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खड़गे का आरोप : बैंकों को निजीकरण कर चंद लोगों के हाथों में देश की संपत्ति सौंपना चाहती है सरकार
Tue, 16 Mar 2021 07:21 PM IST
सुरेंद्र जोशी
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 16 Mar 2021 07:21 PM IST
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मल्लिकार्जुन खड़गे
- फोटो : पीटीआई
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के खिलाफ दो दिवसीय हड़ताल का मुद्दा मंगलवार को राज्यसभा में गूंजा। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे को उठाते हुए समस्या के समाधान के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बयान देने की मांग की। इसके बाद वित्त मंत्री ने बयान देकर स्पष्ट किया कि बैंकों का निजीकरण नहीं किया जा रहा है।
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राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा, कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से बैंकों का कामकाज ठप पड़ गया। आम जनता से लेकर कोराबारी तक इससे परेशान हैं। देश में लगभग 12 राष्ट्रीयकृत बैंक हैं और इनकी एक लाख शाखाएं हैं। इनमें करीब 13 लाख कर्मचारी हैं और 75 करोड़ से ज्यादा खातेदार हैं। ये खातेदार भी बैंक के हितधारक हैं और उनके पूछे बगैर सरकार ने निजीकरण का फैसला किया।
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सरकार की नीतियों से रोजी-रोटी का संकट
उन्होंने आरोप लगाया कि, सरकार की गलत नीतियों और अंधाधुंध निजीकरण के चलते आज यह स्थिति पैदा हुई है और उनक रोजी-रोटी पर भी संकट उत्पन्न हो गया है। सरकार की एकतरफा नीति से सभी लोग परेशान हैं। कोरोना महामारी के वक्त अगर लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे, तो वो कहां जाएंगे।
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इंदिरा गांधी ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था
वरिष्ठ कांग्रेस नेता खड़गे ने कहा कि, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट आया था तब राष्ट्रीयकृत बैंकों के कारण ही भारत की अर्थव्यवस्था संभली थी। वह इसलिए संभव था हुआ क्योंकि हमारे राष्ट्रीयकृत बैंक अच्छा काम कर रहे थे। इंदिरा गांधी ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था, ताकि गरीब से गरीब आदमी भी बैंक में जाकर लोन ले सके। इस फैसले का सभी लोगों ने स्वागत किया था। इसके पीछे का मकसद था कि गरीब लोग बैंक का फायदा उठा सकें और वे लोन लेकर अपना कामकाज चला सके।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाते हुए कहा कि, सभी बैंकों का एक-एक करके विलय किया जा रहा है। बैंकों को घाटे में बताकर निजी हाथों में सौंपने की कोशिशें हो रही हैं। सरकारी बैंकों का निजीकरण करके चंद लोगों के हाथ में इस देश की संपत्ति देना चाहते है। चंद लोग कौन हैं? यह सभी को पता है। कौन-कौन उनके मित्र है, ये भी सभी को पता है। सिर्फ चंद लोगों के लिए ही ये सरकार काम कर रही है।
कर्मचारियों की मांग को तुरंत मानें
खड़गे ने कहा कि हम केंद्र सरकार से मांग करते है कि सरकारी बैंक के कर्मचारियों की मांगों को तुरंत माना जाए। विपक्ष ने पहले भी हमने लड़ाई लड़ी थी और आगे भी इस मुद्दे पर लड़ाई लड़ेंगे। हमारी सभी सहयोगी पार्टियों के साथ मिलकर संसद में इस मुद्दों को फिर से उठाएंगे।
नौ यूनियनों ने रखी दो दिन हड़ताल
गौरतलब है कि नौ यूनियनों के संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने 15 और 16 मार्च को हड़ताल का आह्वान किया था। इनमें एआईबीईए, एआईबीओसी, एनसीबीई, एआईबीओए, बीईएफआई, आईएनबीओसी, एनओबीडब्ल्यू और एनओबीओ यूनियन शामिल है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने पेश आम बजट में सरकार की विनिवेश योजना के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण की घोषणा की थी।