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तोहफा: पोलिंग बूथ घोषित हुआ स्कूल, 17 साल बाद मिली बिजली

Mon, 25 Mar 2019 08:32 AM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Mon, 25 Mar 2019 08:32 AM IST
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Lok Sabha elections 2019: Coimbatore school gets electricity after 17 years ahead of polls
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

तमिलनाडु के एक स्कूल को लोकसभा चुनाव 2019 के कारण करीब दो दशक बाद बिजली मिल गई है। कोयंबटूर के पास स्थित 17 साल पुराने इस पंचायत मिडिल स्कूल को लोकसभा चुनाव के लिए पोलिंग बूथ के तौर पर घोषित किया गया है। इस धूमनौर पंचायत मिडल स्कूल में कक्षा पहली से आठवीं तक के 48 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल की शुरुआत साल 2002 में हुई थी ताकि धूमनौर और पड़ोसी गांव के बच्चों को स्कूल जाने के लिए लंबा सफर तय ना करना पड़े। 


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हालांकि इस स्कूल में ना बिजली की सुविधा उपलब्ध है और ना पानी की। यहां केवल एक बोरवेल लगा हुआ है। साल 2004 में एक ट्रस्ट की सहायता से यहां सोलर पैनल लगाए गए थे ताकि स्कूल में बिजली आ सके और बोरवेल की मोटर चार्ज हो सके। 

स्कूल के हेडमास्टर शनमुघा सुंदरम का कहना है, "हालांकि, धूमनौर पहाड़ों पर स्थित है और रिजर्व फॉरेस्ट की सीमा पर है। यहां मानसून के समय अच्छी बारिश होती है। लेकिन आसमान में बादल भी छाए रहते हैं। जिसके चलते सोलर पैनल की सहायता से कक्षा तक कम ही बिजली पहुंच पाती है। हम बारिश के कारण बच्चों को कक्षा के बाहर भी नहीं पढ़ा सकते।"

सुंदरम ने आगे कहा, "मानसून के वक्त, धूप की कमी के चलते बिजली सप्लाई दोपहर दो बजे बंद कर दी जाती है। हमें सभी लाइट और मोटर भी बंद करने की जरूरत होती है ताकि बची हुई पावर से आरओ प्लांट को संचालित किया जा सके।"

वीरापंडी गांव के प्रशासनिक अधिकारी आनंद का कहना है, "हालांकि बीते साल स्कूल को बिजली और पानी की सुविधा दी गई थी लेकिन वायरिंग और मीटर में परेशानी के चलते कोई सप्लाई नहीं हो पाई। लेकिन स्कूल के पोलिंग बूथ घोषित होने के बाद गुरुवार को अधिकारी कुछ मजदूरों और सामान के साथ आए। उन्होंने कुछ जरूरी मरम्मद भी की। 

आनंद ने आगे कहा, "हमें आखिरकार बिजली मिल गई है। अगर यहां स्थायी रूप से बिजली रही तो स्कूल का समय खत्म होने के बाद वो बच्चे भी यहां पढ़ पाएंगे जिनके घरों पर बिजली नहीं है। लोग भी यहां आश्रय ले पाएंगे।" 

24 वीरापंडी पंचायत में करीब 9 हजार लोग रहते हैं। कार्यकर्ता जोशु आनंद का कहना है कि अगर कक्षाओं तक बिजली पूरी तरह पहुंच जाए तो कई छात्र शिक्षा के लिए प्रेरित होंगे और छह अध्यापक अच्छे से पढ़ा सकेंगे। 

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