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आम आदमी पार्टी का लोकतंत्र बन गए हैं कुमार विश्वास
amarujala.com- शशिधर पाठक
Updated Tue, 02 May 2017 04:51 PM IST
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कुमार विश्वास
- फोटो : SELF
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दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के लिए कुमार विश्वास गले की हड्डी बन गए हैं। कुमार विश्वास न तो केजरीवाल से निगले जा रहे हैं और न ही उगले जा रहे हैं। ऐसे में केजरीवाल के पास डैमेज कंट्रोल के लिए केवल कुमार विश्वास को मनाने के लिए हर तरीका अपनाने का ही चारा है। वहीं उच्चपदस्थ सूत्र बताते हैं कि कुमार विश्वास आम आदमी पार्टी के लोकतंत्र का केन्द्र बन गए हैं।
पार्टी के विधायक सूत्र के अनुसार जिस दिन कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड किया था, उसी दिन उन्होंने विश्वास को फोन किया था। पार्टी की अंदरुनी स्थिति पर पार्टी के संस्थापक नेता से चर्चा की थी। आम आदमी पार्टी के दक्षिणी दिल्ली के एक अन्य विधायक का कहना है कि इस समय पार्टी के अधिकांश विधायक और नेता कुमार विश्वास के संपर्क में हैं।
यही स्थिति पार्टी के कार्यकर्ताओं की भी है। एचसीएल की नौकरी छोडक़र आम आदमी पार्टी के साथ जुडऩे वाले सूत्र के मुताबिक एमसीडी चुनाव में जिस तरह से टिकट का वितरण हुआ, प्रचार की रणनीति बनी उससे पार्टी के भीतर काफी गुस्सा है। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ता कुमार विश्वास के सामने लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
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पार्टी के विधायक सूत्र के अनुसार जिस दिन कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड किया था, उसी दिन उन्होंने विश्वास को फोन किया था। पार्टी की अंदरुनी स्थिति पर पार्टी के संस्थापक नेता से चर्चा की थी। आम आदमी पार्टी के दक्षिणी दिल्ली के एक अन्य विधायक का कहना है कि इस समय पार्टी के अधिकांश विधायक और नेता कुमार विश्वास के संपर्क में हैं।
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यही स्थिति पार्टी के कार्यकर्ताओं की भी है। एचसीएल की नौकरी छोडक़र आम आदमी पार्टी के साथ जुडऩे वाले सूत्र के मुताबिक एमसीडी चुनाव में जिस तरह से टिकट का वितरण हुआ, प्रचार की रणनीति बनी उससे पार्टी के भीतर काफी गुस्सा है। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ता कुमार विश्वास के सामने लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
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कुमार विश्वास के खफा होने की असली वजह
कुमार विश्वास
- फोटो : AmarUjala
क्यों खफा हैं कुमार विश्वास
कुमार विश्वास कवि हैं। अपनी कविता के स्टेज शो से अच्छी आय अर्जित करके अच्छा जीवन जीते हैं, लेकिन इसके साथ आम आदमी पार्टी के संस्थापक नेताओं में से हैं, लेकिन अरविंद केजरीवाल के इर्द-गिर्द कस रहे घेरे से उन्हें काफी नाराजगी है। इसी कोटरी ने कुमार विश्वास को 2014 के लोकसभा चुनाव तथा दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 के बाद से कुमार विश्वास को हाशिए पर रखा है
पंजाब और गोवा के चुनाव प्रचार की रणनीति बनाने, स्टार प्रचारक के तौर पर कुमार विश्वास का इस्तेमाल करने आदि से पार्टी ने परहेज किया था। इसी तरह से दिल्ली एमसीडी चुनाव में भी कुमार विश्वास से संपर्क नहीं किया गया। ऐसे में कुमार विश्वास खफा हैं। विश्वास दावा भी करते हैं कि वह आम आदमी पार्टी के उन नेताओं में हैं जो दिल्ली सचिवालय नहीं जाते, सरकारी चाय नहीं पीते, गाड़ी का इस्तेमाल नहीं करते और कोई फायदा नहीं उठाते।
विरोधी भी सक्रिय
कुमार विश्वास के विरोधी कुमार की नाराजगी को दो हवा देने में जुट गए हैं। मीडिया से राजनीति में आए आम आदमी पार्टी के एक नेता का कहना है कि राज्यसभा में जाने का रोग बहुत खराब है। वहीं पार्टी के एक अन्य नेता का कहना है कि कुमार विश्वास लगातार भाजपा के संपर्क में हैं।
