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सुधारों का मतलब श्रम कानूनों को पूरी तरह समाप्त करना नहीं: नीति आयोग

Sun, 24 May 2020 06:16 PM IST
Rajeev Rai पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Sun, 24 May 2020 06:16 PM IST
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Labour reforms do not mean abolition of labour laws says Niti Aayog VC
श्रम कानून - फोटो : social media

कोरोना महामारी और लॉकडाउन के बीच एक तरफ जहां मजदूरों का पलायन जारी है, वहीं देशभर में राज्य सरकारें श्रम कानूनों में बदलाव करने की तैयारी में हैं। इसे लेकर कई तरह के सवाल भी उठने लगे हैं और विभिन्न हलकों में चिंता भी जताई जा रही है, साथ ही कई जगहों पर अब इन बदलावों के खिलाफ विरोध प्रदर्शंन भी शुरू हो गए हैॆ। ऐसे में अब नीति आयोग ने इस बारे में चीजों को स्पष्ट करने का प्रयास करते हुए कहा है कि सरकार श्रमिकों के हितों का संरक्षण करने को प्रतिबद्ध है।

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नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि सुधारों का मतबल श्रम कानूनों को पूरी तरह समाप्त करना नहीं है। हाल के सप्ताहों में उत्तर प्रदेश और गुजरात सहित विभिन्न राज्य सरकारों ने मौजूदा श्रम कानूनों में या तो संशोधन किया है या संशोधन का प्रस्ताव किया है। कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लागू प्रतिबंधों की वजह से उद्योग जगत बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उद्योग और कंपनियों को राहत के लिए राज्य सरकारों द्वारा यह कदम उठाया गया है।
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कुमार ने कहा, ‘मेरे संज्ञान में अभी आया है कि केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने अपने रुख को सख्त करते हुए राज्यों को स्पष्ट किया है कि वे श्रम कानूनों को समाप्त नहीं कर सकते हैं, क्योंकि भारत अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) में हस्ताक्षर करने वाले देशों में है।’ उन्होंने कहा कि ऐसे में स्पष्ट है कि केंद्र सरकार का मानना है कि श्रम कानूनों में सुधार से मतलब श्रम कानूनों को समाप्त करने से नहीं है। सरकार श्रमिकों के हितों का संरक्षण करने को प्रतिबद्ध है। उनसे पूछा गया था कि क्या उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों द्वारा श्रम सुधार श्रमिकों के लिए किसी तरह का सुरक्षा जाल बनाए बिना किए जा सकते हैं।
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उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल में एक अध्यादेश के जरिये विभिन्न उद्योगों को तीन साल तक कुछ निश्चित श्रम कानूनों से छूट दी है। कोरोना वायरस की वजह से प्रभावित आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। मध्य प्रदेश सरकार ने भी राष्ट्रव्यापी बंद के बीच आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन के लिए कुछ श्रम कानूनों में बदलाव किया है। कुछ और राज्य भी इसी तरह का कदम उठाने जा रहे हैं। 

देश की वृहद आर्थिक स्थिति पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि शेष दुनिया की तरह भारत भी कोविड-19 के प्रतिकूल प्रभाव से जूझ रहा है। इस महामारी की वजह से चालू वित्त वर्ष के पहले दो माह के दौरान आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। 
 

जीडीपी में नकारात्मक वृद्धि का अभी अनुमान नहीं लगाया जा सकता

रिजर्व बैंक ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर नकारात्मक रहेगी। इस पर राजीव कुमार ने कहा कि नकारात्मक वृद्धि का अभी पूरी तरह अनुमान नहीं लगाया जा सकता। अभी घरेलू और वैश्विक मोर्चे पर बहुत सी चीजें ‘अज्ञात’ हैं।

कुमार ने कहा कि सरकार के 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का मकसद सिर्फ उपभोक्ता मांग नहीं, बल्कि कुल मांग में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ने प्रणाली में नकदी बढ़ाने के कई उपाय किए हैं। वित्त मंत्री भी बैंकों को ऋण का प्रवाह बढ़ाने को प्रोत्साहित कर रही हैं। इससे अर्थव्यवस्था की कुल मांग बढ़ाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि अब महत्वपूर्ण यह है कि वित्तीय क्षेत्र विशेष रूप से बैंक जोखिम उठाने से बचें नहीं और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) सहित अन्य क्षेत्रों को ऋण का प्रवाह बढ़ाएं। यदि ऐसा होता है तो मांग पैदा होगी और हम देश में आर्थिक गतिविधियों में सुधार देखेंगे।

यह पूछे जाने पर कि क्या रिजर्व बैंक को घाटे का मौद्रिकरण करना चाहिए, कुमार ने कहा कि कि सरकार प्रोत्साहन पैकेज के वित्तपोषण को सभी संभावित विकल्पों पर विचार कर रही है। इस संभावना कि चीन से बाहर निकलने वाली कंपनियां भारत का रुख कर सकती हैं, कुमार ने कहा कि यदि हम कंपनियों को लक्ष्य करने के लिए सही नीतियां लाते हैं, तो मुझे कोई वजह नजर नहीं आती कि ये कंपनियां भारत नहीं आएं।

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