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लालू यादव को नहीं मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

Wed, 10 Apr 2019 01:36 PM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Wed, 10 Apr 2019 01:36 PM IST
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Lok Sabha Election 2019: Supreme Court dismisses RJD president Lalu Prasad Yadav bail plea
लालू प्रसाद यादव - फोटो : PTI

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी है। वह इस वक्त चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे हैं। लालू ने स्वास्थ्य के आधार पर जमानत की मांग की थी। झारखंड हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद लालू ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।


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प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा कि वह लालू को जमानत पर रिहा करने की इच्छुक नहीं हैं। पीठ ने लालू के 24 महीनों से जेल में होने की दलीलों को खारिज कर दिया और कहा कि उन्हें दी गई 14 साल के जेल की सजा की तुलना में 24 महीने कुछ भी नहीं हैं।



लालू की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि कोई बरामदगी नहीं और कोई मांग नहीं की गई और एकमात्र बड़ा अपराध जिसके तहत उन्हें दोषी ठहराया गया, वह आपराधिक साजिश का था। पीठ ने कहा कि मामले के गुण-दोष पर निर्णय सुप्रीम कोर्ट करेगा। पीठ ने कहा, "इस समय हम केवल जमानत अपील पर सुनवाई कर रहे हैं।"

सीबीआई ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में लालू की जमानत याचिका का जोरदार विरोध करते हुए कहा था कि आगामी लोकसभा चुनाव में राजनीतिक गतिविधियां शुरू करने के लिए बीमार नेता ने अचानक से 'पूरी तरह से फिट' होने का दावा किया है।

जेल की जगह पिछले आठ महीनों से अस्पताल में भर्ती लालू ने मेडिकल आधार पर और साथ ही अपनी पार्टी का नेतृत्व करने के लिए जमानत की मांग की थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा था कि उन्हें जमानत देना उच्च पदों पर बैठे लोगों के भ्रष्टाचार के गंभीर मामले में संलिप्तता वाले मामलों के संबंध में 'बहुत ही गलत मिसाल' पेश करेगी।

लालू पर रांची के एक अस्पताल से राजनीतिक गतिविधियां चलाने का आरोप लगाते हुए जांच एजेंसी ने कहा था कि एक ओर मेडिकल आधार पर जमानत का मुद्दा उठाना और साथ ही लोकसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी अध्यक्ष के नाते सारी जरूरी जिम्मेदारियों को पूरा करने और पार्टी का मार्गदर्शन करने के लिए जमानत का अनुरोध करना परस्पर विरोधी है और याचिकाकर्ता मेडिकल आधार पर जमानत की आड़ में अपनी राजनीतिक गतिविधियां चलाना चाहता है जिसकी कानून के तहत अनुमति नहीं है।

एजेंसी ने लालू की जमानत याचिका पर दायर अपने जवाब में पिछले कुछ महीनों में अहमद पटेल, डी राजा, डेरेक ओ ब्रायन, शरद यादव और हेमंत सोरेन सहित हाई-प्रोफाइल नेताओं के अस्पताल में उनसे मिलने आने का हवाला दिया।

रांची के बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में बंद राजद प्रमुख ने अपनी जमानत याचिका खारिज करने के झारखंड उच्च न्यायालय के दस जनवरी के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। जिस समय कथित घोटाला हुआ था, उस समय बिहार में राजद सत्ता में थी और लालू मुख्यमंत्री थे।

लालू ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी उम्र और गिरते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि वह मधुमेह, रक्तचाप और कई अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं और उन्हें चारा घोटाले से संबंधित एक मामले में पहले ही जमानत मिल गई है। 

राजद सुप्रीमो को झारखंड में स्थित देवघर, दुमका और चाईबासा के दो कोषागार से धोखे से धन निकालने के अपराध में दोषी ठहराया गया है। इस समय उन पर दोरंडा कोषागार से धन निकाले जाने से संबंधित मामले में मुकदमा चल रहा है। वह पिछले कुछ महीने से रांची के राजेंद्र चिकित्सा विज्ञान संस्थान (रिम्स) में उपचाराधीन हैं।

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