रॉ, आईबी, सीबीआई और दिल्ली पुलिस आयुक्त के पदों के लिए आईपीएस अफसरों की लॉबिंग
देश की खुफिया एजेंसी (आईबी), विदेशी मामलों की सीक्रेट एजेंसी रिसर्ट एंड एनालिसिस विंग (रॉ) और सीबीआई के निदेशक पद के लिए आईपीएस लॉबी में दौड़ शुरू हो गई है। अगले माह इन सभी एजेंसियों के प्रमुख रिटायर हो रहे हैं। इसके अलावा दिल्ली पुलिस आयुक्त को भी बदले जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
एसएसबी के डीजी का पद अभी तक स्थायी तौर पर नहीं भरा गया है। आईटीबीपी के डीजी एसएस देशवाल ही एसएसबी डीजी का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं। जांच एजेंसियों, खासतौर पर रॉ व आईबी के चीफ जो कि जनवरी में रिटायर हो रहे हैं, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद नई पोस्टिंग दिए जाने की चर्चाएं हैं।
बता दें कि रॉ चीफ अनिल धस्माना, जो कि मध्यप्रदेश कैडर के 1981 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, उनका कार्यकाल जनवरी 2019 में खत्म हो रहा है। डीओपीटी के सूत्रों का कहना है कि धस्माना को सेवानिवृत्ति के बाद नई जिम्मेदारी दी जा सकती है।
आईबी डायरेक्टर राजीव जैन, झारखंड से 1980 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, वे भी अगले माह रिटायर हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि पीएमओ और डीओपीटी इन दोनों अफसरों की कार्यप्रणाली से खुश हैं, इसलिए इन्हें पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग मिलना लगभग तय है। इनमें एक अफसर को जम्मू-कश्मीर भेजे जाने की चर्चाएं हैं।
कुछ दिन पहले ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए करनैल सिंह को भी किसी वित्तीय संस्था में शामिल किए जाने की चर्चाएं हैं। बता दें कि ईडी के पिछले दस साल के कार्यकाल में उतनी संपत्तियां जब्त नहीं की गई, जितनी करनैल सिंह के कार्यकाल में हुई हैं। साथ ही ईडी के दर्ज मामले (पीएमएलए-फेमा) भी कई गुणा बढ़ गए थे। इनकी कार्यप्रणाली से पीएमओ संतुष्ट बताया गया है।
सीबीआई निदेशक की दौड़ में हैं कई नाम
सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा का मामला हालांकि अभी सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, लेकिन सरकार उनके उत्तराधिकारी को लेकर भी हरकत में आ गई है। इसके लिए कई नए नाम सामने आ रहे हैं। इनमें पहला नाम एनआईए चीफ वाईसी मोदी का है। वे सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुड बुक में बताए जाते हैं।
गुजरात दंगों की जांच के लिए बनी एसआईटी, जिसने नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दी थी, उसमें करनैल सिंह, वाईसी मोदी और राकेश अस्थाना शामिल थे। इन तीनों अफसरों को केंद्रीय जांच एजेंसियों में अहम पदों पर पोस्टिंग मिली है।
सीबीआई निदेशक के लिए बीएसएफ के डीजी रजनीकांत मिश्र और सीआईएसएफ के डीजी राजेश रंजन का भी नाम चल रहा है। हालांकि यूपी के डीजी ओपी सिंह का नाम भी सीबीआई के लिए आगे आ रहा है, लेकिन यूपी के मुख्यमंत्री इन्हें वहीं पर रखना चाहते हैं।
सूत्रों का कहना है कि इस फेरबदल में दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक का भी नंबर आ सकता है। उनके पक्ष में पीएमओ के एक बड़े अधिकारी बताए गए हैं। कहा जाता है कि उनकी नियुक्ति में उक्त अधिकारी और सीबीआई चीफ आलोक वर्मा का हाथ रहा है।
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है, चूंकि अब वर्मा केंद्र सरकार के टारगेट पर हैं और दूसरा, दिल्ली में कानून व्यवस्था भी कोई खास बेहतर नहीं हुई है, ये सब बातें इशारा करती हैं कि सरकार उन्हें दिल्ली पुलिस आयुक्त के पद से हटाकर एसएसबी में भेज सकती है।
दिल्ली पुलिस आयुक्त के लिए आईबी में लंबे समय तक सेवाएं देकर हाल ही में अपने मूल कैडर में लौटे प्रभात सिंह का नाम भी लिया जा रहा है। दूसरे नंबर पर सीआरपीएफ के स्पेशल डीजी एसएन श्रीवास्तव इस पद के लिए जोर लगा रहे हैं। पहले वे श्रीनगर में बैठते थे, लेकिन उन्होंने बाद में अपनी पोस्टिंग सीआरपीएफ मुख्यालय में करा ली थी। उनके सामने एक छोटी सी तकनीकी बाधा है कि वे अभी दिल्ली पुलिस में नहीं आए हैं।
दिल्ली पुलिस आयुक्त के अलावा दूसरे पदों पर भी नई नियुक्तियां होनी है। सतेंद्र गर्ग जो कि एमएचए में हैं, उनका नाम बहुत पहले ही डीजी एम्पैनलमेंट में आ चुका है। वे दिल्ली पुलिस में नंबर दो की हैसियत से आ सकते हैं। स्पेशल सेल के स्पेशल सीपी एमएम ओबरॉय, जो कि अपने कामकाज की वजह से गृह मंत्रालय के टॉप अफसरों में शामिल हैं, वे भी दूसरी पोस्टिंग पर जा सकते हैं।