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खबरों के खिलाड़ी: राहुल के संसदीय क्षेत्र से शुरू हुआ अखिलेश का रथ, विश्लेषकों ने बताई सपा की क्या रणनीति
Sat, 26 Sep 2026 05:16 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 26 Sep 2026 05:16 PM IST
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खबरो के खिलाड़ी।
- फोटो : अमर उजाला
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का चुनावी रथ रायबरेली से शुरू हुआ। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र से शुरू हुई इस यात्रा के कई मायने निकाले जा रहे हैं। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी और राकेश शुक्ल मौजूद रहे।
विनोद अग्निहोत्री: वहां लोकसभा चुनाव में भले ही कांग्रेस जीतती हो, लेकिन विधानसभा में अमेठी-रायबरेली में समाजवादी पार्टी का ही दबदबा रहता है। सपा के ऊंचाहार के विधायक जो अब सत्ता पक्ष के साथ चले गए हैं। उन्हें भी संदेश देने के लिए अखिलेश ने यादव ने रायबरेली से अपनी यात्रा शुरू की। हालांकि, कांग्रेस इससे असहज है। भले राहुल गांधी और प्रियंका ने कुछ नहीं कहा हो लेकिन अजय राय ने तो प्रतिक्रिया दे दी। कुल मिलाकर ये गठबंधन की रस्साकस्सी है।
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विनोद अग्निहोत्री: वहां लोकसभा चुनाव में भले ही कांग्रेस जीतती हो, लेकिन विधानसभा में अमेठी-रायबरेली में समाजवादी पार्टी का ही दबदबा रहता है। सपा के ऊंचाहार के विधायक जो अब सत्ता पक्ष के साथ चले गए हैं। उन्हें भी संदेश देने के लिए अखिलेश ने यादव ने रायबरेली से अपनी यात्रा शुरू की। हालांकि, कांग्रेस इससे असहज है। भले राहुल गांधी और प्रियंका ने कुछ नहीं कहा हो लेकिन अजय राय ने तो प्रतिक्रिया दे दी। कुल मिलाकर ये गठबंधन की रस्साकस्सी है।
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पूर्णिमा त्रिपाठी: कांग्रेस की गठबंधन की समस्या हमें हर जगह खिंचती दिखती है। हरियाणा में यही हुआ। बिहार में भी यही हुआ। इससे वोटर्स में गलत संदेश जाता है। थोड़ा अखिलेश यादव को भी बड़ा दिल दिखाना चाहिए था। यात्रा शुरू कर रहे थे तो अगर कांग्रेस को भी साथ ले लेते तो उसका एक अलग मैसेज जाता। चुनाव में पांच-छह महीने से ज्यादा नहीं रह गए हैं ऐसे में अगर दोनों दलों को गठबंधन करना है तो अब एक मोटा फ्रेमवर्क तैयार कर लेना चाहिए।
राकेश शुक्ल: अखिलेश यादव बहुत सुलझे हुए नेता हैं। राजनीति में कोई किसी का अपना नहीं होता है। अखिलेश यादव को लग रहा है कि बसपा और ओवैसी का गठबंधन अगर हो गया तो वो उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है। जब कांग्रेस और सपा के नेता बैठेंगे तो 2022 और 2024 के चुनाव के हिसाब से बात करेंगे। सपा 2022 के हिसाब से बात करेगी तो कांग्रेस 2024 के चुनाव नतीजों के हिसाब से बार्गेनिंग करेगी। कुल मिलाकर समाजवादी पार्टी कहीं से भी अपने को कमतर नहीं दिखा रही है। इसीलिए वो रायबरेली से अपने अभियान की शुरुआत कर रहे हैं।