लोकसभा में डीएनए सहित आठ बिल पेश, कई बिलों पर विपक्ष ने जताया एतराज
लोकसभा में सोमवार को डीएनए प्रौद्योगिकी विनियमन, विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण, मानवाधिकार संरक्षण संशोधन समेत कई बिल पेश किए गए। इनमें से कई बिलों पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए। विपक्ष ने खासतौर पर बिना डाटाबैंक कानून बनाए डीएनए बिल लाए जाने और विधि विरुद्ध क्रियाकलाप कानून में संशोधन कर इसे पोटा जैसा सख्त बनाने पर आपत्ति जाहिर की। सरकार ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की उसकी नीति जारी रहेगी।
डीएनए बिल का विरोध जताते हुए कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने इसे बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि एकतरफा तरीके से विचाराधीन कैदियों का डीएनए नमूना एकत्र करना ठीक नहीं है। इसके लिए पहले अदालत के फैसले का इंतजार करना चाहिए। जवाब में हर्षवर्धन ने कहा कि इस बिल की परिकल्पना बहुत पुरानी है। बीती लोकसभा में भी इस सदन ने इसे मंजूरी दी थी। स्थाई समिति सहित अन्य पक्षों से भी इस बिल पर व्यापक विमर्श किया गया है।
विपक्ष ने विधि विरुद्ध क्रियाकलाप में संशोधन कर इसे सख्त बनाए जाने का विरोध किया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि इसी सदन में पोटा जैसे कानून बनाया गया। बाद में व्यापक दुरुपयोग के कारण इसे खत्म किया गया। अब सरकार इस संशोधन के जरिए कानून को पोटा जैसा ही सख्त बनाना चाहती है। इस पर गृह राज्य मंत्री रेड्डी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सरकार के सख्त रुख में रत्ती भर भी कमी नहीं आएगी। वर्तमान परिस्थिति के अनुरूप आतंकवाद से निपटने के लिए सख्त कानून की जरूरत है।
जब फिर से पेश कराना पड़ा बिल
लोकसभा में नियमों की चूक के कारण दो बिलों को दोबारा पेश कराना पड़ा। दरअसल कुछ सदस्यों ने बिल पेश करने के खिलाफ नोटिस दिया था। स्पीकर ने इस पर विचार किये बिना बिलों को पेश कराने की अनुमति दे दी। बाद में विपक्ष की आपत्तियों के बाद दो बिलों को फिर से पेश किया गया।
ये बिल हुए पेश
- डीएनए प्रौद्योगिकी विनियमन बिल
- विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण बिल
- राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण संशोधन बिल
- मानवाधिकार संरक्षण संशोधन बिल
- उपभोक्ता संरक्षण बिल
- सरकारी स्थान संशोधन बिल
- जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक संशोधन बिल
- केंद्रीय विद्यालय संशोधन बिल