किराये की कोख के कारोबार पर रोक लगाने वाले विधेयक को लोकसभा की मंजूरी
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किराये की कोख (सरोगेसी) के धंधे पर रोक लगाने वाले विधेयक को लोकसभा ने सोमवार को मंजूरी दे दी। सरोगेसी (विनियमन) विधेयक, 2019 में देश में सरोगेसी के दुरुपयोग रोकने और नि:संतान दंपतियों को संतान का सुख दिलाना सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। विपक्ष के संशोधनों को खारिज कर सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
लोकसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा, विधेयक से सरोगेसी के कारोबार पर लगाम लगेगी और महिलाओं का उत्पीड़न रुकेगा। उन्होंने कहा कि जापान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, स्विट्जरलैंड और जर्मनी समेत कई देशों में व्यावसायिक सरोगेसी प्रतिबंधित है, केवल यूक्रेन, रूस व अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत में यह वैध है।
मंत्री ने कहा कि विधेयक में भारत में सरोगेसी पर प्रभावी तरीके से विनियमन का प्रावधान है। इसके तहत राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सरोगेसी बोर्ड के गठन का प्रस्ताव है।
विधेयक के प्रावधान
- संतान चाहने वाली महिला की उम्र 23 से 50 वर्ष और पुरुष की उम्र 26 से 55 वर्ष के बीच होना जरूरी।
- दंपती की शादी के कम से कम पांच वर्ष होना अनिवार्य और सरोगेसी के लिए भारत का नागरिक होना चाहिए ।
- जिस महिला को सरोगेट मां बनाया जाएगा, उसका भारतीय नागरिक और संतान पाने वाले दंपती का करीबी रिश्तेदार होना जरूरी।
- सरोगेट मां की उम्र 25 से 35 वर्ष होना जरूरी। सरोगेट मां का शोषण रोकने व सरोगेट बच्चों के अधिकार तय करने का प्रावधान।
- सरोगेसी के लिए मानव भ्रूण की बिक्री पर 10 साल की सजा और अधिकतम 10 लाख रुपये का जुर्माना।
- सरोगेसी सेवा देने वाले हर क्लीनिक के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य।
महिला सांसदों ने रखी अपनी राय
विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि देश में सरोगेसी एक उद्योग बन गया है, ऐसे में यह विधेयक महिलाओं का शोषण रोकेगा। वाईएसआर कांग्रेस की सांसद वीवी सत्यवती ने कहा कि विधेयक में करीबी रिश्तेदारों को परिभाषित नहीं किया गया है। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि करीबी रिश्तेदार को परिभाषित करने पर व्यापक चर्चा की गई है। मंत्री के जवाब के बाद विधेयक को पास कर दिया गया।