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EC: विधि आयोग संसदीय समिति में कहा- चुनाव टालने का प्रस्तावित अधिकार मनमाना नहीं

Thu, 04 Dec 2025 09:35 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 04 Dec 2025 09:35 PM IST
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Law panel tells simultaneous polls committee Proposed power to EC to defer polls not arbitrary
चुनाव आयोग।

विधि आयोग ने गुरुवार को एक संसदीय समिति से कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने संबंधी विधेयक में निर्वाचन आयोग को दिया गया प्रस्तावित अधिकार न तो अत्यधिक है और न ही मनमाना। विधि आयोग के शीर्ष अधिकारियों ने एक साथ चुनाव संबंधी विधेयकों की पड़ताल कर रही संसद की संयुक्त समिति को यह जानकारी दी।

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ब्रीफिंग के दौरान बैठक में आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को लागू करने के लिए 50 प्रतिशत राज्य विधानसभाओं की मंजूरी अनिवार्य नहीं है। बैठक के दौरान विपक्षी दलों के सांसदों ने विधेयक की संवैधानिकता और संघीय ढांचे पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठाए। एक विपक्षी सांसद ने आरोप लगाया कि आयोग के अधिकारी जानकारी तो दे रहे हैं, लेकिन कई सवालों के संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए।
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एक अन्य सांसद ने कहा कि नियमित अंतराल पर होने वाले चुनाव लोकतांत्रिक नियंत्रण और संतुलन को बनाए रखते हैं, क्योंकि लोकसभा चुनाव के बाद मतदाता विधानसभा चुनावों में अपनी पसंद पर पुनर्विचार कर सकते हैं। उनका कहना था कि एक साथ चुनाव होने पर यह व्यवस्था प्रभावित होगी। 
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विधि आयोग ने स्पष्ट किया कि चुनाव टालने की सिफारिश करने की संभावित शक्ति अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग को दिए गए उसके पूर्ण संवैधानिक अधिकारों से स्वाभाविक रूप से प्राप्त होती है और यह असीमित नहीं है। आयोग ने जोर देकर कहा कि प्रस्तावित संशोधन संविधान के मूल ढांचे को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं करता। उसके अनुसार सदनों के कार्यकाल में संभावित कटौती भी मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं मानी जाएगी। संघवाद के मुद्दे पर आयोग ने कहा कि भारतीय संविधान में परिकल्पित संघवाद विभिन्न इकाइयों के कठोर विभाजन का नहीं, बल्कि एक सुदृढ़ केंद्र को धुरी बनाकर विभिन्न इकाइयों को एक साथ पिरोने का मॉडल है।

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