ऑपरेशन तेंदुआ: 51 घंटे के बाद पिंजरे में कैद हो पाया तेंदुआ
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शहर में आ धमके तेंदुए को पकड़ने में सरकारी तंत्र को पूरे 51 घंटे लग गए। तमाम जतन विफल होने के बाद आखिरकार कानपुर चिड़ियाघर से आई विशेष टीम ने इस तेंदुए पर काबू पाया। करीब साढ़े तीन घंटे चले स्पेशल ऑपरेशन में बृहस्पतिवार सुबह 10:30 बजे तेंदुआ कब्जे में आ सका।
हमलावर हो चुके इस तेंदुए ने ट्रंक्लुइजेशन के पहले ही शॉट के बाद एक डॉक्टर को जख्मी कर डाला। चौथे और अंतिम सधे हुए शॉट के बाद जब तेंदुए के बेहोश होने की पूरी तसल्ली हो गई तो उसे उठाकर पिंजरे में डाला गया। मुख्य वन संरक्षक के अनुसार तेंदुआ घायल है, इसलिए उसे कानपुर चिड़ियाघर भेजा जा रहा है।
मंगलवार सुबह करीब 7:30 बजे वेस्ट एंड रोड स्थित मिलिट्री अस्पताल में पहुंचा यह तेंदुआ बुधवार सुबह 8 बजे के बीच हेल्थ इंस्पेक्टर विष्णु त्रिपाठी के अलावा चार मजदूरों पर हमला कर चुका था। इसके बाद कैंट स्थित 60 इंजीनियर्स जेसीओ मेस के गोदाम में छिपे इस तेंदुए को रेस्क्यू करने के लिए बुधवार आधी रात तक प्रयास चल रहे थे।
बृहस्पतिवार सुबह करीब सात बजे कानपुर चिड़ियाघर से टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मौके का गहनता से निरीक्षण करने के बाद करीब दो घंटे में तेंदुए को बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया गया। सुबह करीब 9:10 बजे उस पर ट्रंक्लुाइजेशन का पहला शॉट दागा गया।
तेंदुआ इससे बेहोश तो नहीं हुआ लेकिन आक्रामक होकर उसने टीम के प्रभारी डॉ. आरके सिंह जोकि जाल से सटे थे, उन पर हमला बोलकर हाथ घायल कर दिया। इसके 20 मिनट बाद तेंदुए को सिंगल डोज का शॉट दिया गया, लेकिन तेंदुए पर यह भी पूरी तरह कारगर नहीं हुआ। थोड़ी देर इंतजार करने के बाद 10 बजे फिर डबल डोज का शॉट और 10:20 बजे अंतिम सिंगल डोज के शॉट लगते ही तेंदुआ जमीन पर गिर गया।
इसके करीब 10 मिनट के भीतर वह बेहोश हो गया। टीम ने बहुत ही गहनता से तेंदुए को देखा और जब पूरी तरह आश्वस्त हो गए कि तेंदुआ बेहोश हो गया है तो उसे उठाकर पिंजरे में डाल दिया गया। तेंदुए के पिंजरे में जाते ही सभी ने राहत की सांस ली।
डेढ़ घंटे बाद आया होश में
टीम के सामने अब तेंदुए को दोबारा सामान्य अवस्था में लेकर आना लक्ष्य था। जिस कारण टीम तुरंत ही तेंदुए को लेकर वन विभाग के दफ्तर चली आयी। जहां उसे सघन देखरेख में रखा गया। करीब डेढ़ घंटे बाद तेंदुए को होश आने के बाद टीम कामयाबी मिली।
मुख्य वन संरक्षक मुकेश कुमार ने बताया कि तेंदुआ घायल होने के साथ ही सहमा हुआ है। उसे कानपुर चिड़ियाघर भेजा जा रहा है। उसके सामान्य होने के बाद आगे कोई निर्णय लिया जाएगा। वहीं, दूसरी तरफ तेंदुआ पकड़े जाने के बाद सेना के जवानों और उनके परिजनों के साथ ही शहर के लोगाें ने राहत की सांस ली है।
