साध्वी प्रज्ञा, हेमंत करकरे और दिग्विजय सिंह- क्या है इन तीनों का आपसी कनेक्शन?
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भोपाल से भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के हेमंत करकरे पर दिए बयान को लेकर हंगामा मच गया है। जहां भाजपा ने इस बयान से पल्ला झाड़ लिया है वहीं कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी से माफी की मांग की है। भाजपा ने कहा कि हेमंत करकरे ने आतंकवादियों से लड़ते हुए अपनी जान गंवाई है और पार्टी हमेशा से यह मानती है कि वे देश के शहीद हैं। पार्टी ने यह भी कहा है कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का बयान उनका निजी विचार है। हालांकि, हंगामा बढ़ने के बाद शाम होते-होते साध्वी प्रज्ञा ने अपना बयान वापस ले लिया।
दरअसल, साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने अपने एक बयान में यह कहकर भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर दी थी कि हेमंत करकरे की मौत उनके श्राप देने के कारण हुई थी। क्योंकि एक राजनैतिक इशारे पर करकरे ने उन्हें कई वर्षों तक शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया था। साध्वी को यह प्रताड़ना उन्हें तब दी गई थी जब मालेगांव ब्लास्ट के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
क्या है हेमंत करकरे और प्रज्ञा सिंह ठाकुर का कनेक्शन?
29 सितंबर 2008 को नासिक के मालेगांव शहर में एक बाइक में बम लगाकर विस्फोट किया गया था। इसमें 7 लोगों की मौत हुई थी और करीब 100 लोग जख्मी हो गए थे। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित को अक्तूबर 2008 में गिरफ्तार किया गया था। प्रज्ञा पर मकोका अधिनियम की विभिन्न धाराएं भी लगाई गई थीं। साध्वी पर मालेगांव ब्लास्ट के साथ ही साथ सुनील जोशी की हत्या का भी आरोप है।
एटीएस चीफ हेमंत करकरे को मालेगांव धमाके की जांच सौंपी गई। करकरे ने ब्लास्ट में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकल बरामद कर ली। ये बाइक साध्वी सिंह ठाकुर के नाम पर रजिस्टर थी। करकरे के नेतृत्व में जांच आगे बढ़ी। जल्द ही साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल एसके पुरोहित को मुख्य आरोपी बनाया गया। उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। करकरे के नेतृत्व वाली एटीएस ने 4500 पेज की चार्जशीट में तफसील से वारदात के बारे में बताया और हमले के लिए हिंदुत्ववादी संगठन 'अभिनव भारत संघ' जिम्मेदार बताया।
हेमंत करकरे और उनकी टीम पर जांच के दौरान आरोपियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगा। ये आरोप भी लगा कि साध्वी प्रज्ञा समेत तमाम आरोपियों को एक साजिश के तहत फंसाया गया। 2011 में इस मामले की जांच एटीएस से छीनकर एनआईए को सौंप दी गई थी। 2016 में एनआईए ने अदालत में दायर अपने आरोपपत्र में साध्वी प्रज्ञा को क्लीन चिट दे दी। गुरुवार को भोपाल में एक जनसभा के दौरान साध्वी प्रज्ञा पुलिस टॉर्चर की बात करते-करते रो पड़ी थीं। शुक्रवार को उनका हेमंत करकरे को लेकर विवादास्पद बयान आ गया।
क्या है दिग्विजय सिंह की भूमिका?
दिसंबर 2010 में मुंबई की एक सभा में दिग्विजय ने दावा किया कि 26/11 हमले के चंद घंटे पहले उनकी हेमंत करकरे से बातचीत हुई थी। इस दावे ने देश के सियासी हलकों में सनसनी फैला दी। जब दिग्विजय पर झूठ बोलने के आरोप लगे तो उन्होंने बाकायदा बीएसएनएल के रिकॉर्ड पेश कर दिए। इन रिकॉर्ड ने साबित कर दिया कि वाकई करकरे की दिग्विजय से कई मौकों पर बात हुई थी। लेकिन धमाका हुआ उस दावे से जो दिग्विजय ने तब किया। उन्होंंने कहा कि करकरे ने मुझे फोन पर बताया कि मालेगांव बमकांड में ‘हिंदू आतंकवादियों’को पकड़ने से उनकी जान को दक्षिणपंथी यानी हिंदू संगठनों से खतरा है। इस बयान पर इतना हंगामा मचा कि कांग्रेस को इससे पल्ला झाड़ना पड़ा। हेमंत करकरे की पत्नी कविता करकरे ने भी दिग्विजय को कठघरे में खड़ा किया।
इस बीच दिग्विजय पर ये भी आरोप लगे कि मालेगांव मामले को लेकर करकरे उनसे कई बार बातचीत करते थे।