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12 सालों में 239 ट्रेन दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 80 फीसदी का कारण डिरेलमेंट
amarujala.com: presented by-पूजा मेहरोत्रा
Updated Fri, 24 Nov 2017 01:12 PM IST
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उत्तर प्रदेश में रेल दुर्घटना पहली बार नहीं हुई है। अगर पिछली रेलदुर्घटनाओं पर नजर डालें तो अधिकतर मामले यूपी में ही हुए हैं। वास्को डि गामा एक्सप्रेस का पटरी से उतरना या ट्रेन का उतरना भी पहली घटना नहीं है। उत्तर प्रदेश के मानिकपुर रेलवे स्टेशन के पास शुक्रवार की सुबह वास्को डि गामा- पटना एक्सप्रेस दुर्घटना ग्रस्त हो गई है।
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इस दुर्घटना में तीन लोगों की मौत हो गई वहीं कई लोग घायल हो गए हैं। पहले एक्सीडेंट होते थे तो ये माना जाता था कि इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक नहीं है, तकनीक ठीक नहीं थी लेकिन आज जब सैटेलाइट के द्वारा ट्रैकिंग की जाती है, वॉकीटॉकी हमेशा चलायमान है और रेलवे उच्च तकनीक से लैस है ऐसे समय में रेल दुर्घटना चौंकाती है।
रेल दुर्घटनाओं की बढ़ती घटना के बाद पार्लियामेंट स्टैंडिंग कमीटी ने रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें पता चला था 2003 से 2015 तक करीब 239 दुर्घटनाएं हुईं जिसमें 80 फीसदी मामले ट्रेन के डिरेल होने के कारण हुए थे।
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पढ़ें: वास्को डि गामा एक्सप्रेस पटरी से उतरी, 3 की मौत, मृतकों के परिजनों को 5 लाख का मुआवजा
रेल हर दिन करीब 23 मिलियन यात्रियों को अपनी मंजिल तक पहुंचाती है और लाखों लोग अपनी जान हथेली पर रखकर इस रेल में यात्रा कर रहे हैं। रेलवे अब सुरक्षित नहीं रही है बल्कि हर दिन दुर्घटना का केंद्र बनी हुई है। वैसे तो रेलवे कई बार डिरेल हुई हैं और कई लोगों की जान ले चुकी है।
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रेल दुर्घटनाओं की बढ़ती घटना के बाद पार्लियामेंट स्टैंडिंग कमीटी ने रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें पता चला था 2003 से 2015 तक करीब 239 दुर्घटनाएं हुईं जिसमें 80 फीसदी मामले ट्रेन के डिरेल होने के कारण हुए थे।
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रेल हर दिन करीब 23 मिलियन यात्रियों को अपनी मंजिल तक पहुंचाती है और लाखों लोग अपनी जान हथेली पर रखकर इस रेल में यात्रा कर रहे हैं। रेलवे अब सुरक्षित नहीं रही है बल्कि हर दिन दुर्घटना का केंद्र बनी हुई है। वैसे तो रेलवे कई बार डिरेल हुई हैं और कई लोगों की जान ले चुकी है।
कब कहां हुई रेल दुर्घटनाएं
19 अगस्त 2017 को कलिंगा उत्कल एक्सप्रेस की 14 कोच डिरेल हो गया था जिसमें 23 लोग मारे गए थे और 150 से अधिक लोग घायल हो गए थे। और इन्क्वायरी से पता चला था कि इंसपेक्टर प्रदीप कुमार रिस्पांसिबल हैं।
22 जनवरी 2017: में आंध्र प्रदेश के विजिनाग्राम जिले में जगदलपुर- भुवनेश्वर एक्सप्रेस के 7 डिब्बे डिरेल हो गए थे, जिसमें करीब 32 लोग मारे गए थे जबकि 50 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
20 नवंबर 2016: कानपुर देहात के इंदौर पटना एक्सप्रेस के 14 कोच डिरेल होने के बाद करीब 142 लोग मारे गए थे जबकि 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। ये रेल दुर्घटना भी उत्तर प्रदेश में ही हुई थी।
20 मार्च 2015: देहरादून वाराणसी जनता एक्सप्रेस रेल दुर्घटना भी उत्तर प्रदेश के बच्छरवन में हुई थी। इसमें करीब 38 लोग मारे गए थे जबकि 150 से अधिक लोग घायल हुए थे.
