अमर उजाला विशेष: तो इन वजहों से कम हुए उत्तर भारत में कोरोना के मामले
उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों ने बनाई थी विशेष रणनीति। कांटेक्ट ट्रेसिंग के साथ-साथ माइक्रो कंटेंमेंट जोन बनाकर पाया कोरोना पर काबू।
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देश और दुनिया में इन दिनों उत्तर भारत के राज्यों में कोरोना नियंत्रण को लेकर तारीफ की जा रही है। दरअसल बेहतर मैनेजमेंट और आपसी सामंजस्य की वजह से उत्तर भारत के राज्यों में न सिर्फ कोरोना के संक्रमण प्रसार में गिरावट दर्ज हुई बल्कि अनलॉक प्रक्रिया के बाद में भी मामले में बढ़ोतरी फिलहाल नहीं देखी जा रही है। उत्तर भारत के राज्यों में कोरोना नियंत्रण के लिए तैयार की गई कमेटियों के प्रमुखों का कहना है कि कांटेक्ट ट्रेसिंग से लेकर माइक्रोकंटेंमेंट जोन और समय पर लॉक डाउन की प्रक्रिया को अपनाकर कोरोना संक्रमण को नियंत्रित किया गया।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दक्षिण भारत के राज्यों को भी ऐसे ही तरीके अपनाकर मामलों को वक्त रहते नियंत्रण करने की सलाह दी है। उत्तर भारत के राज्यों खासकर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में दूसरी लहर के दौरान हजारों मामले रोजाना सामने आ रहे थे। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक राज्य में वक्त पर लॉकडाउन की प्रक्रिया अपनाई गई और उसके साथ साथ ज्यादा से ज्यादा लोगों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की गई। के आधार पर ही लोगों की ज्यादा से ज्यादा जांच हुई और माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाकर कोरोना के संक्रमण प्रसार को रोका गया। अप्रैल और मई के महीने में पीक पर रहने वाले मामले जून आते-आते कम होने लगे।
उत्तर प्रदेश के चिकित्सा मंत्री सुरेश खन्ना कहते हैं कि पूरे देश में आबादी के लिहाज से उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। इस लिहाज से उनके लिए चुनौतियां भी बहुत ज्यादा थी। सुरेश खन्ना का कहना है इतनी बड़ी आबादी में बेहतर प्रबंधन ही कोरोना के नियंत्रण सबसे बड़ा कारण रहा। उनके मुताबिक पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा लोगों की जांच की गई। इन जांचों के आधार पर शहरों से लेकर तहसील और कस्बों से लेकर गांव-गांव में कंटेनमेंट जोन बनाए गए। वह कहते हैं पुलिस और प्रशासन समेत अन्य जिम्मेदार महकमे और जिम्मेदार लोगों ने लॉकडाउन के दौरान कोरोना से बचाव का संयमित व्यवहार किया। इसके अलावा प्रदेश में लोगों में टीका लगवाने पर ज्यादा से ज्यादा जोर दिया गया और अधिक संख्या में लोगों को रोजाना टीके लगाए जाते रहे।
पंजाब हरियाणा और चंडीगढ़ में भी अचानक मामले बढ़ने शुरू हुए तो इन राज्यो में लंबा लॉकडाउन लगा दिया। पंजाब के स्वास्थ्य विभाग में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को कोरोना को नियंत्रण करने के लिए अपनाए गए उपायों के बारे में भेजी गई रिपोर्ट में कहा है दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को रोकने की वजह से कोरोना संक्रमण का प्रसार इतना ज्यादा नहीं हुआ। इसके अलावा लॉकडाउन की प्रक्रिया ने कोरोना के बढ़ रहे मामलों की चेन को तोड़ा। इसी तरह चंडीगढ़ प्रशासन के स्वास्थ्य विभाग ने भी छोटे-छोटे टसेक्टर्स में माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाकर कोरोना संक्रमण की रफ्तार को कम किया।
उत्तर भारत के इन राज्यों के अलावा भी दूसरे राज्यों ने कोरोना की रफ्तार को कम करने के लिए कई तरह के उपाय किए। अब जब दक्षिण भारत के राज्यों समेत महाराष्ट्र आसाम और उड़ीसा में कोरोना के मामले कम नहीं हो रहे हैं तो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन राज्यों को उत्तर भारत के राज्यों में अपनाए गए उपायों को अपनाने के लिए कहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक पहली लहर में चेन्नई ने लॉकडाउन की प्रक्रिया में ढील देने के बाद भी बेहतर प्रबंधन से कोरोना की मामलों को ना सिर्फ रोका था बल्कि उसके प्रसार को भी बहुत हद तक नियंत्रित किया था। इससे सीख लेते हुए भी कोविड नियंत्रित किया जा सकता है।
महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मामले सामने आते रहे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों में आज भी महाराष्ट्र में मामलो की संख्या पूरे देश में दूसरे नंबर पर है। जबकि पहले नंबर पर केरल है। चूंकि पूरे देश में आने वाले पॉजिटिव मरीजों की संख्या के 50 फ़ीसदी मरीज इन दो राज्यों से हैं। इसलिए उत्तर भारत के राज्यों में कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने की रणनीति को अपनाने के लिए दोनों राज्यों को सिफारिश भी की गई है। दरअसल आईसीएमआर और कोविड टास्क फोर्स ने इस बात पर चिंता जताई है कि अगर देश में मामले चालीस से पचास हजार के बीच में बने रहे तो संक्रमण का प्रसार एक बार फिर से तेजी से हो सकता है। इसलिए इस संख्या को हर हाल में न सिर्फ बढ़ने से रोकना होगा बल्कि काम भी करना होगा।