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Lok Sabha Election 2024: इन चार जातियों से खेला मोदी ने मास्टर स्ट्रोक! लोकसभा चुनावों की ऐसे बिछा दी है बिसात

Mon, 04 Dec 2023 06:07 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Mon, 04 Dec 2023 06:07 PM IST
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सार
भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "गरीब, युवा, महिला और किसान" जातियों को साधने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से इन चार वर्गों को साधने की तैयारी की है, इससे न सिर्फ जातीयता के समीकरण सधेंगे, बल्कि इन वर्गों के लोगों को जोड़ने का यह बड़ा फॉर्मूला भी सेट किया गया है...
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Lok Sabha Election 2024: Pm Modi played masterstroke with these four castes!
Lok Sabha Election 2024 - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के मुख्यालय के मंच से जिन चार नई जातियों का जिक्र किया है, उसे लेकर अब सियासत में नए जातीय समीकरण तलाशे जाने लगे हैं। सियासी गलियारों में चर्चाएं इस बात की हो रही हैं कि बिहार में जातिगत जनगणना के आधार पर लिए गए बड़े फैसले और अखिलेश यादव के पीडीए जैसे फॉर्मूले पर बिसात बिछाने वाली लोकसभा की सियासत में मोदी की ये चार जातियां क्या बड़ा गुल खिलाएंगी। फिलहाल भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "गरीब, युवा, महिला और किसान" जातियों को साधने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से इन चार वर्गों को साधने की तैयारी की है, इससे न सिर्फ जातीयता के समीकरण सधेंगे, बल्कि इन वर्गों के लोगों को जोड़ने का यह बड़ा फॉर्मूला भी सेट किया गया है।

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरीके की सियासी बिसात बिछानी शुरू की है, वह एक मास्टर स्ट्रोक के तौर पर राजनीतिक गलियारों में देखी जा रही है। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते कुछ दिनों में गरीब, युवा, महिला और किसानों को एक बड़ी जाति के तौर पर संबोधित करना शुरू किया है। इन्हीं चार नए वर्गों को जाति के तौर पर संबोधित करके ही लोकसभा के चुनावों के लिए मोदी का बड़ा मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के प्रवक्ता प्रोफेसर अभिरंजन सहाय कहते हैं, मोदी का इन चार "गरीब युवा महिला और किसानों" का जिक्र करना एक तरह से उन सभी जातियों को साधने के जैसा है, जो अलग-अलग राजनीतिक दलों की सियासत का हिस्सा होते हैं। वह कहते हैं कि जब आप सिर्फ गरीब, युवा, महिला और किसान वर्ग की बात करते हो, तो उसमें जाति, बिरादरी और समुदाय सब पीछे और नीचे रह जाता है। इसमें वह सभी लोग शामिल हो जाते हैं, जो कि हर जाति बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं। इसीलिए मोदी का इन चार वर्गों का जातियों के तौर पर जिक्र करना सियासत में मास्टर स्ट्रोक माना जा सकता है।

राजनीतिक विश्लेषक एस प्रभाकर कहते हैं कि भाजपा ने जिस तरीके से चार वर्गों को अपने नजरिए से आगे कर सियासत बढ़ाई है, वह राजनीति में एक तरह से बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकती है। उनका कहना है कि जिन चार वर्गों का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जातियों के तौर पर उल्लेखित करते हुए कहा है, दरअसल उसमें सभी जातियां शामिल है। उनका कहना है कि दलितों से लेकर आदिवासियों और मुसलमानों से लेकर पिछड़ा समेत सवर्णों तक में युवा, महिला, गरीब और किसान होते हैं। ऐसे में पीएम नरेंद्र मोदी का इन चारों वर्गों को टारगेट करते हुए अपने भाषण में जिक्र करना सभी जातियों को शामिल करने वाला सियासी शॉट है। राजनीतिक विश्लेषक प्रभाकर का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का इन वर्गों का जिक्र करना तब और महत्वपूर्ण हो जाता है, जब देश में जातिगत जनगणना की बात तेजी से आगे बढ़ रही हो। और तो और बिहार में जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद उसके आधार पर नया आरक्षण भी लागू कर दिया जाना, अन्य पार्टियों के लिए सियासी रूप से बड़ा चैलेंज देने जैसा है।

हालांकि राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि जातिगत समीकरणों के आधार पर भाजपा न्यूट्रल होकर सियासत करेगी। वरिष्ठ पत्रकार बृजेंद्र शुक्ला का मानना है कि पार्टी अभी जिस हिंदुत्ववादी एजेंडे के लिहाज से राजनीति करती आई है, वह उसके आधार पर तो आगे बढ़ेगी ही। लेकिन उसका फोकस इसके साथ-साथ केंद्र सरकार की योजनाओं के माध्यम से सभी वर्गों तक पहुंच बनाने का होगा। जिसमें युवा, महिला, गरीब और किसान प्राथमिकता में शामिल होकर पार्टी की नीतियों में लाभकारी योजनाओं के साथ आगे रहेंगे। सियासी जानकारों का कहना है कि जिस तरीके से बीते कुछ सालों से अलग-अलग विधानसभा चुनाव में परिणाम आए हैं, उससे एक बात स्पष्ट हो गई है कि भाजपा को उन तबकों का भी वोट मिल रहा है, जिनकी राजनीति कोई और सियासी दल करता आया है। इसमें आदिवासी, दलित, पिछड़े समेत वह मुस्लिम समुदाय भी शामिल हैं, जो अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में खाने-पीने की जद्दोजहद में लगे रहते हैं। शुक्ल कहते हैं कि इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी अब इन सभी जातियों को एक साथ जोड़कर अपनी पार्टी के लिए बड़े वोट बैंक के तौर पर सहेजने की पूरी तैयारी में हैं। ताकि आने वाले लोकसभा के चुनाव में भाजपा को सियासी रूप से मजबूती मिल सके।

भाजपा से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ नेता कहते हैं कि उनकी पार्टी लगातार गरीब, युवा, महिला और किसानों के हितों की ही बात करती आई है। यही वजह है कि अगर सियासत में चुनावी परिणाम उठा कर देखें तो सभी जातिगत समीकरणों को पीछे छोड़ते हुए भाजपा लगातार नए आयाम स्थापित करती जा रही है। हालांकि भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आने वाले लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में पार्टी अब ऐसे ही चार वर्गों पर फोकस करने की पूरी रणनीति बनाने जा रही है। पार्टी से जुड़े नेता मानते हैं कि इन चार वर्गों में वह सभी जाति और वर्ग शामिल हो जाएंगे, जिनकी राजनीति दूसरी सभी पार्टियों अलग-अलग टुकड़ों में करती है। पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अगले एक सप्ताह के भीतर देश के सभी राज्यों में इसी आधार पर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को वर्गीकृत करके इन चारों समूह तक पहुंचने का कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। भाजपा के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी कहते हैं कि सुशासन का तरीका भी यही है जिसमें कोई जाति विशेष ना होकर वर्गों के लिहाज से सबको आगे बढ़ाने का काम किया जाए। भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगवाई में सभी जातियों को एक साथ लेकर लगातार काम किया जा रहा है और आगे भी किया जाता रहेगा।

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