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SAIL Bokaro Steel Plant: पिछले साल भी लगी थी इसी प्लांट में आग, ऐसे हादसों पर सीनियर अफसरों पर हो कार्रवाई

Sat, 06 Apr 2024 09:21 PM IST
शिव शरण शुक्ला डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 06 Apr 2024 09:21 PM IST
सार

ये पहली बार नहीं है, इसी प्लांट में पिछले साल 30 जून 2023 को भी आग लगी थी, उस दौरान बोकारो स्टील प्लांट की स्टील पिघलने की ईकाई में भीषण आग लग गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक सुरक्षा मानकों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसके चलते लगातार ऐसे हादसे हो रहे हैं। 

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Last year also there was a fire in SAIL Bokaro Steel Plant in jharkhand
SAIL के प्लांट में लगी आग। - फोटो : ANI

विस्तार

गुरुवार सुबह झारखंड के सेल बोकारो स्टील प्लांट में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बोकारो स्टील के हॉटस्ट्रिप प्लांट में अचानक धुआं भर गया। कर्मचारियों और अधिकारियों को जैसे ही खबर मिली कि मीथेन गैस लीक हो सकती है, इसके बाद तुरंत बचाव और राहत कार्य शुरू कर दिया गया। इस हादसे के बाद 23 मजदूरों को आंख में जलन की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि प्लांट के हॉटस्ट्रिप मिल के फर्नेश एरिया में गैस पाइप फट गई, जिसके बाद प्लांट में अफरातफरी मच गई। यह घटना मेंटेनेंस के दौरान लापरवाही की वजह से हुई। लेकिन ये पहली बार नहीं है, इसी प्लांट में पिछले साल 30 जून 2023 को भी आग लगी थी, उस दौरान बोकारो स्टील प्लांट की स्टील पिघलने की ईकाई में भीषण आग लग गई थी। हालांकि यह आग रात को लगी थी, इसलिए उस समय जानमाल का कोई खास नुकसान नहीं हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक सुरक्षा मानकों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसके चलते लगातार ऐसे हादसे हो रहे हैं। 

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पाइप में फंसा था ज्वलनशील कैमिकल
पर्यावरणविद् विनोद तोंगड़ ने बोकारो में हुए हादसे पर अमर उजाला को बताया कि जिस पाइप में मेंटेनेंस वर्क के तहत वेल्डिंग की जा रही थी, उसमें पहले से ही ज्वलनशील कैमिकल फंसा था। वेल्डिंग से निकलने वाले चिंगारी से पाइप लाइन के अंदर नेप्था और सल्फर जमा था, जो ज्वलनशील होता है। उसमें आग पकड़ ली और काफी धुआं निकल आया। अगर डोमेन एक्सपर्ट और फायर सेफ्टी एक्सपर्ट साथ में होता तो गैस लीकेज को रोका जा सकता था। 
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तोंगड़ के अनुसार, औद्योगिक संयंत्रों में सुरक्षा मानकों का ठीक से पालन नहीं किया जा रहा है, जिसके चलते लगातार ऐसे हादसे सामने आ रहे हैं। अगर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) की बात करें, तो कंपनियां फायर डिपार्टमेंट से लाइसेंस और एनओसी तो ले लेती हैं, लेकिन उनका पालन नहीं करती हैं। वहीं फायर डिपार्टमेंट भी कागजी प्रक्रिया पूरा करके उन्हें दस्तावेज तो थमा देता है, लेकिन समय-समय पर संयंत्रों की ठीक ढंग से जांच नहीं करता। इससे कंपनियां लापरवाही बरतने लगती हैं। कारखानों में आग से बचाव के लिए पानी का टैंक, हॉज रील, फायर इक्विपमेंट, बड़े वाहनों के आने-जाने का भरपूर रास्ता होना सबसे जरूरी है, लेकिन यह सिर्फ नियमावली में ही होता है। 
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सभी को कॉस्ट कटिंग की पड़ी है
विनोद तोंगड़ बताते हैं कि हमारे यहां अभी पर उच्च पदों पर बैठे वरिष्ठ अधिकारी एनवायरनमेंट और हेल्थ सेफ्टी जैसे जरूरी विषयों पर ध्यान नहीं देते हैं। उन्हें यह फिजूलखर्ची लगती है। उपकरण पुराने हो जाते हैं, तो कॉस्ट कटिंग करने के लिए उन्हें बदला नहीं जाता या फिर जुगाड़ से काम किया जाता है, जो बहुत ही घातक है। वह कहते हैं कि 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद कुछ दशकों तक तो औद्योगिक संयंत्रों में सुरक्षा मानकों को लेकर काफी सख्ती बरती गई, कानूनों का कड़ाई से पालन कराया गया, लेकिन पिछले एक दशक से कानूनों में ढिलाई बरती जा रही है, उन्हें कंपनियों के दबाव में कमजोर किया जा रहा है। इसका उदाहरण बताते हुए वह कहते हैं कि पहले सीएसआर एक्ट में किसी भी लापरवाही पर वरिष्ठ अधिकारियों पर एफआईआर होती थी, लेकिन नए कानून में उन्हें बचा लिया गया है और अधिनस्थ कर्मचारी उसके घेरे में आ गए हैं। वह कहते हैं कि अगर कोई कंपनी कॉस्ट कटिंग करती भी है, तो उसकी मॉनिटरिंग होनी चाहिए। 

