{"_id":"67c2bc3a988b212b660cf678","slug":"khabron-ke-khiladi-what-will-happen-to-nitish-in-future-why-are-statements-being-made-on-cm-face-know-here-2025-03-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Khabron Ke Khiladi: नीतीश का आगे क्या होगा, CM चेहरे पर क्यों हो रही है बयानबाजी? बता रहे हैं खबरों के खिलाड़ी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Khabron Ke Khiladi: नीतीश का आगे क्या होगा, CM चेहरे पर क्यों हो रही है बयानबाजी? बता रहे हैं खबरों के खिलाड़ी
Sat, 01 Mar 2025 05:00 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sat, 01 Mar 2025 05:00 PM IST
सार
बिहार में बदलती सियासत पर इस हफ्ते के ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चर्चा हुई। कोई कह रहा है कि नीतीश के चेहरे पर चुनाव लड़ेंगे तो कोई कह रहा है कि चुनाव नतीजों के बाद तय होगा कि बिहार में मुख्यमंत्री कौन होगा? आइए समझते हैं सभी समीकरण...
विज्ञापन
खबरों के खिलाड़ी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बिहार में चुनाव की आहट से पहले ही हलचल तेज है। भाजपा के कई नेताओं ने चुनाव के बाद मुख्यमंत्री कौन होगा इसे लेकर बोलना शुरू कर दिया है। कोई कह रहा है कि नीतीश के चेहरे पर चुनाव लड़ेंगे तो कोई कह रहा है कि चुनाव नतीजों के बाद तय होगा कि बिहार में मुख्यमंत्री कौन होगा? बिहार में बदलती सियासत पर इस हफ्ते के ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और राजकिशोर मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
राजकिशोर: जब प्रधानमंत्री लाडला मुख्यमंत्री कह रहे थे तब मुझे मनोहर लाल खट्टर याद आ रहे थे। कैसे प्रधानमंत्री उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे थे और अगले दिन लंका कांड हो गया था। जब नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री थे तब नीतीश कुमार उनके सामने थाली खींचने का काम किया था। राजनीति में इन सबके मायने होते हैं। आज की तारीख में नीतीश कुमार अगली बार मुख्यमंत्री बनने की स्थिति में नहीं है। इसीलिए उनके बेटे का नाम आगे किया जाना शुरू किया गया है। नीतीश कुमार जब पूरी तरह से नेपथ्य में जाएं और उनके बेटे सामने आएं तो परिवारवाद वाली बात के ज्यादा मायने नहीं रह जाएंगे। नरेंद्र मोदी का चेहरा अगर दिल्ली में चल सकता है तो वहां पर भाजपा अपना आधार क्यों नहीं बढ़ा सकती है। जहां तक नीतीश कुमार के पलटी मारने वाली बात है तो वो अब नहीं होगा यह मान लीजिए।
विज्ञापन
समीर चौगांवकर: आज नीतीश कुमार का जन्मदिन है। उनके पार्टी के एक नेता उन्हें गुलदस्ता देने गए तो नीतीश ने कहा कि आज आपका जन्मदिन है आपने बताया नहीं। इस पर नेता ने कहा कि नहीं सर आज आपका जन्मदिन है। नीतीश की ऐसी स्थिति हो चुकी है कि उन्हें अपना जन्मदिन तक याद नहीं है। जहां तक भाजपा की बात है तो वो अभी ही बिहार में बड़े भाई की भूमिका में आ चुकी है। मुझे लगता है कि भाजपा चुनाव तक इंतजार करेगी। सीटों का बंटवारा कैसे होता है और नतीजे कैसे आते हैं उसके बाद भाजपा की राजनीति तय होगी। राजद और इतनी आसानी से खारिज नहीं किया जा सकता है। यह तय है कि नीतीश कुमार के चेहरे पर लड़ा जाएगा। नतीजे के बाद यह तय होगा कि मुख्यमंत्री कौन होगा।
राकेश शुक्ल: भाजपा ने एक मैकेनिज्म बनाया है। एक तरफ ओबीसी के बड़े नेता हैं खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दूसरा कुर्मियों के सबसे बड़े नेता हैं नीतीश कुमार, महा दलित वर्ग से जीतन राम मांझी और दलित वर्ग से चिराग पासवान भी हैं। भाजपा बिहार में तेजस्वी की जगह लालू पर हमला करने की रणनीति अपनाती है। इसके पीछे वजह है कि इसके जरिए भाजपा यह मैसेज देने की कोशिश करेगी कि जैसे ही राजद की सरकार बनेगी तो लालू के दौर में राज्य चला जाएगा। जहां तक नीतीश के बेटे की बात है तो वो आते ही मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं बनेंगे।
पूर्णिमा त्रिपाठी: नीतीश कुमार पलटते इसलिए हैं क्योंकि वो इसे अफोर्ड कर सकते हैं। क्योंकि उनका वोटबैंक उनके साथ बरकरार रहता है, भले वो कितनी बार भी पलट जाएं। नीतीश कुमार ने बिहार को रहने लायक बनाया ये कह सकते हैं। मैं खुद बिहारी हूं, इसलिए मैं यह कह रही हूं। पिछले चुनाव में नीतीश को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया था। लेकिन, लोकसभा चुनाव में ऐसा नहीं हुआ। नीतीश का करिश्मा आज भी बरकरार है। भले उनके सेहत की स्थिति ठीक नहीं है।
रामकृपाल सिंह: भाजपा कंफर्टेबली तब जीतती है, जब किसी राज्य में तीन धड़े हों। बिहार की बात करें तो लालू की राजनीति जाति और अल्पसंख्यक वाली रही है। नीतीश की राजनीति सामाजिक बदलाव की राजनीति रही है। उन्होंने जो सामाजिक सशक्तीकरण किया वो बहुत अहम है। नीतीश जी के व्यक्तिगत फैसले क्या होते हैं वो अलग है। उनका निजी चरित्र ईमानदारी का रहा है। अपनी पूरी राजनीति में उन्होंने अपने बेटे को आगे करने की कोशिश नहीं की। जदयू का भाजपा में विलय से फायदा नहीं होगा। क्योंकि तब राइट वर्सेस लेफ्ट की राजनीति हो जाएगी।
चुनाव नीतीश के चेहरे पर लड़ा जाएगा। नतीजे क्या रहते हैं उसके बाद यह तय होगा कि मुख्यमंत्री कौन होगा। भाजपा के लिए नीतीश मंदिर के कलश की तरह हैं वो उन्हें छोड़ेंगे नहीं। नीतीश का भाजपा के साथ नुकसान नहीं होता है। वहीं, राजद के साथ रहने पर उनके सामने यह चुनौती रहती है कि आगे उन्हें सारी चीजें तेजस्वी को सौंपनी होंगी।