सामाजिक योजनाओं का लाभ पाने वालों की संख्या पचास करोड़ से भी ज्यादा: भाजपा
केंद्र सरकार का दावा है कि उसकी विभिन्न सामाजिक योजनाओं का लाभ पाने वालों की संख्या पचास करोड़ से भी ज्यादा है। अकेले आयुष्मान योजना के तहत लगभग पचास करोड़ परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की गई है। जनधन योजना के तहत 35 करोड़ लोगों के बैंक खाते खोले गए हैं।
लेकिन भाजपा के ही एक नेता ने माना हैे कि सरकार की योजनाओं के सभी लाभार्थी हमें वोट अवश्य देंगे, ऐसा वे खुद भी नहीं मानते। भाजपा नेता विनय सहस्रबुद्धे ने शुक्रवार को पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर (पीपीआरसी) की एक रिसर्च रिपोर्ट जारी किया। रिपोर्ट जारी करते हुए विनय सहस्रबुद्धे ने कहा कि केंद्र सरकार ने अपनी योजनाओं के तहत पचासों करोड़ लोगों के जीवन को सीधे प्रभावित किया है। इससे लोग लाभान्वित हुए हैं।
अकेले उज्ज्वला योजना के तहत सात करोड़ परिवारों के घरों में गैस पहुंची है, आयुष्मान योजना के तहत बीस लाख से अधिक परिवारों ने मुफ्त इलाज की सुविधा उठा ली है, मुद्रा योजना के तहत 17 करोड़ लोगों को लोन बांटे गए हैं। लेकिन इसके बाद भी यह आवश्यक नहीं है कि ये सभी लाभार्थी इस लोकसभा चुनाव में भाजपा को ही वोट दें।
उन्होंने कहा कि लाभार्थियों के वोट में तब्दील होने की उम्मीद से सरकारें काम नहीं करतीं। लेकिन अगर लोग काम करने वाली, विकास करने वाली सरकार को वोट दें और जाति की राजनीति को नकारें तो इससे लोकतंत्र में एक स्वस्थ परंपरा अवश्य स्थापित होगी। भाजपा नेता ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने इसी तरह की परंपरा को आगे बढ़ाने का काम किया है।
चुनाव घोषणा पत्र को लागू करने में आगे रही मोदी सरकार
विनय सहस्रबुद्धे के मुताबिक भाजपा ने वर्ष 2014 में अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी किया था। अगर केंद्र सरकार की योजनाओं को ध्यान में ऱखते हुए विश्लेषण किया जाय तो भाजपा अपने घोषणा पत्र के ज्यादातर मुद्दों को लागू कराने में सफल रही है। भाजपा ने गरीबों-वंचितों के जीवन स्तर को सुधारने का वायदा किया था जिसे उसने अपनी अनेक योजनाओं के जरिये पूरा करने की कोशिश की। एससी/एसटी, ओबीसी और अन्य वर्गों को सामाजिक न्याय दिलाने का वायदा रिजर्वेशन, ओबीसी आयोग बनाकर पूरा किया गया। इसके अलावा अल्पसंख्यकों को बराबरी का अधिकार देने में भी सरकार सफल रही है।
इन मुद्दों पर नहीं हुई अपेक्षित प्रगति
भाजपा नेता का मानना है कि सरकार उन्हीं मुद्दों पर अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाई है जहां उसे राज्य सभा में बड़े समर्थन की आवश्यकता थी। अनुच्छेद 370 को हटाने, 35A पर पुनर्विचार करने और राममंदिर बनाने जैसे मुद्दों पर तकनीकी विरोध के कारण सरकार अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाई।