Exclusive: एलटीटीई की तर्ज पर अब नक्सली इलाकों में तैयार किए जा रहे हैं बच्चों के आत्मघाती दस्ते
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1980-90 के दौरान श्रीलंका में सक्रिय रहा प्रमुख उग्रवादी संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) की तर्ज पर अब भारत के नक्सली समूह भी बच्चों के आत्मघाती दस्ते तैयार करने लगे हैं। विभिन्न राज्यों में लापता हुए बच्चों को नक्सली इलाकों में पहुंचाया जा रहा है। वहां पर इन्हें हथियारों के प्रशिक्षण से लेकर छोटे-मोटे बम बनाने, हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल और आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) ब्लास्ट की जानकारी भी दी जाती है। लापता हुए बच्चों को जबरन असामाजिक सशस्त्र गुटों में भर्ती किया जा रहा है, यह मामला संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) की रिपोर्ट में आने के अलावा केंद्र सरकार के ध्यान में भी है।
बता दें कि देश में हर साल लापता बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। मौजूदा समय में औसतन एक लाख बच्चे हर साल लापता हो जाते हैं। अगर लापता बच्चों के मिलने का आंकड़ा देखें तो वह मुश्किल से पचास फीसदी तक ही पहुंच पाता है। बच्चों से विभिन्न तरह के अपराध कराना, ये मामले तो कई सालों से चल रहे हैं, लड़कियों को वेश्यालयों में भेजने की बातें भी अब पुरानी हो चली हैं। लापता हुए बच्चों के साथ अब एक नया और खतरनाक खेल शुरू हो गया है।
जिस तरह से श्रीलंका में एलटीटीई ने बच्चों के हाथ में हथियार, पेट पर विस्फोटक सामग्री और उनके गले में सायनाइड के कैप्सूल डालकर उन्हें आत्मघाती दस्तों का हिस्सा बना दिया था, अब हमारे देश में नक्सली भी उसी राह पर चल पड़े हैं।
लड़के-लड़की के गायब होने की संख्या (पिछले सालों का आंकड़ा भी शामिल)
बच्चों की दी जा रही ब्लास्ट की ट्रेनिंग
ब्लास्ट के बाद बच्चे भागते नहीं
बच्चों को सिखाते हैं लाल सलाम
सरकार ने भी माना बच्चों का हो रहा है इस्तेमाल