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Khabaron ke Khiladi: राहुल के आरोपों में कितना दम, विश्लेषकों ने बताया आयोग को घेरने की रणनीति कितनी कारगर?
Sat, 20 Sep 2025 09:04 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 20 Sep 2025 09:04 PM IST
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खबरों के खिलाड़ी।
- फोटो : अमर उजाला
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सवाल उठा रहे हैं कि लोकतंत्र ठीक से नहीं चल रहा है। राहुल कह रहे हैं कि चुनाव आयोग ठीक से काम नहीं कर रहा है। यह भी कह रहे हैं कि चुनाव आयुक्त को लगातार इस तरीके की चिट्ठियां भेजी जा रही थीं कि आप गलत कर रहे हैं। इसके बावजूद भी वह उस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। राहुल गांधी हाइड्रोजन बम की बात कर रहे थे। जो बयान राहुल गांधी दे रहे हैं उनमें कितना दम है? क्या ये सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है? यह और इस तरीके के तमाम सवालों पर इस हफ्ते 'खबरों के खिलाड़ी' में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और अवधेश कुमार मौजूद रहे।
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समीर चौगांवकर: आप लगातार राहुल गांधी की आप राजनीति को देखिए। जिस तरीके से राहुल गांधी लगातार वोट चोर गद्दी छोड़ का नारा लगाते रहे। उसको लेकर उन्होंने बिहार के अंदर एक 16-17 दिन की यात्रा निकाली। बिहार से जो फीडबैक आ रहा है कि इसका बहुत ज्यादा असर जमीनी स्तर पर नहीं हुआ। और कांग्रेस के बड़े नेता भी इस बात का जिक्र कर रहे हैं। विपक्ष के नेता के रूप में और कांग्रेस के बड़े नेता के रूप में राहुल गांधी को यह अधिकार है कि वह सरकार की कमियों को उजागर करें। उसे जनता के बीच पर लेकर आएं। लेकिन आपके पास कोई ऑथेंटिक प्रूफ भी होना चाहिए। आप तथ्य लेकर आइए, जनता के बीच तथ्य लेकर जाइए। सच्चाई लेकर आइए। चुनाव आयोग को पास जाइए। अगर आपको लगता है कि चुनाव आयोग सुनवाई नहीं कर रहा तो आप कोर्ट जाइए। राहुल कांग्रेस जिस तरीके से आगे बढ़ रही है। इस अराजक राजनीति की तरफ से, मुझे लगता है कि कांग्रेस का एक बड़ा वर्ग उनके साथ नहीं है और वह लगातार इस बात से असहज है कि राहुल गांधी कांग्रेस के जो मूलभूत सिद्धांत है उससे कांग्रेस को दूर लेकर जा रहे हैं। यह नई कांग्रेस बन रही है। अब यह ना मतलब इंदिरा गांधी की कांग्रेस है। आप कह सकते हैं सोनिया गांधी या पीवी नरसिंह राव या मनमोहन सिंह वाली कांग्रेस ही है।
पूर्णिमा त्रिपाठी: मुझे लगता है कि उनको खुद अंदर से विश्वास है कि घपलेबाजी हो रही है। कर्नाटक में उनकी सरकार है तो वहां से उनको फिगर्स निकल आते हैं। डाटा मिल जाता है। तो वही एटम बम वाला भी उसी बेसिस पे उन्होंने किया था। फिर यह जो दूसरा अभी किया है वो उसी की कड़ी में था। उन्होंने एडिशन और डिलीशन की बात की थी कि एडिशन और डिलीशन की वजह से करीब 1 लाख वोटों का मामला गड़बड़ हुआ है। उन्होंने अपने साथ लोगों को खड़ा कर दिया। ये लगो स्टेज कह रहे हैं कि उनके नाम से अगर डिलीट हुआ है तो उन्हें नहीं पता। उनके नाम से अगर ऐड किसी का किया है तो उन्हें नहीं पता। तो सबूत तो राहुल गांधी दे रहे हैं। अब वो सबूत कोई माने ना माने वह अपनी जगह पे है। लेकिन इलेक्शन कमीशन पे उन्होंने बिल्कुल खुला जो आरोप लगाया कि वह 18 चिट्ठियां लिखने के बाद भी उसने उस वक्त जवाब नहीं दिया।
राकेश शुक्ल: जब आप चुनाव आयोग पे यह आरोप लगा रहे हैं कि वोटर का नाम ऑनलाइन डिलीट हो रहा है। आपके पास जानकारी है कि वह सॉफ्टवेयर है तो वह सॉफ्टवेयर लेके आते और जब लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे तो उनको बताते कि ऐसा सेलेक्ट करिए और इस सॉफ्टवेयर से ऐसा डिलीट करिए। तो मुझे लगता है एक बड़ा भरोसा कायम होता। चुनाव आयोग को लेके यदि हम बात करें तो मैं यह बात स्पष्टता से कहता हूं कि चुनाव आयोग ना तो कांग्रेस शासनकाल में दूध से धुला था और ना आज दूध से धुला है। इसलिए यह विषय चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेके कहना मुझे लगता है ठीक नहीं होगा।
अवधेश कुमार: राहुल गांधी का निशाना ना चुनाव आयोग है ना तथ्य है। अगर तथ्य होते तो वो शांत हो जाते। पिछले 7 वर्षों के कांग्रेस की रीति रणनीति को थोड़ी बहुत ध्यान से गहराई से समझने की जरूरत है। कांग्रेस को राहुल गांधी के सलाहकारों ने रेडिकलाइज करने की कोशिश की है। वो रेडिकलाइजेशन ऑफ कांग्रेस हो गया। अब वो कांग्रेस नहीं है। असहमत लोग हासिए में पड़े हुए हैं। उनकी कोई पार्टी में भूमिका नहीं है वहां। वह बोल नहीं सकते हैं। बता नहीं सकते हैं। उनका मजाक उड़ाया जाता है।
अवधेश कुमार: राहुल गांधी का निशाना ना चुनाव आयोग है ना तथ्य है। अगर तथ्य होते तो वो शांत हो जाते। पिछले 7 वर्षों के कांग्रेस की रीति रणनीति को थोड़ी बहुत ध्यान से गहराई से समझने की जरूरत है। कांग्रेस को राहुल गांधी के सलाहकारों ने रेडिकलाइज करने की कोशिश की है। वो रेडिकलाइजेशन ऑफ कांग्रेस हो गया। अब वो कांग्रेस नहीं है। असहमत लोग हासिए में पड़े हुए हैं। उनकी कोई पार्टी में भूमिका नहीं है वहां। वह बोल नहीं सकते हैं। बता नहीं सकते हैं। उनका मजाक उड़ाया जाता है।
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