कुमार विश्वास कवि हैं। अपनी कविता के स्टेज शो से अच्छी आय अर्जित करके अच्छा जीवन जीते हैं, लेकिन इसके साथ आम आदमी पार्टी के संस्थापक नेताओं में से हैं, लेकिन अरविंद केजरीवाल के इर्द-गिर्द कस रहे घेरे से उन्हें काफी नाराजगी है। इसी कोटरी ने कुमार विश्वास को 2014 के लोकसभा चुनाव तथा दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 के बाद से कुमार विश्वास को हाशिए पर रखा है
पंजाब और गोवा के चुनाव प्रचार की रणनीति बनाने, स्टार प्रचारक के तौर पर कुमार विश्वास का इस्तेमाल करने आदि से पार्टी ने परहेज किया था। इसी तरह से दिल्ली एमसीडी चुनाव में भी कुमार विश्वास से संपर्क नहीं किया गया। ऐसे में कुमार विश्वास खफा हैं। विश्वास दावा भी करते हैं कि वह आम आदमी पार्टी के उन नेताओं में हैं जो दिल्ली सचिवालय नहीं जाते, सरकारी चाय नहीं पीते, गाड़ी का इस्तेमाल नहीं करते और कोई फायदा नहीं उठाते।
विरोधी भी सक्रिय
कुमार विश्वास के विरोधी कुमार की नाराजगी को दो हवा देने में जुट गए हैं। मीडिया से राजनीति में आए आम आदमी पार्टी के एक नेता का कहना है कि राज्यसभा में जाने का रोग बहुत खराब है। वहीं पार्टी के एक अन्य नेता का कहना है कि कुमार विश्वास लगातार भाजपा के संपर्क में हैं।
काफी नहीं है अरविंद का मरहम
अरविंद केजरीवाल
अमानतुल्लाह ने दी हवा
पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने भी इसी तरह की सोच को हवा दे दी। अमानतुल्लाह खान ने कहा कि कुमारर विश्वास पार्टी का संयोजक बनकर उसे हड़पना चाहते हैं। वह भाजपा के संपर्क में हैं। अमानतुल्लाह खान ने कुमार विश्वास द्वारा पार्टी की हार के पीछे ईवीएम की बजाय कारणों के जिम्मेदार होने की बात कही थी। वहीं कुमार विश्वास अब बहुत सध कर चल रहे हैं।
काफी नहीं है अरविंद का मरहम
बात निकली है तो दूर तलक जाएगी। कुमार विश्वास और केजरीवाल की दूरी इतनी आसानी से मिटने वाली नहीं है। हालांकि अरविंद केजरीवाल ने कुमार विश्वास को अपना छोटा भाई बताया है। ट्वीट करके केजरीवाल ने पार्टी के लोगों को इसका एहसास कराते हुए इसे न टूटने वाला संबंध बताया है, लेकिन पार्टी के अंदरखाने में चल रही गतिविधियां कुछ और ही चुगली कर रही हैं।
प्रशांत भूषण नहीं है विश्वास
कुमार विश्वास कोई प्रशांत भूषण, प्रो. आनंद कुमार, योगेन्द्र यादव नहीं है। पार्टी की शुरुआती दौर से अभी तक साथ निभाने वाले कार्यकर्ता आज भी मानते हैं कि योगेन्द्र यादव ने कोई गलत बात हीं उठाई थी। उनका कहना है कि योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण का तरीका और समय दोनों गलत था। तब भी टिकट बंटवारा, पार्टी का आंतरिक लोकतंत्र, संवाद यही सब मुद्दा था। सूत्र का कहना है कि यही सवाल कुमार विश्वास ने भी उठाया है, लेकिन कुमार विश्वास का तरीका और समय दोनों सही है। वह वही कहना चाह रहे हैं जो पार्टी के अधिकांश कार्यकर्ता और नेता महसूस कर रहे हैं।
पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने भी इसी तरह की सोच को हवा दे दी। अमानतुल्लाह खान ने कहा कि कुमारर विश्वास पार्टी का संयोजक बनकर उसे हड़पना चाहते हैं। वह भाजपा के संपर्क में हैं। अमानतुल्लाह खान ने कुमार विश्वास द्वारा पार्टी की हार के पीछे ईवीएम की बजाय कारणों के जिम्मेदार होने की बात कही थी। वहीं कुमार विश्वास अब बहुत सध कर चल रहे हैं।
काफी नहीं है अरविंद का मरहम
बात निकली है तो दूर तलक जाएगी। कुमार विश्वास और केजरीवाल की दूरी इतनी आसानी से मिटने वाली नहीं है। हालांकि अरविंद केजरीवाल ने कुमार विश्वास को अपना छोटा भाई बताया है। ट्वीट करके केजरीवाल ने पार्टी के लोगों को इसका एहसास कराते हुए इसे न टूटने वाला संबंध बताया है, लेकिन पार्टी के अंदरखाने में चल रही गतिविधियां कुछ और ही चुगली कर रही हैं।
प्रशांत भूषण नहीं है विश्वास
कुमार विश्वास कोई प्रशांत भूषण, प्रो. आनंद कुमार, योगेन्द्र यादव नहीं है। पार्टी की शुरुआती दौर से अभी तक साथ निभाने वाले कार्यकर्ता आज भी मानते हैं कि योगेन्द्र यादव ने कोई गलत बात हीं उठाई थी। उनका कहना है कि योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण का तरीका और समय दोनों गलत था। तब भी टिकट बंटवारा, पार्टी का आंतरिक लोकतंत्र, संवाद यही सब मुद्दा था। सूत्र का कहना है कि यही सवाल कुमार विश्वास ने भी उठाया है, लेकिन कुमार विश्वास का तरीका और समय दोनों सही है। वह वही कहना चाह रहे हैं जो पार्टी के अधिकांश कार्यकर्ता और नेता महसूस कर रहे हैं।