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लोकसभा चुनाव 2019: पश्चिम बंगाल में बजा भाजपा का बिगुल, अब ममता बनर्जी क्या करेंगी?

बीबीसी Updated Fri, 24 May 2019 03:29 PM IST
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी - फोटो : PTI
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भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी के माथे पर चिंता की लकीरों को गहरा कर दिया है। ये पार्टी पहले से ही कहती रही थी कि लोकसभा चुनाव सेमीफाइनल हैं और फाइनल तो 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव ही होंगे।
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अब इस सेमीफाइनल में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के 23 सीटों के लक्ष्य के आस-पास पहुंच कर पार्टी ने फाइनल में तृणमूल कांग्रेस के वर्चस्व के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। वैसे, जीत से उत्साहित प्रदेश भाजपा नेताओं का दावा है कि अब राज्य में ममता बनर्जी सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।

पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा तो पहले ही कह चुके हैं कि लोकसभा चुनाव के नतीजों के 60 दिनों बाद ममता बनर्जी सरकार बदल जाएगी। भाजपा के एक अन्य नेता कैलाश विजयवर्गीय कहते हैं कि अब तृणमूल कांग्रेस सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में महज 17 फीसदी वोट के साथ दो सीटें जीतने वाली भाजपा के वोटों का आंकड़ा 40 फीसदी पहुंचने को जबरदस्त राजनीतिक उलटफेर कहा जा सकता है।

ममता ने जिसकी कल्पना नहीं की होगी...

भाजपा के इस प्रदर्शन ने तमाम राजनीतिक पंडितों के पूर्वानुमानों को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही बंगाल की सभी 42 सीटें जीत कर केंद्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाने के ममता बनर्जी के सपने पर पानी फेर दिया है।

वैसे, ममता बनर्जी ने पार्टी के जीतने वाले उम्मीदवारों को बधाई देते हुए तमाम नतीजे अधिृकत रूप से सामने आने के बाद नतीजों की समीक्षा करने की बात कही है लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजों ने उनके माथे पर चिंता की लकीरें जरूर बढ़ा दी हैं।

दरअसल, ममता बनर्जी को इस बात का अंदेशा तो था कि भाजपा का प्रदर्शन अबकी बार पिछली बार से बेहतर रहेगा लेकिन यह इतना चौंकाने वाला होगा, इसकी उन्होंने कल्पना तक नहीं की थी।

इस नतीजे ने एक दशक पहले 2009 के लोकसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के प्रदर्शन की यादें ताजा कर दी हैं। तब तृणमूल कांग्रेस के सीटों की तादाद एक से बढ़ कर 19 तक पहुंच गई थीं। राज्य में तब वाममोर्चे की सरकार थी।

बंगाल में कैसे छा गई भाजपा?

ममता पहले से ही भाजपा, सीपीएम और कांग्रेस के बीच गोपनीय तालमेल होने के आरोप लगाती रही थीं। यानी उनको इस बात का अंदेशा तो पहले से ही था। उनका अंदेशा सच साबित हुआ है। सीपीएम के तमाम वोट अबकी भाजपा के खाते में गई हैं। इसके अलावा नागरिकता (संशोधन) विधेयक और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) जैसे मुद्दे भी असरदार साबित हुए हैं।

भाजपा ने उम्मीद के मुताबिक झारखंड से सटे बांकुड़ा, पुरुलिया और झाड़ग्राम इलाकों में काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। उत्तर बंगाल में दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरदुआर जैसी सीटों पर जीत से पार्टी ने साफ कर दिया है कि बंगाल के लोग तृणमूल कांग्रेस के विकल्प के तौर पर उसे ही देख रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बंगाल में कुल 34 रैलियां की थीं। उनका असर भी नतीजों पर नजर आ रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक मईदुल इस्लाम कहते हैं, "कांग्रेस और सीपीएम के हाशिए पर सिमटने की वजह से उसके वोट बैंक पर भाजपा ने क़ब्जा कर लिया। कांग्रेस और सीपीएम के बीच तालमेल नहीं होने की वजह से वोटरों का जबरदस्त धुव्रीकरण हुआ और इसका नुकसान तृणमूल को उठाना पड़ा। इसके अलावा कुछ इलाकों में भाजपा ने तृणमूल के अल्पसंख्यक वोट बैंक में भी सेंध लगाई है।"

तृणमूल कांग्रेस के सामने कई चुनौतियां

हाल के वर्षों में इलाके में संघ और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों की बढ़ती गतिविधियों और आदिवासियों के बीच बढ़ती पैठ ने भाजपा का आधार मजबूत बना दिया।

पर्यवेक्षकों का कहना है कि सीपीएम और कांग्रेस के राजनीतिक हाशिए पर पहुंचने की वजह से तृणमूल कांग्रेस-विरोधी वोटरों को भाजपा में ही बेहतर विकल्प नजर आया और लोगों ने उसके पक्ष में खुल कर मतदान किया।

इसके अलावा खासकर बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाकों में पार्टी को नागरकिता (संशोधन) विधेयक और नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजंस (एनआरसी) जैसे मुद्दों का भी फायदा मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपने चुनाव अभियान के दौरान इन दोनों मुद्दों को काफी प्रमुखता दी थी।

बंगाल के लोकसभा चुनावों में भाजपा के इस प्रदर्शन ने दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी बजने लगी है।

राजनीतिक पर्यवेक्षक विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं, "भाजपा का यह प्रदर्शन अब तृणमूल के लिए गहरी चिंता का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में पार्टी के रणनीति और संगठन में बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिल सकता है।"

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