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Khabaron Ke Khiladi: क्या बहुमत तक पहुंच गए विजय? विश्लेषकों ने बताया राज्यपाल का बार-बार लौटाना सही या गलत

Sat, 09 May 2026 05:17 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 09 May 2026 05:17 PM IST
सार

इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में तमिलनाडु में टीवीके की सरकार बनने में आ रही अड़चनों पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पीयूष पंत, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, अनुराग वर्मा और संजय राणा मौजूद रहे।

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Khabaron Ke Khiladi Tamil Nadu Government Formation C Vijay Joseph Analysts decode the Governor stalemate situ
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। राज्य में नई नवेली पार्टी टीवीके सबसे बड़ा दल बनकर सामने आई। हालांकि, अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी बहुमत के आंकड़े से 10 कदम दूर रह गई। अब यही दस कदम तय करने में उसे बड़ी मुश्किलें आ रही हैं। विजय राज्यपाल के पास से बार-बार सरकार बनाने का दावा लेकर जा रहे हैं और राज्यपाल बार-बार उन्हें नंबर लेकर आने को कह रहे हैं। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पीयूष पंत, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, अनुराग वर्मा और संजय राणा मौजूद रहे। 
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पीयूष पंत: सांविधानिक रूप से राज्यपाल सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का न्योता देते हैं। इसके बाद नई सरकार को सदन में बहुमत साबित करना होता है। कांग्रेस का समर्थन टीवीके को मिल गया है। शायद इसलिए ज्यादा मुश्किलें आ रही हैं। मुझे लगता है कि अंत में स्थिति साफ हो जाएगी। देर-सबेर विजय ही सरकार बनाएंगे। 
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पूर्णिमा त्रिपाठी: राज्यपाल को ये अधिकार नहीं है कि किसके पास बहुमत है या नहीं है। बहुमत फ्लोर पर साबित करना होता है। लीगली बात करें तो राज्यपाल भी पूरी तरह गलत नहीं हैं। विजय जो पत्र लेकर गए थे उसमें उन्होंने 120 का समर्थन होने की बात कही थी लेकिन अंदर सभी के हस्ताक्षर नहीं थे। तमिलनाडु में जो द्रविड़ राजनीति चल रही थी वो अब बदल गई है। विजय ने गैर-द्रविड़ राजनीति के स्पेस को भरा है। 

राकेश शुक्ल: कार्नाटक और महाराष्ट्र के उदाहरण है जब राज्यपाल ने बहुमत नहीं होने के बाद भी किसी को मुख्यमंत्री बनने के लिए न्योता दिया। बाद में दोनों बहुमत साबित नहीं कर पाए। ऐसे में राज्यपाल अगर नंबर मांग रहे हैं तो गलत नहीं है। यदि ये सरकार बन भी गई तो भी इस सरकार की स्थितिरता पर मुझे संदेह है। 

अनुराग वर्मा: सिनेमा में सीएम बनना आसान है। उसे असल जिंदगी में कैसे चला पाएंगे ये बड़ा सवाल है? मुझे नहीं लगता है कि राज्यपाल गलत निर्णय ले रहे हैं। विजय के साथ एक और चीज है कि वो दक्षिण भारतीय फिल्मों की तरह की मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। गैर-द्रविड़ राजनीति क्या होती है वो अब विजय ही लिखेंगे। उनके लिए उस द्रविड़ विचारधारा से आए नेताओं को अपने साथ लेकर चलना भी बड़ी चुनौती होगी। 

संजय राणा: संविधान कहता है कि राज्यपाल को ये अधिकार है कि वो किसको बुलाए और किसको नहीं बुलाए। गैर-द्रविड़ राजनीति का जो वैक्यूम था  वो बहुत लंबे समय से था। अभिनेता जो नया नया राजनीति में आया है उसके लिए नंबर मैनेज करना बहुत बड़ी चुनौती दिख रही है। कोई पारंपरिक राजनीतिक दल होता तो शायद ये अब तक हो जाता। 

विनोद अग्निहोत्री: तमिलनाडु की राजनीति को ये कहना कि द्रविड़ राजनीति से अलग चली गई मैं इससे सहमत नहीं हूं। वहां द्रविड़ राजनीति को अलग नहीं किया जा सकता है। राज्यपाल बुलाए ये जरूरी नहीं है लेकिन उसे विकल्पों पर विचार करना चाहिए। तकनीकी और सांविधानिक दृष्टि से जो तमिलनाडु के राज्यपाल कर रहे हैं वो कहीं से गलत नहीं है।
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