पूर्वांचल में जातिगत समीकरण ने छुड़ाए राजनीतिक दलों के पसीने
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मेनका गांधी भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन चुनाव जीतने को लेकर मतदाताओं में संशय है। कारण जातिगत समीकरण। पुराने राजनीतिक कार्यकर्ता रहे प्रदीप पाठक का कहना है कि चुनाव पूरी तरह से जातिगत हो गया है। प्रतापगढ़, फूलपुर, भदोही, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर समेत पूर्वांचल की सभी सीटों का हाल यही है। केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा के चुनाव प्रचार के लिए गाजीपुर जा रही रणनीतिकारों की टीम के अनुसार जिले की राजनीतिक लड़ाई काफी दांव पेंच वाली हो गई है। अभिषेक राय के अनुसार बलिया, घोषी, गाजीपुर यहां तक कि गोरखपुर संसदीय सीट पर भी जातिगत समीकरण प्रभावी हो रहे हैं।
सुल्तानपुर में 12 मई को मतदान होना है। यहां से मेनका गांधी को भी काफी कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। यहां से मेनका गांधी के पुत्र और भाजपा नेता वरुण गांधी 2014 में सांसद थे। इस बार भाजपा ने वरुण की सीट से मेनका को और मेनका की सीट से वरुण को चुनाव मैदान में उतारा है। रमाकांत शुक्ला भाजपा कार्यकर्ता हैं। आशीष सिंह भी राजनीति में रुचि रखते हैं। शिवेन्द्र उपाध्याय, विवेक कुमार, चंदन त्रिपाठी, जयराम यादव और शिवहरे की राजनीति में दिलचस्पी है। सभी का मानना है कि अगड़ी जाति के वोट बंटेंगे।
ब्राह्मण भाजपा के साथ है, लेकिन राजपूतों के वोट बंटे हैं। गठबंधन के चंद्रभद्र सिंह और कांग्रेस के संजय सिंह इसमें सेंध लगाएंगे। इसी तरह से गठबंधन को बसपा और सपा का वोट मिलने की संभावना के कारण लड़ाई काफी मुश्किल हो गई है। कमला याद शिवपाल सिंह यादव की पार्टी से हैं। वह गठबंधन का कुछ वोट काट रही हैं। इसके चलते असमंजस जैसी स्थिति बनी हुई है।
मोदी का नाम और जाति की चल रही है लहर
सुल्तानपुर में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम अभी दबदबा बरकरार है। दस में सात आदमी प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी को ही सही ठहराता है। राहुल गांधी या अन्य के पक्ष में औसतन तीन लोग सहमति देते हैं। लेकिन जब बात लोकभा चुनाव की आती है तो सीताराम यादव खुलकर कहते हैं कि पहले जाति और जाति के आधार पर बना गठबंधन अहम है। राम सकल जयसवार के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी की सरकार भी उद्योगपतियों के लिए काम करती है और कांग्रेस की भी। जयसवार का कहना है कि उनके गांव की आबादी करीब 2200 लोगों की है। इसमें आधा से ज्यादा मतदान गठबंधन के पक्ष में होने की संभावना है।
आइए गाजीपुर में दिखाएं विकास
अभिषेक राय कहते हैं कि विकास के नाम पर लोकतंत्र में वोट कहां मिलते हैं? राय का कहना है कि गाजीपुर में केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा ने जितना विकास का काम किया है, उतना पिछले कई दशक में मिलाकर नहीं हुआ होगा। लेकिन चुनाव जीतने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। अभिषेक अनुसार गाजीपुर संसदीय सीट के ढाई लाख भूमिहार परिसीमन के बाद बलिया में चले गए है। भाजपा से अलग हुए ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव पार्टी ने भी प्रत्याशी खड़ा कर दिया है। इसके कारण बलिया, घोसी, गाजीपुर समेत कई सीटों का समीकरण बदल गया है। लिहाजा मनोज सिन्हा को भी कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है।
महिला नहीं बन सकी कभी सांसद
सुल्तानपुर जिले ने अब तक कभी महिलाओं को अपना सांसद नहीं बनाया। रीता बहुगुणा जोशी, वीणा पांडे से लेकर कांग्रेस की दीपा कौल सभी के हाथ निराशा ही हाथ लगी। हालांकि पहले सुल्तानपुर जिले में आने वाली अमेठी सीट पर यह बात नहीं रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से अमेठी का प्रतिनिधित्व यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ही कर रही थी।