फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Lateral Entry: Parliamentary committee will brainstorm on direct recruitment in government departments

Lateral Entry: सरकारी विभागों में सीधी भर्ती पर मंथन करेगी संसदीय समिति, विरोध के बाद वापस खींचने पड़े थे कदम

Mon, 25 Nov 2024 07:10 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 25 Nov 2024 07:10 AM IST
सार

सरकारी विभागों में प्रमुख पदों को भरने के लिए लेटरल एंट्री यानी सीधी भर्ती के मुद्दे पर उठे विवाद के बाद एक संसदीय समिति इस पर मंथन करेगी। इस मामले में यूपीएससी ने अगस्त में अनुबंध के आधार पर लेटरल एंट्री मोड के माध्यम से भरने के लिए 45 पदों के लिए विज्ञापन दिया था। इसके विरोध में राहुल गांधी ने मोर्चा खोल दिया था, जिसके बाद सरकार को अपना कदम वापस लेना पड़ा था। 

विज्ञापन
Lateral Entry: Parliamentary committee will brainstorm on direct recruitment in government departments
UPSC - फोटो : ANI

विस्तार

सरकारी विभागों में प्रमुख पदों को भरने के लिए लेटरल एंट्री यानी सीधी भर्ती के मुद्दे पर उठे विवाद के बाद एक संसदीय समिति इस पर मंथन करेगी। इस वर्ष के शुरू में इन पदों के लिए आरक्षण का प्रावधान न होने को लेकर सियासत गर्मा गई थी।लोकसभा सचिवालय के मुताबिक, कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्याय विभाग से संबंधित संसद की स्थायी समिति ने 2024-25 में पड़ताल के लिए जो विषय चुने हैं, उनमें सिविल सेवाओं में लेटरल एंट्री भी शामिल है।
विज्ञापन


45 पदों पर दिया था विज्ञापन
गौरतलब है कि इस वर्ष अगस्त में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने 45 पदों के लिए विज्ञापन दिया था, जिन्हें अनुबंध के आधार पर लेटरल एंट्री के माध्यम से भरा जाना था। इनमें से 10 संयुक्त सचिव और 35 निदेशक एवं उप सचिव के पद थे। इस विज्ञापन पर विपक्षी दलों के अलावा एनडीए में शामिल लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) और जनता दल (यूनाइटेड) जैसी सहयोगी पार्टियों ने भी विरोध जताया।
विज्ञापन


इस साल अगस्त में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने अनुबंध के आधार पर लेटरल एंट्री मोड के माध्यम से भरने के लिए 45 पदों के लिए विज्ञापन दिया था, जिसमें संयुक्त सचिवों के 10 और निदेशकों एवं उप सचिवों के 35 पद शामिल थे। इसके विरोध में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मोर्चा खोल दिया था। वहीं मोदी सरकार में शामिल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और जनता दल (यूनाइटेड) जैसी पार्टियां भी इसके विरोध में उतर आई थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


इन नेताओं ने भी की थी आलोचना
इसके अलावा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कई नेताओं ने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) उम्मीदवारों के लिए आरक्षण नहीं होने की सरकार की नीति की आलोचना की थी।  नतीजा ये हुआ कि सरकार को यूपीएससी चेयरपर्सन को पत्र लिखकर लेटरल एंट्री का विज्ञापन रद्द करने के लिए कहना पड़ा। 


'इन नियुक्तियों के लिए वर्तमान में कोई कोटा लागू नहीं'
नौकरशाहों को आमतौर पर सिविल सेवा परीक्षा प्रक्रिया के माध्यम से भर्ती किया जाता है, लेकिन लेटरल प्रवेशकों, जो आमतौर पर किसी विशेष क्षेत्र के विशेषज्ञ होते हैं, को सीमित अवधि के लिए सीधे शामिल किया जाता है। इन नियुक्तियों के लिए वर्तमान में कोई कोटा लागू नहीं है। अब तक 63 नियुक्तियां लेटरल एंट्री के माध्यम से की गई हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed