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भाजपा को किसान सम्मान योजना के सहारे सत्ता में वापसी की उम्मीद

Sun, 24 Feb 2019 04:07 PM IST
Amit Digital Amit Digital
Updated Sun, 24 Feb 2019 04:07 PM IST
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kisan samman nidhi yojna is trump card of Narendra Modi government before Lok sabha Election 2019
नरेंद्र मोदी - फोटो : ANI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पूर्वांचल के गोरखपुर जिले से किसान सम्मान योजना की शुरुआत कर दी। इसके तहत पांच एकड़ से कम भूमि वाले किसानों को प्रति वर्ष छह हजार रुपये दिए जाएंगे। माना जा रहा है कि यह योजना केंद्र सरकार की सत्ता में वापसी के द्वार खोल सकती है। इसका कारण यह है कि अब तक जिन चुनावी राज्यों में किसानों के लिए कर्जमाफी जैसी योजनाओं की घोषणा की गई, हर जगह यह योजना कारगर रही। सरकार के मुताबिक इस योजना से देश के 12 करोड़ सीमांत किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह होगी कि इसमें पैसा सीधे किसानों के बैंक खाते में जाएगा। इससे किसी तरह के घपले की आशंका नहीं होगी। इससे किसानों के मन में सरकार के प्रति भरोसा पैदा होगा जो उसकी विश्वसनीयता मजबूत करेगा।
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'धराशाई हो जाएगा जाति का महागठबंधन'

भाजपा के एक नेता ने कहा, "विपक्ष किसानों के नाम पर पूरे साल राजनीति करता रहा। लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से यह हमारा 'ट्रंप कार्ड' है जिसका तोड़ विपक्ष के पास नहीं है। नेता के मुताबिक यूपी के 92 फीसदी से अधिक किसान इस श्रेणी में आएंगे और ऐसे किसान हर जाति-धर्म और हर वर्ग से होंगे। इससे हर जाति-धर्म-वर्ग में हमारी पैठ बढ़ेगी। इससे उत्तर प्रदेश में महागठबंधन धराशायी हो जाएगा क्योंकि एक तरफ उनकी जातिगत राजनीति है जिसमें जीत के बाद वे जातियों की बजाय सिर्फ अपना लाभ देखने लगते हैं, वहीं दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी की राजनीति है जिसमें जाति-धर्म की बजाय सबका ख्याल रखा गया।"
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भाजपा को उम्मीद है कि किसान खुद को सीधा लाभ मिलते देखने के बाद जाति नहीं काम के आधार पर वोट करेंगे।

सरकार से 10 हजार रुपये देने की है अपील

भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष विजय पाल सिंह तोमर ने अमर उजाला से कहा कि हमारे किसानों की सबसे बड़ी समस्या बुवाई के समय पैसे की होती थी। लेकिन अब बुवाई के समय केंद्र सरकार द्वारा छह हजार रुपये की आर्थिक मदद से लोगों को कर्ज नहीं लेना पड़ेगा। इससे वह कर्ज के जाल में नहीं फंसेगा। तोमर के मुताबिक पूरे देश में लगभग 86 फीसदी किसान पांच एकड़ से कम भूमि वाले हैं।
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उत्तर प्रदेश में ऐसे किसानों की संख्या 92 फीसदी तक है। ऐसे में इन किसानों को बुवाई के लिए कम राशि की ही जरुरत होती है जो इस राशि से पूरी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को भी अपनी तरफ से छह हजार रुपये प्रति वर्ष अतिरिक्त राशि देनी चाहिए जिससे किसानों की पूरी समस्या खत्म हो जाए। 

विजय पाल सिंह तोमर ने कहा कि एक किसान नेता होने के नाते उन्होंने केंद्र से हर किसान को प्रति वर्ष 10 हजार रुपये की मदद देने, किसान क्रेडिट कार्ड के कर्ज को पूरे पांच साल तक के लिए बढ़ाने (अभी हर फसल के बाद कर्ज चुकाना अनिवार्य है, अन्यथा भारी ब्याज देना पड़ता है) और ब्याज मुक्त कर्ज देने की मांग की है। 

'यह किसान सम्मान नहीं, किसान अपमान योजना है'

ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति के अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने किसान सम्मान योजना की नहीं, बल्कि किसान अपमान योजना की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि एक एकड़ की खेती पर किसानों को प्रति वर्ष 35 से 40 हजार रुपए का नुकसान हो रहा है। ऐसे में प्रति वर्ष छह हजार रुपये की मदद उन किसानों का अपमान करना ही है। 

सरदार वीएम सिंह के मुताबिक आज की तारीख में स्वामीनाथन कमेटी के आधार पर एक क्विंटल धान की कीमत 2400 रुपये के लगभग होनी चाहिए। सरकार ने 1750 रुपये तय किए हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि सरकार पूरी फसल की खरीदी नहीं करती और फसल को खुले बाजार में बेचने को मजबूर होना पड़ता है जहां इसकी कीमत 1200 से 1300 रुपए के बीच मिल रही है। ऐसे में सरकार के सारे दावों की पोल खुल जाती है। 

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार गन्ने की न्यूनतम कीमत 435 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित है, लेकिन किसान को 325 रुपए से अधिक का भुगतान नहीं होता है। इसलिए सरकार का यह दावा एक चुनावी सियासत से अधिक कुछ नहीं है और इससे किसानों को कोई बड़ा लाभ नहीं मिलेगा। 
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