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खबरों के खिलाड़ी: महुआ मोइत्रा की सदस्यता जाने के बाद कितना एकजुट होगा विपक्ष? जानें विश्लेषकों की राय
Sat, 09 Dec 2023 07:24 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sat, 09 Dec 2023 07:24 PM IST
सार
Khabron Ke Khiladi: तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की लोकसभा सदस्यता रद्द हो गई है। इसके बाद से विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि विपक्ष के नेताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। महुआ की सदस्यता रद्द होने के बाद विपक्षी गठबंधन एक बार फिर एकजुट होता दिख रहा है।
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खबरों के खिलाड़ी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पैसे लेकर सवाल पूछने के मामले में महुआ मोइत्रा की लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई है। उन पर हुई कार्रवाई का असर क्या होगा? क्या इस कार्रवाई से 2024 के चुनाव में विपक्ष एकजुट होगा? महुआ मोइत्रा पर हुई कार्रवाई कितनी कम या ज्यादा? इन सभी सवालों पर चर्चा करने के लिए इस बार के खबरों के खिलाड़ी में वरिष्ठ पत्रकार पूर्णिमा त्रिपाठी, राहुल महाजन, प्रेम कुमार, अवधेश कुमार और समीर चौगांवकर मौजूद रहे।
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पूर्णिमा त्रिपाठी
सही गलत का फैसला करने वाले हम नहीं हैं। हालांकि, जिस तरह से कार्रवाई हुई, उस पर सवाल जरूर उठ रहे हैं। जैसे सदस्यों ने कहा भी था कि इस पर चर्चा के लिए समय मिलना चाहिए, वह भी नहीं दिया गया है। जिस तरह से पूरी कार्रवाई हुई, उससे दिखाई देता है कि सब कुछ पहले से तय था। लोकतांत्रिक मापदंडों के लिए अगर नैसर्गिक न्याय का नियम लागू होता तो ज्यादा बेहतर होता।
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आचार समिति ने भी माना है कि पैसों के लेनदेन का कोई सबूत उसे नहीं मिला। इसके बाद भी जो कार्रवाई हुई, वह ज्यादा है। दूसरा जो यूजर आईडी और पासवर्ड शेयर करने की बात है तो इसके लिए कोई तय नियम नहीं है। ऐसे में जो कार्रवाई हुई, वह अपराध के मुकाबले ज्यादा है। जहां तक 2005 और 1993 के मामले की बात है तो उनमें पैसों का लेनदेन होने के सबूत थे। ऐसे में उसमें प्रस्ताव आया और कार्रवाई हुई। लेकिन, इस मामले में सांसद खुद कह रही हैं कि उन्होंने कोई पैसा नहीं लिया। ऐसे में उन मामलों से इस मामले की तुलना करना सही नहीं है। संसद की गरिमा की बात की जा रही है तो संसद की गरिमा उस वक्त कहां गई थी जब रमेश बिधूड़ी दानिश अली के खिलाफ बात कर रहे थे। आपत्ति इस बात से है कि जो भी कार्रवाई हो रही है, वो एकतरफा है, वो दिख रही है। एक महिला के चरित्र पर सवाल उठा देने पर मुझे आपत्ति है।
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राहुल महाजन
इसमें दो-तीन बातें हैं। पहली बात महुआ मोइत्रा को बोलने का मौका नहीं दिया गया। इसमें कितनी सच्चाई है। एथिक्स कमेटी के सामने उन्हें पूरा मौका मिला। दूसरा क्या मनी ट्रेल की बात सही है? इसमें महुआ मोइत्रा ने खुद माना है कि उन्होंने यूजर आईडी और पासवर्ड शेयर किए। उनके कुछ दौरे आईडी पासवर्ड का इस्तेमाल करने वाले ने स्पॉन्सर किए थे। तीसरा- क्या रिपोर्ट पढ़ने के लिए सांसदों को वक्त मिलना चाहिए था? तो इसमें जरूर कह सकते हैं कि थोड़ा समय मिलना चाहिए था। पीए-पीएस को अपना पासवर्ड देना और एक बिजनेसमैन को अपना पासवर्ड देना, दोनों की तुलना करना गलत है। क्या विपक्ष इससे एकजुट होगा? जहां तक इस सवाल की बात है तो इंडिया गठबंधन 2024 के मामले में कमजोर विकेट पर खड़ा दिखाई दे रहा है।
समीर चौगांवकर
मुझे लगता है कि करीब 90 फीसदी सांसद अपने पासवर्ड पीए को देकर रखते हैं। जब महुआ मोइत्रा को आचार समिति के सामने बुलाया गया तो आप वहां अपनी पूरी बात रख सकती थीं, लेकिन आप वहां से आधे में छोड़कर चली आईं। ये तकनीकी तौर पर साबित हो चुका है कि आपकी आईडी और पासवर्ड बाहर इस्तेमाल हो चुका है। मुझे लगता है कि एक बार सभी सांसदों के आईडी और पासवर्ड के इस्तेमाल की जांच होनी चाहिए। अगर कोई अन्य सांसद भी इस तरह के किसी कृत्य में संलिप्त है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रेम कुमार
अगर महुआ ने खुद के फायदे के लिए ऐसा किया है तो इंडिया गठबंधन को इसमें शामिल नहीं होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं है। महुआ मोइत्रा पर दो आरोप हैं। पहला कि लॉगिन क्रेडेंशियल को किसी और दिया गया। यह आरोप साबित है। दूसरा मनी ट्रेल का आरोप है। जो साबित नहीं है। दूसरा यह कि हीरानंदानी ने महुआ मोइत्रा की मदद की। ऐसे में फिर यह भी पता करना होगा कि बातें जाहिर करने का मकसद क्या है? जहां तक प्रक्रिया की बात है तो संसदीय समिति को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि सजा क्या होगी। समिति ने सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की, जो पूरी तरह गलत है। समिति ने मीडिया को रिपोर्ट दिखाई, यह भी गलत है। महुआ मोइत्रा को सदन में नहीं बोलने दिया गया यह गलत है।
अवधेश कुमार
मूल बात यह कि महुआ मोइत्रा हीरानंदानी समूह के पास क्यों गईं? एक सांसद संविधान की गरिमा की शपथ लेता है। गोपनीयता की शपथ लेता है। हैरत की बात यह कि महुआ जिस क्षेत्र की सांसद हैं, वहां से ज्यादा सवाल अदाणी के मामले में हैं। संसद कोर्ट रूम नहीं हो सकता है, जहां आपको जिरह करनी है। आप चाहे पांच रुपये का उपहार लीजिए या पांच लाख का, इससे कोई अंतर नहीं पड़ता है। महुआ खुद फाइनेंशिल कमेटी की महिला रही हैं, उसके बाद भी इस तरह का कृत्य कर रहीं थीं।