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LN Mishra Case: पूर्व रेलमंत्री के पोते को 'सुप्रीम' अनुमति; दोषियों की अपील की सुनवाई में HC की करेंगे मदद

Wed, 01 Nov 2023 03:57 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 01 Nov 2023 03:57 PM IST
सार

2 जनवरी 1975 को जब तत्कालीन रेलमंत्री एलएन मिश्रा बिहार के समस्तीपुर स्टेशन पर  ब्रॉड गेज लाइन के उद्घाटन के लिए गए थे तब वहां हुए बम विस्फोट में घायल हो गए थे। बाद में उन्हें इलाज के लिए समस्तीपुर से दानापुर ले जाया गया जहां 3 जनवरी, 1975 की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया था।

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LN Mishra assassination case: Supreme Court permits grandson to assist HC in hearing of appeals of convicts
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

48 साल पहले पूर्व रेल मंत्र ललित नारायण मिश्रा की हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान शीर्ष कोर्ट ने मृतक कांग्रेस नेता के पोते वैभव मिश्रा को हत्या के मामले में दोषियों की याचिका पर अंतिम सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट की मदद करने के लिए अनुमति दे दी है। बता दें कि पूर्व रेल मंत्री एल एन मिश्रा की 48 साल पहले बिहार के समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर बम विस्फोट में हत्या कर दी गई थी। 

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 बता दें कि वैभव मिश्रा एक वकील भी हैं। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के सात फरवरी के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। दरअसल, वैभव मिश्रा ने 1975 में हुए एलएन मिश्रा हत्याकांड के संदर्भ में सीबीआई को 'निष्पक्ष' और 'पुनः जांच' का निर्देश देने की मांग वाली याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल की थी। जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। जिसके बाद  वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। अपनी याचिका में वैभव मिश्रा ने कहा था कि इस मामले में फैसला देते हुए दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने मामले के वास्तविक दोषियों को बरी कर दिया था। उन्होंने इसे 'न्याय का मजाक' भी बताया। इसी आधार पर उन्होंने मामले में सीबीआई से दोबारा जांच कराने की मांग की थी। 
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गौरतलब है कि 2 जनवरी 1975 को जब तत्कालीन रेलमंत्री एलएन मिश्रा बिहार के समस्तीपुर स्टेशन पर  ब्रॉड गेज लाइन के उद्घाटन के लिए गए थे तब वहां हुए बम विस्फोट में घायल हो गए थे। बाद में उन्हें इलाज के लिए समस्तीपुर से दानापुर ले जाया गया जहां 3 जनवरी, 1975 की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। इस हमले में मिश्रा के अलावा तत्कालीन एमएलसी सूर्य नारायण झा और रेलवे क्लर्क राम किशोर प्रसाद सिंह की भी मौत हो गई थी। आरोप है कि ये विस्फोट हिंदूपंथी संगठन आनंद मार्ग के एक नेता की रिहाई के लिए सरकार पर दबाव बनाने के लिए कराया गया था।  

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