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कच्चे माल पर जीएसटी कम और तैयार माल पर ज्यादा, व्यापारियों का विसंगति दूर करने की मांग
Wed, 19 Dec 2018 06:57 PM IST
Avdhesh Kumar
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Wed, 19 Dec 2018 06:57 PM IST
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GST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई वस्तुओं पर जीएसटी की दर कम किए जाने की बात कही है। 22 दिसंबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक से पहले पीएम की इस बात को महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी बीच व्यापारियों ने मांग की है कि कच्चे माल पर ज्यादा जीएसटी और उसी कच्चे माल से बने उत्पाद पर ज्यादा जीएसटी लगाने की विसंगति को दूर किया जाना चाहिए। साथ ही जीएसटी की प्रक्रिया को सरल करने की भी मांग की गई है। व्यापारियों के एक संगठन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इन्हीं मांगों को लेकर बुधवार को प्रदर्शन किया।
कैट के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने अमर उजाला से कहा कि किसी कच्चे माल पर ज्यादा जीएसटी लगाने से उसका उपयोग सामान्य चीजों और विलासिता की चीजों दोनों के लिए महंगा हो जाता है। लेकिन सरकार कई मामले में कच्चे माल पर ज्यादा जीएसटी लगाती है लेकिन उसके उत्पाद पर वस्तु की उपयोगिता के हिसाब से अलग-अलग जीएसटी दर तय करती है।
कैट के मुताबिक ऐसी स्थिति में सामान्य वस्तुओं का मूल्य भी अधिक हो जाता है। सरकार को इस विसंगति को दूर कर उत्पाद आधारित जीएसटी दर तय करनी चाहिए। जो जीएसटी का अंतर होता है वह व्यापारियों को रिफंड के रुप में देने का प्रावधान होते हुए भी व्यापारियों का आरोप है कि वह उन्हें नहीं मिल पाता है।
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खंडेलवाल ने कहा कि जीएसटी लागू हुए लगभग डेढ़ वर्ष बीत गया है। अब जीएसटी को एक स्थायी कर प्रणाली के रूप में स्थापित हो जाना चाहिए। कैट की मांग है कि 28 प्रतिशत के कर स्लैब को केवल कुछ विलासिता की वस्तुओं तक ही सीमित रखना चाहिए। कुछ अन्य वस्तुओं की जीएसटी दर भी घटाने की मांग की गई है।
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कैट के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने अमर उजाला से कहा कि किसी कच्चे माल पर ज्यादा जीएसटी लगाने से उसका उपयोग सामान्य चीजों और विलासिता की चीजों दोनों के लिए महंगा हो जाता है। लेकिन सरकार कई मामले में कच्चे माल पर ज्यादा जीएसटी लगाती है लेकिन उसके उत्पाद पर वस्तु की उपयोगिता के हिसाब से अलग-अलग जीएसटी दर तय करती है।
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कैट के मुताबिक ऐसी स्थिति में सामान्य वस्तुओं का मूल्य भी अधिक हो जाता है। सरकार को इस विसंगति को दूर कर उत्पाद आधारित जीएसटी दर तय करनी चाहिए। जो जीएसटी का अंतर होता है वह व्यापारियों को रिफंड के रुप में देने का प्रावधान होते हुए भी व्यापारियों का आरोप है कि वह उन्हें नहीं मिल पाता है।
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खंडेलवाल ने कहा कि जीएसटी लागू हुए लगभग डेढ़ वर्ष बीत गया है। अब जीएसटी को एक स्थायी कर प्रणाली के रूप में स्थापित हो जाना चाहिए। कैट की मांग है कि 28 प्रतिशत के कर स्लैब को केवल कुछ विलासिता की वस्तुओं तक ही सीमित रखना चाहिए। कुछ अन्य वस्तुओं की जीएसटी दर भी घटाने की मांग की गई है।