भारत में 2022-23 में हुए बड़े गैस हादसे

  • 01 मई 2023 को लुधियाना के गियासपुरा इलाके में एक रासायनिक संयंत्र में हुए गैस रिसाव में 11 लोगों की मौत हुई। त है।
  • 28 अप्रैल, 2022 को हरियाणा के झज्जर जिले में कत्था बनाने वाली एक फैक्ट्री से हुआ था अमोनिया गैस रिसाव, कोई जानमाल का नुकसान नहीं। 
  • 03 जून, 2023 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के अच्चुतपुरम में प्रयोगशाला में गैस रिसाव के बाद 178 महिला कर्मचारी बीमार पड़ गईं। पोरस लेबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड में लीक हुई जहरीली गैस की चपेट में आने से कर्मचारी बीमार पड़ गए।
  • 8 जून 2022 को मध्यप्रदेश के बालाघाट में एक कुएं में जहरीली गैस के रिसाव से पांच लोगों की मौत हो गई।
  • 3 अगस्त, 2022 को आंध्र के अनाकापल्ले जिले में एक कपड़ा फैक्ट्री में गैस लीक होने से 121 महिला कर्मचारी बीमार हो गईं। 
  • 28 सितंबर, 2022 को ओडिशा के बालासोर जिले में एक झींगा प्रसंस्करण संयंत्र से लीक हुई अमोनिया गैस के कारण 28 कर्मचारी बीमार पड़ गए। गैस के संपर्क में आए कर्मचारियों ने गले, नाक और श्वसन नली में जलन की शिकायत की। घटना में कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।
  • 29 सितंबर, 2022 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक मीट फैक्ट्री में अमोनिया गैस रिसाव की घटना सामने आई थी, जिसमें 50 लोगों को अस्पताल ले जाया गया था।
  • 18 नवंबर, 2022 को हैदराबाद के कस्तूरबा गवर्नमेंट कॉलेज में कॉलेज की लैब में गैस रिसाव के बाद 25 छात्रों ने चक्कर आने की शिकायत की। 
  • 21 नवंबर, 2022 को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में कमलगाजी पेप्सी संयंत्र से अमोनिया गैस रिसाव की सूचना मिली थी, जिसमें कोई घायल या प्रभावित नहीं हुआ था।
  • 25 नवंबर, 2022 को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप में दो स्थानीय निवासी एक बर्फ संयंत्र से लीक हो रही अमोनिया गैस के संपर्क में आने के बाद बीमार पड़ गए।
  • 7 दिसंबर, 2022 को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा जिले में एक नगरपालिका स्विमिंग पूल में क्लोरीन गैस रिसाव के बाद 8 से 14 वर्ष की आयु के दस छात्र बीमार पड़ गए। यह दुर्घटना विजयवाड़ा नगर निगम स्विमिंग पूल में हुई जब बच्चे पूल में स्वीमिंग सीख रहे थे। 

 

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