी की।  

 
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