डॉ. बीआर आंबडेकर: 67 साल पहले देश के पहले आम चुनाव में देखना पड़ा हार का मुंह
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डॉक्टर बीआर आंबेडकर की आज 128 वीं जयंती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तक सभी बड़े नेताओं ने आंबेडकर को श्रद्धांजलि दी है। भारत के संविधान निर्माता बाबा साहब आंबेडकर ने आजादी के बाद भारत का पहला लोकसभा चुनाव लड़ा था। यह 67 साल पुरानी सन 1952 की बात है। इस चुनाव में आंबेडकर को पराजय का सामना करना पड़ा था। आंबेडकर ने महाराष्ट्र की उत्तरी मुंबई सीट से चुनाव लड़ा और हार गए। बीआर आंबेडकर जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्रित्व में बनी देश की पहली अंतरिम सरकार में कानून मंत्री थे। कांग्रेस से मतभेद के चलते 27 सितंबर, 1951 को उन्होंने नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। आंबेडकर नेहरू सरकार के अनुसूचित जातियों की उपेक्षा से नाराज थे।
इसके बाद आंबेडकर शेड्यूल कास्ट्स फेडरेशन को खड़ा करने में जुट गए। एक साल बाद देश में पहला आम चुनाव हुआ और आंबेडकर ने भी इसमें हिस्सा लिया। उनकी पार्टी ने चुनाव में 35 प्रत्याशी खड़े किए लेकिन जीत सिर्फ दो को ही मिल सकी। डॉक्टर आंबेडकर को खुद ही उत्तरी मुंबई सीट से कांग्रेस प्रत्याशी से हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस ने आंबेडकर को हराने के लिए इस सीट से एनएस काजोलकर को टिकट दिया था। काजोलकर, आंबेडकर के पूर्व सहयोगी रहे थे। चुनाव में आंबेडकर को 1,23,576 वोट मिले और काजरोल्कर को 1,37,950 वोट मिले।
कहा जाता है कि इस सीट से चुनाव हारने का आंबेडकर को गहरा दुख हुआ क्योंकि महाराष्ट्र उनकी कर्मभूमि थी। बाद में कांग्रेस ने कहा कि आंबेडकर सोशल पार्टी का साथ दे रहे थे इसलिए उनका विरोध करने के अलावा पार्टी के पास कोई दूसरा चारा नहीं था। बाद यहीं खत्म नहीं हुई बल्कि कांग्रेस ने 1954 में बंडारा लोकसभा के लिए हुए उपचुनाव में भी आबंडेकर को एक बार फिर हराया। यही वह वक्त था जब चुनाव से ठीक पहले श्याम प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ पार्टी बनाई थी। आंबेडकर ने कांग्रेस से अलग होकर शेड्यूल कास्ट फेडरेशन पार्टी बनाई जो बाद में रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया के नाम से जानी गई। इतना ही नहीं कांग्रेस के ही दूसरे नेता जेबी कृपलानी ने अपनी पार्टी 'किसान मजदूर प्रजा पार्टी' की स्थापना की थी। चुनाव में कांग्रेस जीती और जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले निर्वाचित प्रधानमंत्री बने।