एलआईसी का एनपीए पांच सालों में हुआ दोगुना, राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर खड़े किए सवाल
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सरकार के स्वामित्व वाली बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) पर नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट (एनपीए) की मार पड़ी है। पांच सालों में कंपनी का एनपीए दोगुना हो गया है। एलआईसी के पास मौजूद नकदी के बड़े भंडार पर जोखिम बढ़ रहा है। इसपर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोला है।
राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि एलआईसी में करोड़ों ईमानदार लोग निवेश करते हैं क्योंकि वे इस पर भरोसा करते हैं। मोदी सरकार एलआईसी को नुकसान पहुंचाकर और जनता के उस भरोसे को नष्ट करके उनके भविष्य को खतरे में डाल रही है। उन्होंने कहा, इन छोटे संकेतों से घबराहट पैदा होती है और इसके भयावह परिणाम हो सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि नकदी भंडार की वजह से एलआईसी, सरकार के लिए भी संकटमोचन का काम करती रही है। एलआईसी ने सार्वजनिक कंपनियों और बैंकों के शेयर खरीद कर उनको बचाने का भी काम किया है। लेकिन एलआईसी के नवीनतम बहीखाता देखने से कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई हैं। 2019-20 के पहले छह महीनों (अप्रैल-सितंबर) में एलआईसी के एनपीए में 6.10 फीसदी की बढ़त हुई है।
एलआईसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 30 सितंबर 2019 तक कुल 30000 करोड़ रुपये का सकल एनपीए है। रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2019 में कंपनी का सकल एनपीए 6.10 प्रतिशत रहा जोकि पिछले पांच सालों में लगभग दोगुना है। यह एनपीए निजी क्षेत्र के यस बैंक, आईसीआईसीआई, एक्सिस बैंक के करीब ही है।
2019-20 की दूसरी तिमाही में यस बैंक का सकल एनपीए 7.39 फीसदी, आईसीआईसीआई का एनपीए 6.37 फीसदी और एक्सिस बैंक का एनपीए 5.03 फीसदी पहुंच गया था।
इन कंपनियों की वजह से बढ़ा एनपीए
डेक्कन क्रॉनिकल, एस्सार पोर्ट, गैमन, आईएलएंडएफएस, भूषण पावर, वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज, आलोक इंडस्ट्रीज, एमट्रैक ऑटो, एबीजी शिपयार्ड, यूनिटेक, जीवीके पावर और जीटीएल आदि में एलआईसी का 25 हजार करोड़ रुपये एनपीए के तौर पर अटका हुआ है।
वहीं एलआईसी ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड, इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंसियल सर्विसेज (डीएचएफएल) और अनिल अंबानी की अगुवाई वाले रिलायंस ग्रुप सहित कई संकटग्रस्त कंपनियों को भारी-भरकम कर्ज दे रखा है।