शहर को सुकून, विभाग को कामयाबी, तेंदुए को गुलामी
विपिन धनकड़, मेरठ। मिशन तेंदुआ पूरा हो चुका है। सवाल है किसे क्या मिला। वन विभाग, प्रशासन और पुलिस के हाथ कामयाबी लगी तो शहर अब सुकून में है। सब ने कुछ न कुछ पाया है। खोया तो सिर्फ तेंदुए ने है। वह तो शिकार की तलाश में शहर आ गया था। बदले में उसे जिंदगी भर की गुलामी मिली। जिस इंसान से बचने के लिए उसने हर जतन किए, अब चिड़ियाघर में उसी का मनोरंजन करेगा। तेंदुए का नया ठिकाना मेरठ से करीब 430 किमी दूर कानपुर का चिड़ियाघर होगा। उसकी आगे की जिंदगी अब वहीं गुजरेगी।
शहर में घुसने के बाद तेंदुए ने क्या-क्या नहीं सहा। लोग उसकी जान के दुश्मन बन गए। करीब 15 घंटे तक पेड़ पर बैठा रहा। ट्रेंक्यूलाइजेशन का दर्द सहा। बेसुध होकर इधर-उधर दौड़ा। दो दिन तक भूखा-प्यासा रहा। कैंडल स्मोक भी झेला। हर पल शोरशराबा उसकी मानसिक शांति को भंग करता रहा। जंगल की आजादी की जगह गोदाम में कैद रहा। जख्मी हालत में शहर में दाखिल हुआ था और न जाने कितने जख्म लेकर गया। तेंदुए ने 51 घंटे में भारी ट्रॉमा झेला, जिससे वह उत्तेजित और आक्रामक हो गया था।
शुक्र इस बात का है कि रेस्क्यू टीम ने उसे इस तरह कवर किया था कि भाग निकलने के चांस नहीं थे, वरना वह जानमाल को नुकसान पहुंचा सकता था। खुद को बचाने के लिए पंजों से प्रहार कर सकता था। यह सब जानते हैं कि सरधना के आसपास के जंगल और हस्तिनापुर सेंक्चुरी में तेंदुए पाए जाते हैं। जंगल और गांव में अक्सर यह दिख जाते हैं। शहर के आउटर में पांच से 15 किमी के दायरे में इनका विचरण है। इस तेंदुए को शहर में घुसने की सजा यह मिली कि उसे 430 किमी दूर कानपुर के चिड़ियाघर का रास्ता दिखा दिया है।
डेढ़ घंटे में आया होश, पिंजरे में गुर्राया
ट्रेंक्यूलाइजेशन के बाद तेंदुए को पिंजरे में डालकर वन विभाग की टीम ले गई। पिंजरे में उसके लिए पानी और गोश्त रख दिया था। वेटनरी डॉक्टर आरके सिंह साथ गए। करीब डेढ़ घंटे बाद पूरी तरह होश में आते ही वह जोर से गुर्राया। उसने कई बार दहाड़ मारी। इसके बाद पानी पिया और गोश्त खाया। डॉक्टर ने उसका सीधा पंजा, जिसमें घाव है, उसे चेक किया और दवा लगाई। तेंदुआ अभी डिस्टर्ब है। उसे सामान्य होने में एक-दो दिन लगेंगे। तब तक उसकी खूब खातिरदारी होगी।
चिड़ियाघर में दूर हो जाता है डर
जंगली जानवर का चिड़ियाघर में इंसान से डर दूर हो जाता है। वजह यह कि वह उसे पास से रोजाना देखते हैं। उनके आसपास रहते हैं। इसलिए चिड़ियाघर के जानवरों को जंगल में वापस जल्दी से नहीं छोड़ा जाता। एक्सपर्ट इंसान का डर कायम रखने के लिए आंख में सिरका डालते हैं, जिससे वह डरता रहे। प्रदेश में पकड़े जाने वाले तेंदुए कानपुर चिड़ियाघर में भेजे जाते हैं। यहां संख्या ज्यादा होने पर कुछ की शिफ्टिंग भी होती है। तेंदुआ इलाज के बाद लखनऊ चिड़ियाघर शिफ्ट किया जा सकता है।