संसद की तरह सुप्रीम कोर्ट की 'सुनवाई' भी हो सकती है सार्वजनिक, अटॅार्नी जनरल ने दी सलाह
देश के संसद की कार्यवाही टीवी पर सीधा प्रसारण के जरिए सार्वजनिक की जाती है ताकि आम जनता को देश से जुड़े हर मसले पर हो रही बहस और चर्चा की जानकारी मिले। इसी तरह पुलिस स्टेशन में भी सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में अधिकारी काम करते हैं ताकि उनके कामकाज के तरीके की जवाबदेही तय हो। लेकिन न्याय के सबसे बड़े मंदिर यानि सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही पर ऐसा कोई नियम लागू नहीं है।
सोमवार को इसी सिलसिले में दाखिल एक पीआईएल पर केन्द्र सरकार ने भी अपना पक्ष रखा। अटॅार्नी जनरल के.के वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के सीधा प्रसारण की मांग को सिर्फ संवैधानिक मामलों में प्रयोगात्मक रुप से शुरु करने की सलाह दी। साथ ही इस बात पर भी ज़ोर दिया कि मंजूरी सिर्फ और सिर्फ संवैधानिक मामलों में दी जाये, रेप और वैवाहिक विवादों की सुनवाई को सार्वजनिक हरगिज ना किया जाये।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने सुनवाई के लाइव स्ट्रीमिंग को कानून के विद्यार्थियों, जूनियर वकीलों, वादी और आम जनता के सरोकार के लिए समय की मांग बताया। लेकिन ये भी मांग की कि इसे कोर्ट पूरी तरह से कानूनी अमली जामा पहना कर ही करे ताकि इसका व्यवसायिक इस्तेमाल मीडिया, सोशल मीडिया पर क्लिप्स बना कर धड़ल्ले से ना हो।
बॅाम्बे हाईकोर्ट कर चुका है इस याचिका को खारिज
इसी तरह की पीआईएल पहले दाखिल कर चुके एडवोकेट मैथ्यू नेदमपूरा ने कोर्ट से इसे सार्वजनिक करने से ज्यादा अदालत के अपने रिकॅार्ड के लिए बेहद जरुरी बताया। एक सुझाव ये भी दिया गया कि अदालत परिसर में लाइव स्ट्रीमिंग की सुविधा मुहैया कराई जाये ताकि स्टूडेंट, वकील और वादी अदालत की कार्यवाही देख सकें।
जबकि एक और वकील ने सोशल मीडिया पर इसके गलत इस्तेमाल होने का डर बताया। इसका विरोध करने के पीछे सोशल मीडिया के मालिकों का देश के बाहर होना भी बताया गया जिस वजह से उन पर कार्रवाई करना भी मुश्किल होगा।
आपको बता दें, इससे पहले बॅाम्बे हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया था और एपेक्स कोर्ट ने भी लाइव स्ट्रीमिंग की मांग को ठुकराया था। लेकिन 9 जुलाई ,2018 को केन्द्र सरकार और अदालत दोनों ने इस पर सकारात्मक रुख दिखाया। अभी इस मामले में 3 अगस्त ,2018 को भी सुनवाई होगी जिसमें अटॅार्नी जनरल सरकार की ओर से इसे लागू करने के लिए सुझाव लिखित में देंगे। अगर लाईव स्ट्रीमिंग की इजाजत सुप्रीम कोर्ट देता है तो ये अपने आप में एेतिहासिक फैसला होगा।