वो पांच कारण जिसकी वजह से मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करना चाहता है भारत
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पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर एक बार फिर वैश्विक आतंकी घोषित होने से बच गया है। उसे वैश्विक आतंकी घोषित करने की भारत की कोशिश पर चीन ने एक बार फिर पानी फेर दिया। यह चौथी है जब भारत की कोशिश को चीन ने अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल करके विफल किया है। चीन के अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के चार स्थायी सदस्यों अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस ने उसे वैश्विक आतंकी घोषित करने की राह में भारत का समर्थन किया था। जबकि चीन हमेशा से ही इसका विरोध करता आया है। आईए आज आपको वो पांच कारण बताते हैं जिसकी वजह से भारत मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करना चाहता है...
- मसूद अजहर को अगर यूएनएससी वैश्विक आतंकवादी घोषित कर देता होता तो यह भारत के लिए मजबूत राजनीतिक संकेत होता कि पाकिस्तान आतंकी को अपनी शरण में पाल रहा था। इसके साथ ही इसे भारत की अहम कूटनीतिक जीत के रूप में भी देखा जाता और इससे विश्व मंच पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने में मदद मिलती।
- इससे पाकिस्तान में मौजूद अन्य आतंकी संगठनों को एक कड़ा संदेश देने में मदद मिलती। साथ ही पाकिस्तानी सेना को भारत के खिलाफ अपनी रणनीति के बारे में पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ता।
- मसूद अजहर को वैश्विक आंतकी सूची में डालने का मतलब होता कि उसके कहीं आने-जाने पर पाबंदी लग जाती। साथ ही उसकी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया जाता। इससे पाकिस्तान को एक आतंकी फैक्टरी के रूप में स्थापित करने में भी सहायता मिलती। क्योंकि जैश के अलावा पाक में कई आतंकी संगठन सक्रीय हैं।
- मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने से भारत को अपना कद बढ़ाने में काफी मदद मिलती। बता दें कि चीन एशिया में अपना प्रभुत्व जमाने के लिए भारत के उदय को विफल बनाने में पाकिस्तान का ऐतिहासिक इस्तेमाल किया है। इससे भारत को पड़ोसी कूटनीति को नया रूप देने में मदद मिलती।
- अगर बीजिंग ने मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने में अड़ंगा नहीं लगाया होता तो यह चीन की व्यावहारिकता को अपनी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में स्थापित करने और भारत-चीन संबंधों को मजबूत बनाने में मदद करता। बता दें कि 2017 में दोकलम में सीमा विवाद को लेकर 73 दिनों तक भारत और चीन के बीच गतिरोध बना रहा था। जो अब धीरे-धीरे बदल रहा है।
जानिए क्या है वीटो?
वीटो, लैटिन भाषा के शब्द वीटे (Veto) से बना है। जिसका मतलब है किसी चीज की अनुमति ना देना। जैसा कि चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में किया है। इस शक्ति का इस्तेमाल प्राचीन रोम में किया जाता था। वहां कुछ निर्वाचित अधिकारियों के पास ये शक्ति थी, जिसकी मदद से वे रोम सरकार की किसी भी कार्रवाई को रोक सकते थे। उस वक्त इसका इस्तेमाल किसी चीज को रोकने के लिए किया जाता था।
किन देशों के पास है वीटो पावर?
वर्तमान समय में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्यों के पास वीटो की शक्ति है। ये पांच देश चीन, फ्रांस, अमेरिका, रूस और ब्रिटेन हैं। वीटो पावर किसी भी फैसले में बेहद अहम भूमिका निभाता है। अगर इन सभी सदस्यों में से कोई एक सदस्य भी किसी फैसले पर रोक लगा दे तो उस फैसले को ही रोक दिया जाता है।