पीएम मोदी बोले- जमीन का भूखा नहीं भारत, हमने कभी किसी देश पर नहीं किया हमला
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भारत ने न तो कभी किसी देश पर हमला किया है और न ही किसी की जमीन हड़पने का भूखा रहा है, लेकिन देशहित और अखंडता की रक्षा के लिए यहां के नागरिकों ने बड़ी कुर्बानी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह बात रविवार को प्रवासी भारतीय केंद्र के उद्घाटन समारोह के मौके पर कही।
पाकिस्तान कश्मीर मसले सुलझाने पर लगातार अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से गुहार लगा रहा है। पीएम मोदी ने इसी संदर्भ में यह टिप्पणी की। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारत ने कभी किसी पर हमला नहीं किया है और न ही यह किसी की जमीन का भूखा है। लेकिन दो विश्वयुद्धों (जिनमें भारत का कोई प्रत्यक्ष हित नहीं था) में 15 लाख भारतीय सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी।
विदेशों में रहने वाला भारतीय समुदाय कभी राजनीति से जुड़ने में यकीन नहीं करता और न ही विदेशी जमीन पर सत्ता हड़पने की चाहत रखता है।’ उन्होंने अफसोस जताया कि उच्च आदर्श मूल्यों के बावजूद यह देश ने विश्व को कभी अपनी कुर्बानी की अहमियत नहीं समझा पाया।
भारतीय समुदाय शक्तिशाली रहा है
यहां के नागरिक सामाजिक सद्भाव के सिद्धांतों पर चलते हुए दूसरे समुदायों के साथ घुलमिल जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब कभी भी वह विदेश जाते हैं तो भारतीय सैनिकों के बलिदान की याद जरूर दिलाते हैं। भारतीय समुदाय को भी इस कार्य में योगदान करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘विदेशों में बसने वाले भारतीय कभी वहां की राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करते और न ही वहां की सत्ता हथियाने की चाहत रखते हैं। विदेशों में भारतीय सामाजिक सद्भाव के सिद्धांतों पर दूसरों के साथ घुलमिल कर रहते हैं। वे पानी की तरह हैं और जरूरत के मुताबिक अपना आकार और रंग बदल लेते हैं।
कुछ ऐसे देश हैं जहां भारतीय मिशन की तुलना में भारतीय समुदाय अधिक शक्तिशाली रहा है और भारत के प्रति वहां के लोगों के मन से अज्ञात भय दूर करने में मददगार रहा है।’
दूसरे देश भारतीयों से मदद मांगते हैं
प्रतिभा पलायन को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि यदि प्रवासी भारतीयों की क्षमता का सदुपयोग किया जाए तो हम इस ‘ब्रेन ड्रेन’ को ‘ब्रेन गेन’ में तब्दील कर सकते हैं। उन्होंने नेपाल में भूकंप के बाद वहां के लोगों की मदद तथा यमन जैसे देशों के अशांत स्थानों से भारतीयों और विदेशों को सुरक्षित निकालने के लिए विदेश मंत्रालय की भूमिका की सराहना की।
उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय ने खुद पहल की और अब विश्व भी स्वीकार करने लगा है कि मानवता की सहायता में भारत का अहम योगदान रहा है। अब दूसरे देश भी संकटग्रस्त स्थिति से अपने नागरिकों की रक्षा के लिए भारत से मदद मांगने लगे हैं।
उन्होंने दूसरे देशों से अपील की कि चूंकि भारत उनके नागरिकों को निश्चित रूप से संकट से बचाता रहा है इसलिए हमारे नागरिकों को भी वे ऐसी ही मदद करें।