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खबरों के खिलाड़ी: मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा के लिए क्या अब भी पीएम मोदी ही सहारा हैं?

Sat, 11 Nov 2023 04:55 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 11 Nov 2023 04:55 PM IST
सार

Khabron Ke Khiladi on Madhya Pradesh, Rajasthan Elections: भाजपा और कांग्रेस जिस तरह मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव लड़ रही है, उसमें बुनियादी फर्क है। यह फर्क कितना बड़ा है और चुनावों पर इसका क्या असर पड़ेगा, जानिए। 
 

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Khabron Ke Khiladi: PM Modi still the support for BJP in Madhya Pradesh, Rajasthan and Chhattisgarh?
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में क्षत्रपों की चर्चा हो रही है। भाजपा के क्षेत्रीय क्षत्रपों की चुनावों में कितनी भूमिका है, इस पर अलग-अलग मत हैं। कांग्रेस जहां इन्हीं क्षत्रपों के भरोसे है, वहीं भाजपा के मामले में यह माना जा रहा है कि वह प्रधानमंत्री के चेहरे के ही सहारे है। इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए 'खबरों के खिलाड़ी' की इस कड़ी में विनोद अग्निहोत्री, राहुल महाजन, प्रेम कुमार, संजय चौगांवकर और संजय राणा मौजूद थे। पढ़िए इस चर्चा के अंश...
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तीन मुख्य राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की बात करें तो वहां भाजपा-कांग्रेस का नेतृत्व किस स्थिति में नजर आ रहा है?
राहुल महाजन: पहले ऐसा लग रहा था कि शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे को दरकिनार किया जा रहा है, लेकिन अब ऐसा नहीं है। भाजपा नेताओं के भाषणों में जातीय जनगणना का प्रभाव दिखाई देता है। राजस्थान में दिए जाने वाले भाषणों में उदयपुर की घटना का जिक्र किया जाता है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई और मुद्दा हावी नहीं है, तो वहां महादेव एप घोटाले का मुद्दा उठा दिया गया है। 
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प्रेम कुमार: राजस्थान में कांग्रेस के पास चेहरा है, लेकिन अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खटपट रही है। उधर, भाजपा में कहा जा रहा है कि वसुंधरा राजे को फिर से दरकिनार किया जा रहा है। या तो भाजपा उन्हें टिकट ही न देती। भाजपा ने उन्हें और उनके समर्थकों को टिकट दिया। सांसद बालकनाथ अब उन्हें भावी मुख्यमंत्री बता रहे हैं। भाजपा ही भ्रम में नजर आती है। अगर वसुंधरा भावी सीएम हैं तो वे प्रधानमंत्री के साथ मंच पर क्यों नहीं दिखतीं। राजस्थान दोनों दलों के लिए 'बागीस्तान' हो गया है। 
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समीर चौगांवकर: भाजपा का रुख साफ है कि हम क्षेत्रीय नेताओं के भरोसे नहीं रहेंगे। प्रधानमंत्री अपनी रैलियों में भी शिवराज के कार्यकाल का जिक्र नहीं करते, राजस्थान में भी वे वसुंधरा और छत्तीसगढ़ में रमन सिंह के कार्यकाल का जिक्र नहीं करते हैं। वे कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं। अगर भाजपा वहां 120+ सीटें जीत जाती है, तभी वह वसुंधरा के अलावा किसी और चेहरे को चुन सकती है। 

क्षत्रप अब कितने मजबूत नजर आते हैं?
संजय राणा:
भाजपा और कांग्रेस में एक छोटा सा फर्क है। भाजपा रणनीति बनाती है और उसे धरातल पर उतारती है। कांग्रेस इसमें चूक जाती है। छत्तीसगढ़ की बात करें तो भूपेश बघेल ने वहां अच्छा काम जरूर किया है, लेकिन ईडी की कार्रवाई कोई आज नहीं हुई है। पहले से चल रही है। छत्तीसगढ़ में पांच साल में भाजपा ने कोई जमीनी काम नहीं किया। मध्य प्रदेश में 18 साल से एक व्यक्ति मुख्यमंत्री हैं। सत्ता विरोधी लहर वहां हो सकती है, लेकिन भाजपा ने उसे मैनेज करने की कोशिश की है। उधर, कांग्रेस में पूरा दारोमदार कमलनाथ पर है। भाजपा पिछली बार आदिवासी क्षेत्रों और चंबल में हारी थी। वहां बड़े नेताओं को उतार दिया गया है। भाजपा में सभी नेता प्रधानमंत्री मोदी के कंधे पर सवार होकर चलना चाहते हैं। 


तीनों ही राज्यों में भाजपा के क्षत्रप पहले सक्रिय नहीं थे, अब कैसी स्थिति है?
विनोद अग्निहोत्री:
भाजपा रणनीति के मामले में सुनियोजित तरीके से काम करती है। ये परंपरा अटलजी के जमाने से है। कांग्रेस का चुनाव बिखरा हुआ रहता है। पिछले कुछ चुनाव में कांग्रेस ने बदलाव किया है। उसने हिमाचल, कर्नाटक में बेहतर तरीके से चुनाव लड़ा। उसी तरीके से वह अब तेलंगाना, मिजोरम और बाकी राज्यों में चुनाव लड़ रही है। जब डेढ़ साल मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार रही, तब शिवराज सिंह चौहान जमीनी तौर पर सक्रिय नजर आए। उनके खिलाफ वैसी सत्ता विरोधी लहर नहीं है, जैसी 18 साल सरकार चलाने के बाद होनी चाहिए। उनके विरोध में लहर उन्हीं की पार्टी में ज्यादा नजर आती है। कमलनाथ ने भी मध्य प्रदेश छोड़ा नहीं। मध्य प्रदेश में अब कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव लड़ती दिखाई दे रही है। इस बार एकजुटता है। उधर, छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की तुलना में रमन सिंह सक्रिय नहीं रहे। कांग्रेस का नेतृत्व वहां बेहतर स्थिति में दिखाई देता है। राजस्थान में मामला डांवाडोल है। वहां भाजपा भावनात्मक ध्रुवीकरण के मुद्दे पर चल रही है। वहां दारोमदार प्रधानमंत्री मोदी पर ही है। कांग्रेस क्षत्रप मॉडल पर और भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के मॉडल पर लड़ रही है।

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