पाकिस्तानी PM की दूसरी शादी के बाद बैन हुआ था ट्रिपल तलाक, जानिए इन 22 देशों में क्या थी वजह
भारत, पाकिस्तान समेत 22 देशों में तीन तलाक पर प्रतिबंध है। मिस्र दुनिया का पहला ऐसा देश है, जहां तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाया गया था। मिस्र में 1929 में मुस्लिम जजों की खंडपीठ ने सर्वसम्मति से तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था। इसके बाद 1929 में मिस्र से प्रेरणा लेकर सूडान की कोर्ट ने भी अपने देश में इसे बैन कर दिया।
पाक पीएम के दूसरी शादी करने पर बैन हुआ तीन तलाक
1955 में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री मोहम्मद अली बोगरा ने अपनी पहली पत्नी को तलाक दिए बिना दूसरी शादी कर ली। देश भर की महिलाएं इसके विरोध उठ खड़ी हुईं, जिसके बाद 1956 में तीन तलाक बंद हो गया। हमारे दो अन्य पड़ोसी देशों बांग्लादेश और श्रीलंका में भी यह कुप्रथा बैन है।
इन देशों में प्रतिबंध
भारत, पाकिस्तान, मिस्र, सूडान, बांग्लादेश, श्रीलंका, इराक, सीरिया, साइप्रस, तुर्की, जॉर्डन, अल्जीरिया, ईरान, ब्र्रुनेई, मोरक्को, कतर, यूएई, ट्यूनीशिया, मलेशिया का सारावाक राज्य, इंडोनेशिया, मलेशिया और सऊदी अरब
1978 में शाह बानो के तलाक से शुरू हुआ विरोध
62 साल की मुस्लिम महिला को 1978 में उसके पति ने तलाक दे दिया। अपनी और अपने बच्चों की जीविका का कोई साधन नहीं होने पर शाह बानो ने गुजारे भत्ते के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने 1985 में शाह बानो के हक में फैसला दिया। पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के विरोध के चलते 1986 में पूर्ण बहुमत वाली राजीव गांधी सरकार ने संसद में कानून पास कर, अदालत के निर्णय को पलट दिया।
ट्रिपल तलाक के विरोध में दलीलें
सात महिला याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में शादी तोड़ने के मर्दों के हक को मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताया था। महिलाओं का कहना था कि वह 70 साल से इस शिकंजे में फंसे हैं। कुरान में कहीं तीन तलाक का जिक्र नहीं है।
समर्थन में मुस्लिम संगठनों की दलीलें
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मुताबिक कानून को धार्मिक मामलों में दखल बताया है। इसे संविधान के 25 और 26 अनुच्छेद में दी गई धर्म और उससे जुड़ी परंपराओं को मानने की आजादी के खिलाफ बताया है।
हनफी विचारधारा में ज्यादा प्रचलन
ज्यादातर मुस्लिम देशों में बैन होने के बावजूद भारतीय मुसलमानों में तीन तलाक का ज्यादा प्रचलन है। इस्लाम की चार खास विचारधाराओं में से हनफी धारा को मानने वाले अधिक हैं। इन्हीं के बीच एक सांस में तीन तलाक को ठीक माना गया है। बाकी तीन धाराओं में एक सांस में तीन तलाक को एक माना जाता है। शादी खत्म करने के लिए कुछ महीनों बाद अलग-अलग समय में दो बार तलाक देना जरूरी होता है।