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हैदराबाद एनकाउंटरः कानूनविदों ने कहा- सिस्टम में सुधार और न्यायपालिका को प्रो-एक्टिव होने की जरूरत
Sat, 07 Dec 2019 06:15 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sat, 07 Dec 2019 06:15 AM IST
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हैदराबाद एनकाउंटर
- फोटो : ANI
हैदराबाद एनकाउंटर पर मचे बवाल के बाद न्यायपालिका और सिस्टम में व्यापक सुधार की बात उठ खड़ी हुई है। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह हमारे सिस्टम का दोष है जिस कारण इस तरह की घटनाएं हो रही है और लोगों का एक धरा इस एनकाउंटर को जायज बता रहा हैं। उनका मानना है कि न्यायपालिका को प्रो-एक्टिव होना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा का कहना है कि हैदराबाद एनकाउंटर विचित्र है। पुलिस की यह करतूत कहीं से जायज नहीं है। इस तरह की घटनाओं को अंजाम देना न केवल कानून के शासन केखिलाफ है बल्कि यह मानवता केखिलाफ है। यह कतई न्याय है। जरूरी है कि इस तरह के मामले का स्पीडी ट्रायल हो लेकिन यह कतई नहीं हो कि स्पीडी ट्रायल के चक्कर में न्याय न हो। आरोपियों को बचाव का मौका मिलना चाहिए।
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वहीं दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आरएस सोढ़ी का कहना है कि पुलिस की यह कार्रवाई बेहद अफसोसजनक है और कानून के खिलाफ है। न्यायपालिका के पास मामला पहुंचने से पहले आरोपियों को एनकाउंटर कर मारने की यह घटना किसी सभ्य समाज को शोभा नहीं देती।
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यह जरूर है कि ऐसे मामलों का निपटारा जल्द होना चाहिए जिससे कि लोगों का न्यायपालिका के प्रति भरोसा कायम रहे। लेकिन न्यायपालिका की भी अपनी सीमाएं और बंदिशें हैं। क्षमता से आधे में काम रही न्यापालिका के पास अपनी मजबूरियां हैं। जब जजों की संख्या कम होगी तो आखिर त्वरित न्याय कैसे संभव है।
वहीं वरिष्ठ वकील संजय हेगडे का कहना है कि इस मामले में पुलिस की थ्योरी बिल्कुल पचने वाली नहीं है। लोगों के समर्थन पर पुलिस को काम नहीं करना चाहिए। इस मामले में दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करनी चाहिए।
साथ ही न्यायिक जांच की जानी चाहिए। न्यायपालिका को ऐसे मामलों में प्रो-एक्टिव होना चाहिए। उनका कहना है कि जो ऐसी घटना को सही बात रहे हैं उन्हें यह समझना चाहिए कि यह कानून का शासन के खिलाफ है और ऐसी स्थिति में यह पुलिसिया राज्य में तब्दील हो जाएगी।
वहीं वरिष्ठ वकील संजय पारिख का कहना है कि रूल ऑफ लॉ में एनकाउंटर का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस एनकाउंटर मामलों छानबीन केलिए दिशानिर्देश जारी किए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर किसी एनकाउंटर में किसी की मौत हो जाए तो एफआईआर दर्ज की जाएगी और मामले की छानबीन सीआईडी या अन्य थाने की पुलिस करेगी। उन्होंने कहा कि न तो सीआरपीसी और न ही आईपीसी में अपराधियों केएनकाउंटर का कोई प्रावधान है।