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Khabaron Ke Khiladi: बिहार में राहुल-मोदी के दौरे जारी, विश्लेषकों ने बताया किसका गणित बिगाड़ेंगे चिराग
Sat, 07 Jun 2025 05:02 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 07 Jun 2025 05:02 PM IST
सार
इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में बिहार में हो रही सियासी उठापटक पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, अजय सेतिया और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
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खबरों के खिलाड़ी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार में इस साल के अंत में चुनाव हैं, लेकिन राज्य में सियासत अभी पूरे जोरों पर हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी तक लगातार बिहार के दौरे कर रहे हैं। इन सबके बीच चिराग पासवान के विधानसभा चुनाव लड़ने की खबरों ने चर्चा का बाजार को गर्म कर दिया है। इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में इसी सियासी उठापटक पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, अजय सेतिया और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
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पूर्णिमा त्रिपाठी: चिराग पासवान एनडीए के लिए दिक्कत नहीं होंगे। पिछली बार तो उन्होंने एनडीए के बाहर रहकर भी एनडीए, खासतौर पर भाजपा को फायदा पहुंचाया था। इस बार तो वो एनडीए में हैं। सांसद होते हुए भी वो बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की मंशा जता रहे हैं, ये बताता है कि पीछे से कुछ न कुछ चल रहा है। खासतौर पर भाजपा की ओर से। जहां तक कांग्रेस की बात है तो राहुल गांधी के दौरों से कितना फायदा पार्टी को होता है ये देखना होगा। सबसे रोचक पहलू नीतीश कुमार का रहने वाला है। जिस तरह से उनकी सेहत पर सवाल है वो बताता है कि नीतीश कुमार भाजपा के लिए गले की हड्डी बन गए हैं। लोग कांग्रेस की बात पर कितना भरोसा करेंगे यह भी देखना होगा।
राकेश शुक्ल: राहुल गांधी जितना दौरा अभी कर रहे हैं वो उन्होंने चुनाव के दौरान नहीं किया था। तेजस्वी यादव ने भी तब माना था कि गठबंधन को चुनाव में नुकसान हुआ था। दूसरी गलती कांग्रेस कन्हैया कुमार को बिहार में प्रोजेक्ट करके कर रही है। मुझे नहीं लगता है कि राहुल गांधी के दौरे कांग्रेस को कोई ताकत दे पाएंगे। जहां तक चिराग पासवान की बात है तो चिराग उन नेताओं में आते हैं जो अपने पिता के वोट अपने साथ जोड़ सके हैं। जैसे अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने मुलायम सिंह यादव और लालू यादव के वोट अपने साथ जोड़े हैं। इस बार चिराग पासवान एनडीए में रहते हुए तेजस्वी को उसी तरह टारगेट कर रहे हैं, जैसे पिछली बार वे नीतीश कुमार को टारगेट कर रहे थे।
राकेश शुक्ल: राहुल गांधी जितना दौरा अभी कर रहे हैं वो उन्होंने चुनाव के दौरान नहीं किया था। तेजस्वी यादव ने भी तब माना था कि गठबंधन को चुनाव में नुकसान हुआ था। दूसरी गलती कांग्रेस कन्हैया कुमार को बिहार में प्रोजेक्ट करके कर रही है। मुझे नहीं लगता है कि राहुल गांधी के दौरे कांग्रेस को कोई ताकत दे पाएंगे। जहां तक चिराग पासवान की बात है तो चिराग उन नेताओं में आते हैं जो अपने पिता के वोट अपने साथ जोड़ सके हैं। जैसे अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने मुलायम सिंह यादव और लालू यादव के वोट अपने साथ जोड़े हैं। इस बार चिराग पासवान एनडीए में रहते हुए तेजस्वी को उसी तरह टारगेट कर रहे हैं, जैसे पिछली बार वे नीतीश कुमार को टारगेट कर रहे थे।
अजय सेतिया: एनडीए इस बार मिलकर ही चुनाव लड़ेगा। भले चिराग को लेकर कितनी भी हवा बनाई जाए। मुझे लगता है कि चिराग के साथ दलित वोट को जोड़ने के लिए एनडीए की ओर से ही यह हवा बनाई जा रही है। इस बार टारगेट नीतीश कुमार नहीं है। वहां गठबंधन के बिना कोई जीत नहीं सकता है।
अनुराग वर्मा: बिहार में अगर राहुल गांधी बहुत ज्यादा एक्टिव होते हैं तो यह तेजस्वी यादव और उनके सहयोगियों के लिए डर की बात ज्यादा होगी, न कि एनडीए के लिए। इस बार का चुनाव यह तय करेगा कि अगले 25-30 साल तक बिहार कि सियासत में कौन बड़ा चेहरा रहेगा। चिराग पासवान के साथ एक सकरात्मक बात है। वो है उनकी साफ-सुथरी छवि। कोई भी बड़ा नेता केंद्र में मंत्री बनने की जगह राज्य का मुख्यमंत्री बनना ज्यादा पसंद करेगा।
अनुराग वर्मा: बिहार में अगर राहुल गांधी बहुत ज्यादा एक्टिव होते हैं तो यह तेजस्वी यादव और उनके सहयोगियों के लिए डर की बात ज्यादा होगी, न कि एनडीए के लिए। इस बार का चुनाव यह तय करेगा कि अगले 25-30 साल तक बिहार कि सियासत में कौन बड़ा चेहरा रहेगा। चिराग पासवान के साथ एक सकरात्मक बात है। वो है उनकी साफ-सुथरी छवि। कोई भी बड़ा नेता केंद्र में मंत्री बनने की जगह राज्य का मुख्यमंत्री बनना ज्यादा पसंद करेगा।
समीर चौगांवकर: मुझे लगता है कि बिहार में 2025 के चुनाव में ही भाजपा अपना मुख्यमंत्री बना सकती है। राजनीति में कोई उदार नहीं होता है। 2020 में भाजपा ने नीतीश को मुख्यमंत्री इसलिए बनाया था, क्योंकि उस समय उन्हें डर था कि अगर नीतीश को मुख्यमंत्री नहीं बनाया तो वो लालू के साथ चले जाएंगे। पिछले चुनाव में उन्होंने राजनीतिक नुकसान पहुंचाया था तो उनका क्या हश्र हुआ था ये सबने देखा था। इस बार वो राजनीतिक नुकसान पहुंचाने की स्थिति में नहीं है।
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