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लखीमपुर हिंसा मामला: गवाहों की गैरहाजिरी पर सुप्रीम कोर्ट नाराज; ट्रायल कोर्ट को दिए ये निर्देश, जानें सबकुछ

Fri, 08 May 2026 12:11 PM IST
रिया दुबे पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Fri, 08 May 2026 12:11 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई में देरी और गवाहों की गैरहाजिरी पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि पिछले करीब दो महीनों से किसी भी गवाह की गवाही नहीं हुई है। आइए विस्तार से जानते हैं। 

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Lakhimpur violence case: Supreme Court displeased with the absence of witnesses
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के चर्चित लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई में हो रही देरी पर शुक्रवार को गंभीर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि पिछले करीब दो महीनों से ट्रायल में किसी भी गवाह की गवाही नहीं हो सकी है, जबकि मामला बेहद संवेदनशील और गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस पर जवाब मांगा और ट्रायल कोर्ट को गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए कहा कि रिपोर्ट में यह तक नहीं बताया गया कि गवाह अदालत में पेश क्यों नहीं हो रहे हैं।

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कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को क्या निर्देश दिए?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल में लगातार देरी न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के पीठासीन न्यायाधीश को निर्देश दिया कि गवाहों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए कानून के तहत जरूरी कदम उठाए जाएं। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि मामले की सुनवाई समयबद्ध तरीके से पूरी करने का प्रयास किया जाए और ट्रायल की प्रगति पर नई स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाए।

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क्या है मामला?

यह मामला 3 अक्तूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया क्षेत्र में हुई हिंसा से जुड़ा है। उस दिन किसान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे का विरोध कर रहे थे। आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे किसानों पर एक एसयूवी वाहन चढ़ा दिया गया, जिसमें चार किसानों की मौत हो गई थी।


इस घटना के बाद इलाके में हिंसा भड़क गई थी। गुस्साए किसानों द्वारा वाहन चालक और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हुई थी। इस तरह पूरे घटनाक्रम में कुल आठ लोगों की जान गई थी।


मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी हैं। जांच के बाद दिसंबर 2023 में ट्रायल कोर्ट ने आशीष मिश्रा और 12 अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। इसके बाद मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई थी।



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