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LS Polls 2024: जप-अनुष्ठान से जीत का रास्ता तलाश रहे नेता, मोबाइल से ले रहे संकल्प, होटलों में चल रहे हवन
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लोकसभा चुनाव से पहले मंदिरों में बढ़े अनुष्ठान।
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अमर उजाला
विस्तार
जैसे-जैसे मतदान की तारीखें करीब आ रही हैं, वैसे-वैसे चुनावों में नए रंग देखने को मिल रहे हैं। इवेंट मैनेजमेंट कंपनियां बड़ी-बड़ी रैलियां-सभाएं और रोड शो आयोजित करवा रही हैं। कई कंपनियां नेताओं को मीडिया प्लेटफार्मों पर इमेज बिल्डिंग और फॉलोअर्स की संख्या बढ़ाने के पैकेज ऑफर कर रही है। इस क्रम में पंडितों, ज्योतिष-कर्मकांडियों की भी चांदी हो गई है। उज्जैन, बनारस से लेकर दक्षिण भारत तक में चुनाव में प्रत्याशी बनने और विजयी होने की कुंडली दिखाई जा रही है। उम्मीदवारों द्वारा अप्रैल से एक जून के बीच ग्रहों के गोचर (ट्रांजिट) के कुंडलियों पर प्रभाव का बारीकी से विश्लेषण करवाया जा रहा है। इसी के आधार पर ज्योतिष विशिष्ट जप, पूजा-पाठ और हवन के सुझाव दे रहे हैं।मध्यप्रदेश के उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित अक्षत जोशी ने अमर उजाला को बताया कि जिन्होंने चुनाव की घोषणा के साथ ही कुंडली दिखायी थी, अब उनके अनुष्ठान शुरू हो चुके हैं। इनमें प्रत्याशियों के अलावा वे भी हैं जिन्हें अभी किसी खास क्षेत्र से प्रत्याशी बनने की आस है। चुनावी रण में प्रतिद्वंद्वी शत्रु के समान ही होते हैं, इसलिए ज्योतिष शत्रु विजय की कामना से अनुष्ठान करवा रहे हैं। जप संख्या कहीं सवा लाख, कहीं पांच लाख निर्देशित की गई है। कहीं पांच और सात-सात लाख के दो से तीन पुरश्चरण भी हो रहे हैं।
बनारस के एक शक्तिपीठ पर जप-अनुष्ठान करा रहे एक ज्योतिषी का कहना है कि चैत्र नवरात्र से हमारी व्यस्तता ज्यादा बढ़ गई है। इस विशेष अवधि में परंपरागत यजमानों के यहां चंडी या सप्तशती पाठ तो होते ही हैं। नवरात्र में अष्टमी और नवमी की तिथि बेहद अहम होती है, इसलिए जो लोग चुनाव में उम्मीदवार बने हैं, वे इस खास दिन हवन और पूजन करवाते हैं। इस दिन होने वाले अनुष्ठान में उम्मीदवार खुद भाग लेते हैं। बाकी दिनों में उनके परिवार के सदस्य उनकी तरफ से शामिल होते हैं।
इस स्थान पर विशेष हवन करवा रहे नेता
मध्यप्रदेश के दतिया में भी इन दिनों उम्मीदवारों और उनके परिजन की भीड़ लगी हुई है। दतिया की पीतांबरा पीठ की मां बगलामुखी को शत्रुहंता के साथ-साथ राजसत्ता की देवी माना जाता है। आमतौर पर सालभर यहां राजनेताओं की कतार लगी रहती है। लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद से नेताओं की कतार मां के दरबार में बढ़ गई है। टिकट और जीत के लिए जाप और हवन कराए जाने का सिलसिला शुरू हो गया है। जून तक अनुष्ठानों की बुकिंग हो फुल हो चुकी है। मध्यप्रदेश ही नहीं, राजस्थान, छत्तीसगढ़, दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात और यूपी समेत कई राज्यों से नेता यहां हाजिरी लगा रहे हैं। मंदिर में इतनी संख्या में अनुष्ठान हो रहे हैं कि पीठ में स्थान की कमी पड़ने लगी है।
शत्रु दमन, सफलता और सत्ता के लिए हो रहा अनुष्ठान
मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि कई बड़े केंद्रीय मंत्रियों से लेकर कई दिग्गज नेताओं ने चैत्र नवरात्र के अलावा विशेष अनुष्ठान की बुकिंग की है। सभी के अनुष्ठान, हवन-पाठ और जाप शुरू हो गए हैं। कुछ नेताओं ने बाकायदा ट्रस्ट में आवेदन देकर बुकिंग करवाई है, तो कुछ ने अपने परिचित पंडितों को ही पूजा पाठ और हवन का जिम्मा सौंपा है। इसमें अधिकांश हवन शत्रु दमन और दावेदारी में सफलता और सत्ता प्राप्ति से जुड़े हैं।
पीतांबरा पीठ मंदिर से जुड़े साधकों का कहना है कि चुनाव प्रचार के कारण कई बड़े मंत्रियों और दिग्गज नेताओं का यहां दर्शन करने का सिलसिला लगातार जारी है। जबकि कुछ नेताओं के अनुष्ठान तो थोड़े-थोड़े अंतराल पर साल भर ही चलते रहते हैं। इन सभी नेताओं के अपने पुजारी होते हैं। ये लोग पूजा पाठ व हवन करते हैं। अनुष्ठान के समापन पर नेता या मंत्री यहां आकर खुद ही पूर्णाहुति देते हैं, जबकि कुछ नेता तो नवरात्र में एक दो दिन रुक कर यहीं जाप और हवन भी करते हैं।
100 से ज्यादा पंडित, मोबाइल पर संकल्प ले रहे नेता
मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि चैत्र नवरात्रि और लोकसभा चुनाव को देखते हुए आसपास बने होटलों में पूजा पाठ का क्रम चल रहा है। करीब 100 पंडित पूजा पाठ में जुटे हुए हैं। चैत्र नवरात्र के चलते प्रत्येक पंडित के पास रोज चार से पांच अनुष्ठान का जिम्मा है। नियमित रूप से आने वाले उम्मीदवार अनुष्ठान के लिए मोबाइल पर ही संकल्प करते हैं। वे जहां भी होते हैं, वहां से अपने पंडित को फोन लगाकर हाथ में पूजा की सुपारी दक्षिणा रख लेते हैं। पंडित यहां से संकल्प करवा देते हैं। इसके बाद पंडित अनुष्ठान में जुट जाते हैं। हवन के अंतिम दिन यजमान उपस्थित होते हैं।