26 मई 2014: में हुई गोरखधाम एक्सप्रेस रेल दुर्घटना में करीब 22 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। ये दुर्घटना बड़ी मानवीय भूल थी, क्योंकि सेम ट्रैक पर माल गाड़ी आ गई थी। मामला खलिलाबाद स्टेशन के पास उत्तर प्रदेश में ही हुआ था। इस रेल दुर्घटना में भी करीब 50 से अधिक लोग घायल हुए थे।
मई 4, 2014: महाराष्ट्र के सवांटवादी पैसेंजर ट्रेन डिरेल हुई थी जिसमें करीब 20 लोग मारे गए थे और 100 लोग घायल हुए थे। ये घटना दिवा जंक्शन के पास हुई थी।
28 दिसंबर 2013: अनंतपुर जिले में बंगलोर नंदन एक्सप्रेस ट्रेन में एसी थ्री टीयर कोच में आग लगने से करीब 26 लोग मारे गए थे जबकि B1 कोच पूरी तरह से आग में जल गया था।
30 सितंबर 2012: दिल्ली चैन्ने तमिल नाडु एक्सप्रेस में आंध्रप्रदेश के नेल्लोर में आग लगने से करीब 35 लोग जिंदा जल गए थे जबकि 25 लोग घायल हो गए थे।
28 मई, 2010: 148 लोग ग्यानेश्वरी एक्सप्रेस ट्रेन एक्सीडेंट में मारे गए थे।
22 जनवरी 2017: में आंध्र प्रदेश के विजिनाग्राम जिले में जगदलपुर- भुवनेश्वर एक्सप्रेस के 7 डिब्बे डिरेल हो गए थे, जिसमें करीब 32 लोग मारे गए थे जबकि 50 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
20 नवंबर 2016: कानपुर देहात के इंदौर पटना एक्सप्रेस के 14 कोच डिरेल होने के बाद करीब 142 लोग मारे गए थे जबकि 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। ये रेल दुर्घटना भी उत्तर प्रदेश में ही हुई थी।
20 मार्च 2015: देहरादून वाराणसी जनता एक्सप्रेस रेल दुर्घटना भी उत्तर प्रदेश के बच्छरवन में हुई थी। इसमें करीब 38 लोग मारे गए थे जबकि 150 से अधिक लोग घायल हुए थे.
26 मई 2014: में हुई गोरखधाम एक्सप्रेस रेल दुर्घटना में करीब 22 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। ये दुर्घटना बड़ी मानवीय भूल थी, क्योंकि सेम ट्रैक पर माल गाड़ी आ गई थी। मामला खलिलाबाद स्टेशन के पास उत्तर प्रदेश में ही हुआ था। इस रेल दुर्घटना में भी करीब 50 से अधिक लोग घायल हुए थे।
मई 4, 2014: महाराष्ट्र के सवांटवादी पैसेंजर ट्रेन डिरेल हुई थी जिसमें करीब 20 लोग मारे गए थे और 100 लोग घायल हुए थे। ये घटना दिवा जंक्शन के पास हुई थी।
28 दिसंबर 2013: अनंतपुर जिले में बंगलोर नंदन एक्सप्रेस ट्रेन में एसी थ्री टीयर कोच में आग लगने से करीब 26 लोग मारे गए थे जबकि B1 कोच पूरी तरह से आग में जल गया था।
30 सितंबर 2012: दिल्ली चैन्ने तमिल नाडु एक्सप्रेस में आंध्रप्रदेश के नेल्लोर में आग लगने से करीब 35 लोग जिंदा जल गए थे जबकि 25 लोग घायल हो गए थे।
28 मई, 2010: 148 लोग ग्यानेश्वरी एक्सप्रेस ट्रेन एक्सीडेंट में मारे गए थे।