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इस साल अच्छी बारिश के आसार, जानिए कैसे की जाती है मानसून की भविष्यवाणी

Tue, 17 Apr 2018 03:04 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 17 Apr 2018 03:04 PM IST
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know what is the procedure to know about the future of weather

कृषि क्षेत्र और देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी बारिश होना बहुत जरूरी है। अभी सोमवार को ही मौसम विभाग ने इस साल अच्छी बारिश होने की संभावना भी जताई है। विभाग के मुताबिक मानसून की लंबी अवधि (एलपीए) का औसत इस बार 97 फीसदी रहेगा। यानि जून से सितंबर की अवधि के बीच मानसून सामान्य रहने की संभावना है। लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि देश में मौसम का पूर्वानुमान कैसे लगाया जाता है। इसके लिए कौन से पैटर्न और मॉडल की स्टडी की जाती है। चलिए आपको बताते हैं कि कैसे पता लगता है कि बारिश अच्छी होगी या नहीं।

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मौसम विभाग के डायरेक्टर केजे रमेश के मुताबिक मानसून की भविष्यवाणी तीन अहम बिंदुओं पर की जाती है। इसमें पिछले 100 वर्षों का ट्रेंड देखा जाता है। विभाग का एक डायनामिक मॉडल होता है जिसका काम हर सेकेंड दुनिया भर के पूर्वानुमान का पता लगाना होता है। यह अगले 9 महीने के मौसम का पूर्वानुमान बताते हैं। इसके अलावा दुनिया भर के 31 अन्य मॉडल्स का भी विशलेषण किया जाता है। इन सभी के आधार पर मानसून का पूर्वानुमान लगाया जाता है। 
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अप्रैल में ही क्यों लगता है मानसून का अनुमान

हमेशा अप्रैल में ही मानसून का अनुमान पता चलने के पीछे भी एक प्रक्रिया होती है। इसमें सबसे पहले डायनामिक मॉडल के जरिए अक्टूबर में पता चलता है कि मानसून कैसा रहेगा। फिर जनवरी में यह जानकारी और भी सटीक हो जाती है। इसके बाद यह जानकारी अप्रैल में थोड़ी और सटीक हो जाती है। इसलिए अप्रैल में ही मानसून संबंधित जानकारी दी जाती है जिसके बाद 15 मई तक मानसून की दिशा तय हो जाती है। 

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प्रशांत महासागर के तापमान का असर भारत की बारिश पर

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प्रशांत महासागर के तापमान का असर सीधा भारत के मानसून पर पड़ता है। अगर प्रशांत महासागर की सतह का तापमान बढ़ने लगता है तो नमी भी बढ़ती है। जिस कारण प्रशांत महासागर में अधिक बारिश होती है। जिसका सीधा असर भारत के मानसून पर पड़ता है और यहां कम बारिश होती है। वहीं अगर प्रशांत महासागर का तापमान कम होता है तो वहां नमी भी कम हो जाती है। जिस कारण वहां कम बारिश होती है और भारत का मानसून अच्छा रहता है।

ये अनुमान बताते हैं कि भारत में कैसा होगा मानसून

भारत में मानसून की जानकारी इन अनुमानों द्वारा तय की जाती है। इसमें दिसंबर-जनवरी के बीच उत्तरी अटलांटिक और उत्तरी प्रशांत महासागर के तापमान में अंतर का अनुमान लगाया जाता है। इसके बाद फरवरी में दक्षिण भारतीय समुद्री सतह के तापमान की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है। फिर फरवरी-मार्च के दौरान पूर्वी एशिया के समुद्र में दबाव की स्थिति का अनुमान लगता है। इसके बाद जनवरी में उत्तर-पूर्वी यूरोप की जमीनी सतह का अनुमान लगाया जाता है। इसके अलावा फरवरी-मार्च के दौरान भूमध्यरेखा पर प्रशांत महासागर के तापमान की स्थिति का पता लगाया जाता है। 

उल्लेखनीय है कि मौसम विभाग ने लगातार तीसरे साल सामान्य मानसून का अनुमान जारी किया है। इस पर विभाग के डायरेक्टर जनरल केजे रमेश ने बताया कि प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान 2-3 डिग्री सेल्सियस कम रहने की आशा है, जिस कारण ला-नीनो बनेगा और यह भारत में मानसून के लिए उपयोगी साबित होगा।  

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