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अगले वित्त वर्ष तक के लिए टल सकती है शेयर बाजार में एलआईसी की एंट्री
Mon, 26 Oct 2020 03:45 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Mon, 26 Oct 2020 03:45 AM IST
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- फोटो : फाइल फोटो
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देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक पेशकश (पब्लिक ऑफरिंग) करार दिया जा रहा भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का आईपीओ अगले वित्त वर्ष तक के लिए टलने की संभावना बन गई है। एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक, शेयर बाजार में एंट्री से पहले केंद्र सरकार पहले देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी के स्वतंत्र बीमांकिक मूल्यांकन का जायजा लेना चाहती है।
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आईपीओ लाने से पहले केंद्र सरकार कराना चाहती है कंपनी का स्वतंत्र मूल्यांकन
निवेश व लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) के सचिव तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि एलआईसी का आईपीओ लाने से पहले का काम चार चरण में चल रहा है। इसमें परामर्शदाताओं की नियुक्ति, विधायी संशोधन, एलआईसी की संपत्ति पर आधारित मूल्यांकन बताने के लिए उसके आंतरिक सॉफ्टवेयर में बदलाव और कंपनी के बीमांकिक मूल्यांकन के लिए बीमांकक की नियुक्ति शामिल है। सरकार उस कानून को भी बदलना चाहती है, जिसके तहत एलआईसी की स्थापना हुई थी।
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पांडे ने कहा, चार चरण पूरा होने के बाद ही एलआईसी में सरकार की हिस्सेदारी घटाने पर आखिरी निर्णय लिया जाएगा। इसी वित्त वर्ष में आईपीओ लाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, हिस्सेदारी घटाने के निर्णय के बाद ही आईपीओ लाने पर सहमति बनेगी और इसके बाद तय होगा कि कितने फीसदी हिस्सेदारी का आईपीओ लाया जाएगा। ये चारों चरण हम इसी वित्त वर्ष में पूरा करने का प्रयास करेंगे, लेकिन आईपीओ एक बड़ा मामला है और मेरा सोचना है कि इसमें समय लगेगा।
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उन्होंने कहा, डेलॉयट और एसबीआई कैप्स एलआईसी के प्रि-आईपीओ सलाहकार नियुक्त किए गए हैं, जो कंपनी के साथ मिलकर अनुपालन सूची तैयार कर रहे हैं। इसके बाद दूसरा चरण कानूनी संशोधन का ह्रै, जिसके लिए वित्तीय सेवा विभाग डीआईपीएएम के साथ मिलकर काम कर रहा है। तीसरा चरण एलआईसी के आंतरिक सॉफ्टवेयर में बदलाव का है। डीआईपीएएम एक बीमांकक फर्म की नियुक्ति का आरएफपी लेकर आएगी, जो एलआईसी के बीमांकिक मूल्यांकन को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करेगा।
सरकार के विनिवेश लक्ष्य को लगेगा करारा झटका
सरकार की तरफ से अगले साल 31 मार्च को समाप्त हो रहे चालू वित्त वर्ष के दौरान रिकॉर्ड 2.1 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य पाने के लिए एलआईसी में हिस्सेदारी की बिक्री बेहद अहम है। सरकार की तरफ से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 के आम बजट के दौरान एलआईसी की हिस्सेदारी को आईपीओ के जरिये बेचने की घोषणा की थी। अब एलआईसी का आईपीओ टलने के चलते सरकार का विनिवेश एक लाख करोड़ रुपये पर ही अटक सकता है, जो विकास योजनाओं के लिए विनिवेश के जरिये र कम जुटाने का प्रयासकर रही सरकार के लिए करारा झटका होगा।
यह है एलआईसी की हिस्सेदारी बेचने की योजना
- 10 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की थी पहले तैयारी
- 1.10 लाख करोड़ रुपये मिलते इससे सरकार को
- 25 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की है अब योजना
- 2.5 लाख करोड़ रुपये तक मिलेंगे इससे सरकार को
- 11.5 लाख करोड़ रुपये है एलआईसी की अनुमानित कीमत।