आंकड़ों से जानें कैसे बदल गई 5 साल में सियासत, भाजपा के हाथों से कहां-कहां फिसली सत्ता?
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भारत में 17वें आम चुनाव की शुरुआत 11 अप्रैल से होगी। 19 मई तक मतदान होंगे। 23 मई को वोटिंग के नतीजे आएंगे। चुनाव सात चरणों में संपन्न होंगे। 90 करोड़ वोटर्स 10 लाख पोलिंग बूथों पर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। डेढ़ करोड़ युवा जिनकी उम्र 18 से 19 साल के बीच है, पहली बार दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
ठीक पांच साल पहले 2014 में 'मोदी लहर' की बदौलत भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ देश की सत्ता संभाली थी। जनता ने देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को 44 सीटों पर सिमटने पर मजबूर कर दिया था। भाजपा ने 30 सालों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए लोकसभा की 543 सीटों में से 283 सीटें जीती थीं। राजस्थान की पूरी की पूरी 25 और गुजरात की संपूर्ण 26 लोकसभा सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। पिछले पांच सालों में राजनीति के समीकरण और भारतीय सियासत कई मायने में बदली है। पार्टियों के गठबंधन से लेकर अलग-अलग सूबों के चेहरों तक में कई उलट-फेर हुए हैं।
इस वक्त 15 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। साल 2014 में जब भाजपा सत्ता में आई थी उस वक्त सात राज्यों में भाजपा की सरकार थी। 13 राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी। सत्ता में आने के बाद से भारतीय जनता पार्टी की सरकार धीरे-धीरे मार्च 2018 तक 21 राज्यों में पहुंच गई थी। इसके बाद यह आंकड़ा 18 राज्यों में पहुंचा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान हाथ से जाने के बाद भाजपा 15 राज्यों में सिमट गई।
आइए जानते हैं कैसे 5 साल में भारत की सियासत बदली और कहां-कहां भाजपा के हाथ से सत्ता फिसली
2014
-लोकसभा चुनाव के बाद चार राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए।
-महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए।
-भारतीय जनता पार्टी ने चारों राज्यों में सरकार बनाई।
-सीटों के लिहाज से भी भाजपा के इन राज्यों में दमदार प्रदर्शन रहा।
-भारतीय जनता पार्टी जहां लोकसभा चुनाव के वक्त सात राज्यों में थी।
-चार राज्य और उसके खाते में चले गए और संख्या बढ़कर 11 हो गई।
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2015
-लोकसभा चुनाव के ठीक एक साल बाद भाजपा को झटका लगा।
-विधानसभा चुनावों में भाजपा के हाथ से दो राज्य दिल्ली और बिहार खिसक गए।
-आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से 67 जीतीं।
-दिल्ली की राजनीति में अरविंद केजरीवाल का पदार्पण हुआ।
-बिहार में जेडी-यू, आरजेडी और कांग्रेस के महागठबंधन ने एनडीए के खिलाफ दो तिहाई बहुमत जीता।
-भाजपा का वोट शेयर तो बिहार में ज्यादा रहा लेकिन चुनाव हार गई।
-यह भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता और देश में फैलाव को पहला झटका था।
-राजनीतिक पार्टियों को लगने लगा कि नॉन-कांग्रेसी दल, भाजपा के लिए बेहतर चुनौती बन सकते हैं।
2016
-चार राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए।
-भारतीय जनता पार्टी का तीन राज्यों में लचर प्रदर्शन रहा।
-पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु में भाजपा का प्रदर्शन खराब रहा।
-पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सत्ता में आईं।
-केरल में माकपा नीत एलडीएफ सत्ता में फिर से आई।
-हालांकि, पहली बार केरल में भाजपा का खाता भी इसी साल खुला।
-तमिलनाडु में 32 साल का राजनीतिक इतिहास बदला और अन्ना द्रमुक सत्ता में आई।
-असम में एंटी-कांग्रेस इंकम्बेंसी के चलते भारतीय जनता पार्टी सत्ता में पहुंची।
-सूबे में 15 सालों से सत्ता में बैठे तरुण गोगई की कुर्सी चली गई।
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2017
-विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी बहुमत से यूपी की सत्ता में आई।
-सूबे की 403 सीटों में से 312 पर भारतीय जनता पार्टी ने कब्जा किया।
-भाजपा को समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी के अलग-अलग चुनाव लड़ने का फायदा मिला।
-भाजपा ने इसी साल उत्तराखंड में हुए लोकसभा चुनाव भी जीते।
-गोवा में कांग्रेस से कम सीटें जीतने के बावजूद भी भाजपा ने सरकार बनाई।
-पंजाब में कांग्रेस ने भाजपा से मुकाबला किया और सूबे में बहुमत से सरकार बनाई।
-117 विधानसभा सीटों वाले पंजाब में कांग्रेस ने 77 सीटें जीतीं।
-भारतीय जनता पार्टी के खाते में सूबे की तीन ही सीटें आईं।
-गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी।
-कांग्रेस ने गुजरात विधानसभा चुनाव में 77 सीटें जीतीं। सरकार भाजपा की बनी।
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2018
-कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव में अपने दम पर 104 सीटें जीतीं।
-कांग्रेस के खाते में सूबे की 224 विधानसभा सीटों में से 80 सीटें आईं।
-जनता दल (सेक्युलर) के खाते में 38 सीटें आईं। कांग्रेस और जेडी(एस) ने सरकार बनाई।
-इसी साल भारतीय जनता पार्टी को तीन हिंदी प्रदेशों में करारा झटका लगा।
-राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा की लुटिया डूब गई।
-भारतीय जनता पार्टी का राज्यों में फैलाव को झटका लगा और 18 राज्यों में से भाजपा 15 में सिमट गई।
2019
2019 में यह तय होगा कि देश की सत्ता किस पार्टी के हाथों में जाती है। कौन-सी पार्टी केंद्र में सरकार बनाती है। समीकरण भी अलग हैं और पार्टियों के गठबंधन के साथी भी अलग। यूपी में जहां समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी गठबंधन में हैं, वहीं महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन में है। कई राज्यों में चुनाव के बाद गठबंधन होगा। बिहार में सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जदयू एक बार फिर एनडीए में शामिल है। वहीं, एनडीए के विरोध में कांग्रेस, राजद, हम, रालोसपा और अन्य पार्टियां शामिल है।तमिलनाडु में भाजपा को एआईएडीएमके का साथ मिला है। इधर, एनडीए के विरोध में कांग्रेस ने डीएमके संग गठबंधन बनाया है। कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल सेक्यूलर(जेडीएस) का गठबंधन है। वहीं दूसरी ओर बीएस येदियुरप्पा की कर्नाटक जनता पार्टी का भाजपा में विलय हो चुका है।