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किसान आंदोलन बनाम भाजपा: यूपी चुनाव में भारी न पड़े गुस्सा, इसलिए हर कीमत पर सेंधमारी की कोशिश

Thu, 01 Jul 2021 07:32 PM IST
सुरेंद्र जोशी अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 01 Jul 2021 07:32 PM IST
सार

भाजपा नेता अमित वाल्मीकि से विवाद पर भारतीय किसान यूनियन के 200 लोगों पर केस दर्ज किया गया है तो किसान नेता भी इसे लेकर थानों पर धरना दे रहे हैं। 
 

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Kisan Andolan vs BJP: Dont let anger prevail in the UP elections, so try to break it at all costs
सांकेतिक चित्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा को यह बात बहुत अच्छी तरह से मालूम है कि अगर समय रहते किसानों का आंदोलन खत्म न किया गया तो उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में यह उस पर भारी पड़ सकता है। विशेषकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पार्टी को अपने सफाए का डर सता रहा है। यही कारण है कि पिछले सात महीने से चले आ रहे आंदोलन को अब किसी भी कीमत पर खत्म कराने की कोशिश की जा रही है। किसान मानते हैं कि भाजपा नेता अमित वाल्मीकि से किसानों का गाजीपुर में 30 जून को हुआ झगड़ा इसी सोच का नतीजा था।

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सात माह से जारी है आंदोलन
भारतीय किसान यूनियन के नेता धर्मेंद्र मलिक ने अमर उजाला से कहा कि गाजीपुर बॉर्डर पर पिछले सात महीनों से आंदोलन चल रहा है, लेकिन आज तक इस आंदोलन की जगह पर कोई अप्रिय घटना नहीं घटने पाई। अब भाजपा को यह समझ आ रहा है कि किसानों का यह गुस्सा उस पर भारी पड़ सकता है, वह हमारे आंदोलन को खत्म कराने की साजिश रच रही है।
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बकौल मलिक भाजपा एक वाल्मीकि समुदाय के नेता को आगे करके इसे 'किसान बनाम वाल्मीकि समुदाय' के विवाद का रंग देना चाहती है। चूंकि, वाल्मीकि समुदाय के लोग भारी संख्या में किसान भी आंदोलन में शामिल हैं, सबको यहां की सच्चाई मालूम है। यही कारण है कि भाजपा की चाल कामयाब नहीं हो पाई।
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एक जुलाई को सिसौली में वाल्मीकि-दलित समाज के लोगों की पंचायत हुई। पंचायत में समुदाय के नेताओं ने यह स्पष्ट किया कि किसानों से उनका कोई विरोध नहीं है। पंचायत के बाद वाल्मीकि समुदाय के नेताओं ने भारतीय किसान यूनियन के नेताओं के घर जाकर उनसे मुलाकात की और स्पष्ट किया कि वे स्वयं आंदोलन के साथ खड़े हैं और पूरी मजबूती के साथ लड़ाई के लिए तैयार हैं।

किसान नेताओं के अनुसार वाल्मीकि समुदाय और भारतीय किसान यूनियन के नेताओं की समझदारी से इस विवाद सुलझा लिया गया और भाजपा की कोशिश कामयाब नहीं हुई।  इसके पहले 28 जनवरी को भी भाजपा नेता नंदकिशोर गुर्जर ने भी इसी तरह शांतिभंग की कोशिश की थी। उस घटना में भी पुलिस ने पूरी तरह उपद्रवियों का साथ दिया था, लेकिन शांतिभंग की उनकी कोशिश तब भी कामयाब नहीं हुई।
 

कौशांबी थाने में किसानों पर केस दर्ज

इधर भाजपा नेता अमित वाल्मीकि की शिकायत पर भारतीय किसान यूनियन के 200 नेताओं पर गाजियाबाद के कौशांबी थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। किसानों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की 147, 148, 223, 352, 427 और 506 धाराएं लगाई गई हैं। भाजपा नेताओं और किसानों के बीच मारपीट के वायरल वीडियो से किसानों की पहचान की जा रही है। पुलिस ने भी अपनी ओर से कई वीडियो बनाए थे जिनसे आरोपियों की पहचान की जा रही है।

किसानों ने दिया थानों पर धरना
इधर किसानों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने आंदोलन स्थल पर धरना दे रहे थे। उलटे उन पर ही हमला किया गया है। इसलिए मुकदमा उन लोगों पर दर्ज किया जाना चाहिए जिन्होंने किसानों से मारपीट की कोशिश की है। आरोपी भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं पर एफआईआर कराने के लिए किसान यूनियन के नेता उत्तर प्रदेश के विभिन्न थानों पर धरना देकर अमित वाल्मीकि और अन्य पर मुकदमा दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक अब तक उन पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है।


 

नौ जुलाई को फिर बढ़ सकता है विरोध

हरियाणा बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन स्थल पर एक महिला के साथ अभद्रता और बाद में एक किसान को जला दिए जाने की कथित घटनाओं के बाद भी टिकरी बॉर्डर से किसानों का स्थानीय किसानों से विवाद हुआ था। स्थानीय किसानों ने अपनी परेशानी का हवाला देते हुए आंदोलन कर रहे किसानों से धरना स्थल खाली करने को लेकर विवाद भी हुआ था।

जानकारी के मुताबिक, इसी तरह की एक और कोशिश नौ जुलाई को दुबारा की जा सकती है। इसमें दिल्ली के किसान भारी संख्या में गाजीपुर बॉर्डर पहुंचेंगे और राकेश टिकैत से आंदोलन की जगह बदलने पर बातचीत करेंगे क्योंकि आंदोलन से केवल दिल्ली के किसानों का भारी नुकसान हो रहा है। अब तक भारतीय किसान यूनियन ने इस मुद्दे पर कोई रुख स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन अगर इस मामले का कोई हल नहीं निकला तो मामला बिगड़ सकता है। भारतीय किसान यूनियन इस हलचल को लेकर सतर्क है।

भाजपा भी संभालने की कोशिश में जुटी
एक तरफ तो किसान नेता इस बात की कोशिश कर रहे हैं कि यह विवाद किसी भी तरह 'किसान बनाम वाल्मीकि समुदाय' का रंग न ले, वहीं भाजपा भी किसान आंदोलन की भरपाई करने की रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उसके नेता पश्चिमी यूपी के प्रभावी जाट नेताओं से मुलाकात कर उन्हें अपने पाले में लेने की कोशिश कर रहे हैं जिससे चुनाव तक जाटों को दुबारा भाजपा के पाले में लाया जा सके। बीजेपी के एक केंद्रीय मंत्री के जरिए क्षेत्र के जाट नेताओं से संपर्क साधा जा रहा है।

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