फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Law Minister said the courts to settle disputes should be the last option

विवादों के निपटारे का अदालतें अंतिम विकल्प होः कानून मंत्री

Sun, 19 Mar 2017 10:49 PM IST
amarujala.com, presented By: अभिषेक तिवारी
amarujala.com, presented By: अभिषेक तिवारी Updated Sun, 19 Mar 2017 10:49 PM IST
विज्ञापन
Law Minister said the courts to settle disputes should be the last option
रवि शंकर प्रसाद - फोटो : अमर उजाला

करोड़ों लंबित मुकदमों के बोझ तले दबी अदालतों को सरकार अब राहत देने की तैयारी में है। इस दिशा में पहल करते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने केंद्र सरकार के मंत्रियों और राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर सरकारों से जुड़े मुकदमों को प्राथमिकता के आधार पर विशेष अभियान के तहत निपटाने का अनुरोध किया है। प्रसाद ने साथ ही यह भी अनुरोध किया है कि भविष्य में सभी मंत्रालय, विभाग और उपक्रम किसी भी तरह के विवाद को सुलझाने के लिए अदालत का अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल करें।

विज्ञापन


उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि विवादों के निपटारे के लिए विशेषज्ञों की राय के अलावा मध्यस्थता की प्रक्रिया को महत्व दिया जाए। गौरतलब है कि देश में लंबित 3.14 करोड़ मुकदमों में से 46 फीसदी मुकदमों में सरकार एक पक्ष है। पत्र की शुरुआत में कानून मंत्री ने लंबित मुकदमों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चिंताओं को रेखांकित करते हुए कहा है कि अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम करने के लिए सरकार कई तरह की पहल कर रही है। इसके बावजूद लंबित मुकमदे की संख्या कम करने में आशातीत सफलता नहीं मिल रही है।
विज्ञापन

 

विशेष अभियान चलाकर विवादों के निपटारे की अपील

Law Minister said the courts to settle disputes should be the last option
र‌वि शंकर प्रसाद - फोटो : pti

उन्होंने मंत्रियों-मुख्यमंत्रियों से अपने मंत्रालयों-राज्यों से जुड़े लंबित मुकदमों की संख्या कम करने के लिए विशेष अभियान चलाने का अनुरोध किया है। सरकार से जुड़े लंबित मुकदमों की बड़ी संख्या का उल्लेख करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अब समय आ गया है कि सभी मंत्रालयों, विभागों, राज्यों को अदालतों से बोझ हटाने के लिए अपना तंत्र विकसित करना चाहिए। यह उनकी जिम्मेदारी है कि वह देखें कि ऐसे कितने मामले  हैं जिन पर मुकदमों से बचा जा सकता है।

प्रसाद ने इसके लिए विशेषज्ञों की राय लेने और मध्यस्थता का रास्ता अपनाने की भी सलाह दी। साथ ही यह भी कहा कि विवादों के निपटारे के लिए अदालतें अंतिम विकल्प होना चाहिए। कानून मंत्री ने केंद्रीय मंत्रियों-मुख्यमंत्रियों से इस संबंध में कार्यवाही रिपोर्ट भेजे जाने की भी उम्मीद जताई है। गौरतलब है कि लंबित मुकदमों पर सरकार और अदालत के बीच टीका टिप्पणी भी सामने आई है।

भारत के पूर्ववर्ती मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने प्रधानमंत्री के सामने एक कार्यक्रम में लंबित मुकदमों के बोझ के लिए जजों और संसाधनों की कमी की बात करते हुए भावुक हो गए थे। उस दौरान प्रधानमंत्री ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed