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Vikram S: श्रीहरिकोटा से देश के पहले निजी रॉकेट की लॉन्चिंग, भारत के लिए कैसे रचा इतिहास, 10 पॉइंट्स में जानें
Fri, 18 Nov 2022 04:25 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीहरिकोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीहरिकोटा
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 18 Nov 2022 04:25 PM IST
सार
इसरो प्रमुख ने बताया कि 100 में से करीब 10 ऐसी कंपनियां हैं, जो सैटेलाइट और रॉकेट विकसित करने में जुटी हैं। इस दौरान उन्होंने चंद्रयान तृतीय की जानकारी देते हुए बताया कि यह जल्द ही लॉन्च किया जाएगा।
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Vikram S Rocket
- फोटो : ISRO
विस्तार
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से शुक्रवार की सुबह साढ़े ग्यारह बजे देश का पहला निजी रॉकेट विक्रम-एस लॉन्च कर दिया गया। इस रॉकेट को अंतरिक्ष (स्पेस) स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस के द्वारा विकसित किया गया है। इस रॉकेट की पहले 15 नवंबर को लॉन्चिंग तय थी, लेकिन मौसम अनुकूल न होने के कारण इसमें देरी की गई। इस मौके पर किसने क्या कहा, आइए 10 पॉइंट्स में जानते हैं।
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1. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित रॉकेट 'विक्रम-एस' का आज श्रीहरिकोटा से उड़ान भरना भारत के लिए ऐतिहासिक क्षण है। यह भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस उपलब्धि के लिए इसरो और स्काईरूट एयरोस्पेस को बधाई।' मोदी ने एक अन्य ट्वीट में कहा, 'यह उपलब्धि हमारे युवाओं की अपार प्रतिभा का प्रमाण है, जिन्होंने जून 2020 के ऐतिहासिक अंतरिक्ष क्षेत्र सुधारों का पूरा लाभ उठाया।'
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2. इनस्पेस के प्रमुख पवन कुमार गोयनका ने कहा कि यह भारत के निजी क्षेत्र के लिए नई शुरूआत है जो अंतरिक्ष के क्षेत्र में कदम रखने जा रहे हैं और एक ऐतिहासिक क्षण हैं। वहीं, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह भारत के स्पेस इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए एक बड़ा कदम है और विश्व समूह के समुदाय में एक सीमावर्ती राष्ट्र के रूप में भी उभर रहा है। यह भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
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3. स्काईरूट एयरोस्पेस के इस पहले मिशन को ‘प्रारंभ’ नाम दिया गया है, जिसमें तीन उपभोक्ता पेलोड हैं। इस मिशन को स्काईरूट के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि यह उन 80 प्रतिशत तकनीकों को मान्यता दिलाने में मदद करेगा, जिनका उपयोग विक्रम-1 कक्षीय वाहन में किया जाएगा, जिसे अगले साल प्रक्षेपित करने की योजना है।
4. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने बताया कि अंतरिक्ष तकनीक और नवोन्मेष के क्षेत्र में इसरो के साथ काम करने के लिए 100 स्टार्ट-अप समझौता कर चुके हैं। सोमनाथ बृहस्पतिवार को बंगलुरू टेक समिट-2022 में आर एंड डी - इनोवेशन फॉर ग्लोबल इंपेक्ट विषय पर बोल रहे थे।
5. इसरो प्रमुख ने बताया कि 100 में से करीब 10 ऐसी कंपनियां हैं, जो सैटेलाइट और रॉकेट विकसित करने में जुटी हैं। इस दौरान उन्होंने चंद्रयान तृतीय की जानकारी देते हुए बताया कि यह जल्द ही लॉन्च किया जाएगा। उन्होंने एक सवाल के जवाब में बताया कि कई अभियान ऐसे हैं, जिनपर इसरो और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
6. अंतरिक्ष तकनीक के जीवन के तमाम क्षेत्रों में उपयोग पर चर्चा करते हुए सोमनाथ कहा, अंतरिक्ष अभियानों के लिए जो तकनीक और नवोन्मेष किए जाते हैं, उनका रोजमर्रा की जिंदगी में भी कई तरह से इस्तेमाल होता है। बहुत से स्टार्ट-अप खासतौर पर इसी पहलु पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इसरो भारत सरकार के स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और स्मार्ट विनिर्माण प्रक्रियाओं का अहम भागीदार है।
7. विक्रम-1 रॉकेक एक दिन के भीतर बनाकर लॉन्च किया जा सकता है। वहीं, विक्रम-2 और 3 को 73 घंटों में बनाकर लॉन्च किया जा सकता है। जबकि, वर्तमान में रॉकेट्स को बनने में कम से कम एक दो महीने का समय लगता है। अगर इसमें भी बहुत जल्दी काम किया जाए तो कम से कम पंद्रह दिन का समय लग जाता है।
8. स्काईरूट एयरोस्पेस के क्षेत्र में अकेली ऐसी कंपनी नहीं है, जो रॉकेट बना रही है। उसके अलावा भी दो और कंपनियां अग्निकुल कॉस्मॉस और बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि स्काईरूट ने पहले अपनेरॉकेट का परीक्षण किया। उसे सफलताभी मिली। बाकी दो कंपनियां भी अपने रॉकेट्स का अलग-अलग स्तर पर परीक्षण कर रही हैं।
9. भारत में निजी कंपनियों ने ये शुरुआत की है। लेकिन दुनियाभर में इन दिनों रॉकेट बनाने वाली दर्जनों कंपनियां हैं। इनमें ब्लू ओरिजन, स्पेसएक्स, अस्त्र स्पेस, फायरफ्लाई एयरोस्पेस, लॉकहीट मार्टिन, वन स्पेस, रॉकेट लैब जैसी कंपनियां शामिल हैं। इनमें भारत की अग्निकुल, बेलाट्रक्स और स्काईरूट का भी नाम है।
10. देश में अंतरिक्ष उद्योग की शुरूआत का मकसद मौसम, खेती, आपदाएं, विकास के बारे में जानकारी देना था। लेकिन अब निजी कंपनियां भी सामने आ रही हैं। इनके साथ मिलकर अगले पांच से दस वर्षों में स्पेस टूरिज्म बढ़ सकता है।